भास्कर एक्सक्लूसिवधार के कारम डैम के टेंडर में 1% का कमीशन:गुजरात की कंपनी ने दी थी 1.23 करोड़ रिश्वत; जानिए किस अकाउंट में कितने रुपए आए

भोपाल5 महीने पहलेलेखक: योगेश पाण्डे

बात 10 अप्रैल 2018 की है। MPSEDC (मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कार्पोरेशन) के सिस्टम पर एक अलर्ट मैसेज डिस्प्ले हुआ कि टेंडर नंबर 10044 में छेड़छाड़ की गई है। यह देख MPSEDC के तत्कालीन एमडी मनीष रस्तोगी का माथा ठनका। उन्होंने पड़ताल की तो पता चला कि ये तो टेंडर घोटाला है। जांच हुई तो कमीशन का खेल पकड़ में आया। ये धार जिले का के उसी कारम डैम का टेंडर था, जिसकी दीवार पिछले दिनों टूटने से 18 गांवों को खाली कराना पड़ा था। इस मामले में सरकार ने 8 इंजीनियरों को सस्पेंड कर दिया है।

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रस्तोगी ने जल संसाधन विभाग को चिट्‌ठी लिखी और इस टेंडर को निरस्त करने को कहा। ऐसे और भी टेंडर थे। सीएम शिवराज सिंह चौहान के आदेश पर आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) ने जांच शुरू की। जैसे-जैसे जांच बढ़ती गई। घोटाले की परतें खुलती गईं। टेंडर नंबर 10044 की जांच में पता चला कि गुजरात की कंपनी सोरठिया बेलजी ने कारम डैम का टेंडर लेने के लिए 1 प्रतिशत कमीशन दिया था। दैनिक भास्कर के पास इस टेंडर की जांच की चार्जशीट उपलब्ध है। हालांकि, सीएम के आदेश पर इस कंपनी का टेंडर निरस्त कर दिया गया। इसके बाद टेंडर दिल्ली की ANS कंपनी को दिया था। यही वो कंपनी है, जिसकी लापरवाही के चलते कारम डैम के पानी में हजारों ग्रामीणों के घर और भविष्य की उम्मीदें भी बह गईं। आइए जानते हैं कैसे कारम डैम के निर्माण की नींव में धांधली हुई...

कारम डैम के टेंडर से छेड़छाड़ की शिकायत के बाद जांच की गई। EOW की चार्जशीट में खुलासा हुआ कि टेंडर अमाउंट का 1 प्रतिशत कमीशन दिया गया था।
कारम डैम के टेंडर से छेड़छाड़ की शिकायत के बाद जांच की गई। EOW की चार्जशीट में खुलासा हुआ कि टेंडर अमाउंट का 1 प्रतिशत कमीशन दिया गया था।

अब पूरी कहानी सिलसिलेवार जानिए...

20 दिसंबर 2017 को कारम डैम का पहला टेंडर प्रकाशित हुआ था। यह टेंडर कारम सिंचाई प्रोजेक्ट के आगे स्पिल-वे, ओवरफ्लो, मिट्‌टी का बांध एवं इससे संबंधित काम के लिए निकाला गया। टेंडर के ऑनलाइन सेल की आखिरी तारीख 3 फरवरी 2018 थी। टेंडर खोलने की आखिरी तारीख 5 मार्च 2018 थी।

1 मार्च 2018 को चीफ इंजीनियर राजीव सुकलीकर ने बताया कि इस टेंडर के लिए 5 कंपनियां पात्र पाई गई हैं। 5 मार्च को निर्धारित समय पर टेंडर नंबर 10044 की फाइनेंशियल बिड खोली गई। इसमें गुजरात की सोरठिया बेलजी रत्ना एंड कंपनी एल-1 पर आई।

6 मार्च 2018 को चीफ इंजीनियर सुकलीकर ने टेंडर नंबर 10044 पर शासन की निविदा मूल्यांकन समिति की बैठक के लिए भेजा।

