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भोपाल एम्स में होगी जीनोम टेस्टिंग:1 करोड़ रुपए का बजट मिला; जरूरी केमिकल्स की खरीदी शुरू; 1 महीने में होने लगेगी जांच

भोपाल6 महीने पहलेलेखक: आनंद पवार

भोपाल के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) में कोरोना के जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट जल्दैनिक भास्कर ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंगी।

जीनोम सीक्वेंसिंग की रिपोर्ट लेट आ रही है? सरकार क्या कदम उठा रही है?

जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए जो प्रोटोकॉल है, उसका पालन कर रहे हैं। जिस स्तर पर सैंपल भेजना है। हम सुचारू रूप से कर रहे हैं। केंद्र की तरफ से भी हमें पांच मशीनें मिलने वाली हैं। एम्स भोपाल में सरकार की तरफ से बजट दे दिया गया है। इसमें वहां भी जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू होने वाली है। यहां एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि कोरोना का कोई भी वैरिएंट हो, उसका ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल समान है। सुनिश्चित किया है कि जैसे ही केस की पहली जानकारी मिले, उसका ट्रीटमेंट जल्द शुरू हो सके।

कोरोना केस बढ़ने के बावजूद सख्ती दिखाई नहीं दे रही? लोग बिना मास्क घूम रहे? रोको टोको अभियान भी नहीं?

हमारे निर्देश हैं कि चाहे जनजागरण या लोगों को शिक्षित करने का मामला हो। सभी कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान रखें। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं। रोको टोको अभियान चल रहा है। हम सबको सुनिश्चित करना है कि कोरोना की लड़ाई जीतना है, तो मास्क पहनना है, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना है। बिना वजह भीड़ एकत्रित नहीं करना है। इस संबंध में सरकार के पहले ही निर्देश हैं। कोरोना की जंग से लड़ने के लिए वैक्सीन बड़ा हथियार है। हम वैक्सीनेशन भी तेजी से कर रहे हैं।

सरकार और कौन से प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है?

अभी ऐसा कोई विचार नहीं है। हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि केसेस नहीं बढ़ें। इसके लिए जरूरी है कि कोविड प्रोटोकॉल का ध्यान रखें। सिनेमा घर, स्वीमिंग पूल, जिम, कोचिंग में दो डोज लगने पर ही प्रवेश की अनुमति और कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए हैं।

छह महीन पहले ही लैब बन गई थी
बता दें कि भोपाल एम्स में कोविड की स्पाइक प्रोटीन में होने वाले म्यूटेशन का पता करने के लिए जरूरी जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्ट के लिए लैब 6 महीने पहले बन चुकी है। जरूरी केमिकल्स नहीं होने की वजह से टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं। अब प्रदेश सरकार की तरफ से जरूरी केमिकल्स की खरीदी के लिए बजट दिया गया है।

अभी दिल्ली और पुणे भेज रहे सैंपल
इंदौर में जीनोम सीक्वेंसिंग की एक प्राइवेट लैब है, लेकिन सरकार यहां टेस्ट नहीं करा रही है। सैंपल दिल्ली और पुणे शहर भेजे जाते हैं। इसकी वजह से देर होती है। रिपोर्ट आने में एक महीने से ज्यादा समय लगता है।