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घाटे का सौदा:किसानों से 368 करोड़ में खरीदे 2 लाख टन गेहूं को 320 करोड़ में बेचेगी सरकार

भोपाल23 दिन पहले
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1840 के रेट से खरीदा, बेचने का बेस प्राइस 1580। - Dainik Bhaskar
1840 के रेट से खरीदा, बेचने का बेस प्राइस 1580।

प्रदेश के किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी के बाद गोदामों में पड़े दो लाख टन गेहूं को सरकार घाटे में बेचने की तैयारी कर रही है। मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कार्पोरेशन ने किसानों से समर्थन मूल्य पर(वर्ष 2019-2020 में) 1840 रुपए क्विंटल में खरीदे गए गेहूं को बेचने के लिए बेस प्राइस 1580 रुपए क्विंटल रखा है। ये गेहूं 368 करोड़ रुपए में किसानों से खरीदा गया है, जबकि इसमें बारदाने, परिवहन और भंडारण का खर्चा 45 करोड़ रुपए अलग है।

इस गेहूं को बेचने के लिए 48 करोड़ रुपए घाटे वाली बेस प्राइस के साथ ही टेंडर में ऐसी शर्तें रखी गई हैं, जिसमें देश की एक या दो चुनिंदा कंपनियां शामिल होंगी। सरकार के घाटे में गेहूं को बेचने पर सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि फूड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया(एफसीआई) ने रिजर्व प्राइस 2 हजार रुपए प्रति क्विंटल रखी है।

ऑनलाइन टेंडर जारी कर दिए हैं बिक्री के लिए

प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019-2020 में समर्थन मूल्य पर 10 लाख किसानों से 77 लाख टन गेहूं खरीदा था। एफसीआई ने केंद्रीय पूल से 70 लाख टन गेहूं लिया था, जबकि प्रदेश के पास 7 लाख टन गेहूं गोडाउन में रखा है। इसमें से 2 लाख टन गेहूं को बेचने के लिए मप्र स्टेट सिविल सप्लाइज कार्पोरेशन ने ऑनलाइन टेंडर जारी किए हैं।

ये प्रमुख शर्तें-बड़ी कंपनियों को ही मौका

  • गेहूं खरीदने वाली कंपनी की मासिक उत्पादन क्षमता 25 हजार मीट्रिक टन होना चाहिए।
  • गेहूं खरीदने के लिए कंपनी की नेटवर्थ 100 करोड़ रुपए होना अनिवार्य है।
  • दो लाख टन गेहूं खरीदने के लिए सात दिन में 300 करोड़(90 फीसदी राशि) जमा कराना होंगे।
  • एफसीआई देशभर में खुले बाजार में 2000 रुपए प्रति क्विंटल (रिजर्व प्राइस) में गेहूं बेचेगा। वहीं प्रदेश में 1580 रुपए क्विंटल में कंपनियों को बुलाया गया है।

उठे सवाल

प्रदेश के मिलर्स एसोसिएशन ने सीएम शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर सवाल उठाया है कि जब एफसीआई प्रदेश से खरीदे गेहूं को 2 हजार रुपए क्विंटल में बेच रहा है तो मप्र बाकी गेहूं को घाटे में क्यों बेचने जा रहा है। इसके टेंडर में नियम-शर्तें ऐसे डाले गए हैं, जिसमें प्रदेश का कोई मिलर्स शामिल नहीं हो सकेगा। पहली बार टर्नओवर की जगह 100 करोड़ की नेटवर्थ जैसी शर्त डाली गई।

जल्दी बेचने के लिए
^मंडी और वेयर हाउस में कब तक पुराना गेहूं रखेंगे। बेस प्राइस 1580 रुपए रखी है, लेकिन इसके उपर भी खरीदार बोली लगा सकेंगे। हमने शर्तें उपार्जन के चलते ऐसी रखी है, ताकि जल्दी से गेहूं चला जाए। वैसे टेंडर में मिलने वाली कीमत देखेंगे, फिर आखिरी विचार होगा।
- फैज अहमद किदवई, प्रमुख सचिव, खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग

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