27 मार्च 2018 को वृहद परियोजना नियंत्रण मंडल की बैठक में इस पर अंतिम सहमति बनी।

(इस समिति में मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, जल संसाधन मंत्री, कृषि मंत्री, राज्य मंत्री नर्मदा घाटी विकास, मुख्य सचिव और कृषि उत्पादन आयुक्त, ACS वित्त, ACS जल संसाधन और प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग सदस्य होते हैं। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक उस बैठक में सीएम और जल संसाधन मंत्री मौजूद नहीं थे।)

10 मई 2018 को MPSIDC के प्रबंध संचालक मनीष रस्तोगी ने जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता को सूचना दी कि जल संसाधन विभाग के टेंडर क्रमांक 10044 और 10030 की बिड प्रक्रिया में गड़बड़ी है। इस टेंडर को निरस्त कर दोबारा टेंडर बुलाएं।

12 जून 2018 को टेंडर नंबर 10044 को निरस्त कर कंपनी को कारम प्रोजेक्ट के एग्रीमेंट को निरस्त करने की सूचना भेज दी गई।

(वृहद परियोजना नियंत्रण मंडल ने 27 मार्च 2018 को मेसर्स सोरठिया बेलजी रत्ना एंड कंपनी, अंजर, गुजरात के 105 करोड़ के टेंडर को आखिरी मंजूरी दे दी थी।)

इससे पहले एक बार रद्द हो चुका था कारम का टेंडर
15 मई 2016 को इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 304.44 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृत मिली थी। 123 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति प्राप्त थी। इसे शासन स्तरीय निविदा मूल्यांकन समिति की बैठक में 20 दिसंबर 2017 को अस्वीकृत कर दिया गया था। टर्नकी पद्धति से दोबारा टेंडर बुलाने का निर्णय लिया गया।

प्रथम आमंत्रण में सबसे कम रेट वाले निविदाकार मेसर्स GACCPL (80%) और इक्यूपमेंट प्राइवेट लिमिटेड भोपाल (20%) के जॉइंट वेंचर ने 105.86 करोड़ की राशि ऑफर की थी।

अब जानिए कमीशन का खेल...
टेंडरों की हेरा-फेरी में अहम किरदार रहे मनीष खरे को 28 मई 2019 को EOW ने गिरफ्तार किया। दरअसल, मनीष की फर्म के अकाउंट में ही रिश्वत के पैसे भेजे गए थे। मनीष ने जांच एजेंसी को दिए अपने बयान में बताया कि उसने खुद सोरठिया बेलजी कंपनी से टेंडर के लिए बात की थी। वह टेंडरों में टेम्परिंग करने वाली फर्म ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन के संचालक विनय चौधरी के लिए काम करता है। सिर्फ सोरठिया ही नहीं, उसने टेंडर दिलवाने के लिए कई कंपनियों से संपर्क किया था। खैर... हम लौटते हैं कारम डैम पर।

मनीष ने बताया कि पोर्टल में टेम्परिंग कर उन्होंने ही सोरठिया को एल-1 बनवाया था। तकनीकी भाषा में एल-1 का मतलब वह कंपनी होती है जो सबसे कम राशि पर सरकार का काम करने के लिए तैयार है। पहले सोरठिया ने 116 करोड़ रुपए की राशि भरी थी। उसे ऑस्मो कंपनी के डायरेक्टर्स ने टेम्परिंग कर 105 करोड़ रुपए कर दिया था। इस काम के लिए कंपनी के मालिक हरेश सोरठिया से ऑस्मो के संचालक विनय चौधरी ने बिड राशि के 1.5% पर बात की थी, लेकिन सौदा 1% पर फाइनल हुआ था।

मौके पर यही बोर्ड अब भी लगा हुआ है, लेकिन यहां इस कंपनी ने काम ही नहीं किया। काम यहां ग्वालियर की सारथी कंस्ट्रक्शन ने किया।
मौके पर यही बोर्ड अब भी लगा हुआ है, लेकिन यहां इस कंपनी ने काम ही नहीं किया। काम यहां ग्वालियर की सारथी कंस्ट्रक्शन ने किया।

किस्तों में किया कमीशन का पेमेंट
हरेश सोरठिया ने कमीशन के पैसों का भुगतान किस्तों में किया। इसके लिए मनीष खरे की फर्म माइल स्टोन बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के बैंक ऑफ बड़ौदा के कोहेफिजा शाखा के अकाउंट नंबर 50380200000038 एवं 50380200000037 में भुगतान किया। ये ट्रांजेक्शन सोरठिया बेल्जी ने वड़ोदरा की गोत्री रोड स्थित एचडीएफसी की बैंक शाखा के अकाउंट नंबर 03848710000014 से किए गए थे।

23 जनवरी 2017 से 9 फरवरी 2018 तक 3 करोड़ 33 लाख 53 हजार 892 रुपए मनीष की फर्म के अकाउंट में सोरठिया ने भेजे थे। बताया जा रहा है कि इसमें दूसरे टेंडरों का कमीशन भी शामिल था।

मनीष खरे की फर्म माइल स्टोन बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के बैंक ऑफ बड़ौदा के भोपाल की कोहेफिजा शाखा के अकाउंट नंबर 50380200000038 भुगतान किया।
मनीष खरे की फर्म माइल स्टोन बिल्डर्स एंड डेवलपर्स के बैंक ऑफ बड़ौदा के भोपाल की कोहेफिजा शाखा के अकाउंट नंबर 50380200000038 भुगतान किया।

ये ताे हुआ शुरुआती खेल, अब समझिए नई कंपनी, नया खेल
टेंडर में गड़बड़ी के प्रमाण मिलने और केस जांच एजेंसी को चले जाने के बाद कारम डैम के नए सिरे से टेंडर बुलाए गए। इस बार टेंडर दिल्ली की ANS कंस्ट्रक्शन को 304.44 करोड़ रुपए में मिला। कंपनी ने जल संसाधन विभाग के साथ काम शुरू करने का एग्रीमेंट भी कर लिया था। लेकिन कारम डैम की साइड पर ऐसा नहीं हुआ। वहां कोई और कंपनी सारथी कंस्ट्रक्शन काम कर रही थी। सारथी कंस्ट्रक्शन वह कंपनी है, जिससे ग्वालियर-चंबल के बड़े नेताओं का संबंध है। 10 अगस्त 2018 से दिल्ली की ANS कंस्ट्रक्शन की बजाय सारथी कंस्ट्रक्शन ने काम शुरू किया। बांध बनने का काम 3 साल में पूरा हो जाना था। लेकिन कोरोना महामारी के चलते देरी हुई। बारिश से पहले जल्दबाजी में काम पूरा करने के लिए मिट्टी को कम्पैक्ट नहीं किया। इसी वजह से मिट्टी की दीवार (पाल) में लीकेज होना शुरू हो गया और दीवार ढह गई।

कमीशन का भुगतान किस्तों में किया गया। इसका खुलासा होने के बाद यह टेंडर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद कारम डैम का टेंडर दोबारा निकाला गया।
कमीशन का भुगतान किस्तों में किया गया। इसका खुलासा होने के बाद यह टेंडर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद कारम डैम का टेंडर दोबारा निकाला गया।

क्या है ई-टेंडरिंग, ये हैं घोटाले के किरदार
सरकार ने टेंडरिंग प्रणाली ऑनलाइन करने का जिम्मा MPSEDC को दिया। MPSEDC ने बेंगलुरू की एंट्रेस और टीसीएस का सिलेक्शन किया। इन दोनों कंपनियों ने ई-टेंडरिंग के लिए पूरा स्ट्रक्चर बनाया। मॉनिटरिंग का पूरा जिम्मा MPSEDC का ही था। लेकिन यहां के अधिकारियों ने भोपाल में ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन के कर्मचारी से मिलीभगत कर टेंडरों में सेंधमारी शुरू कर दी। ऑस्मो के डायरेक्टर्स घोटाले के मुख्य सूत्रधार बने। उनके साथ कई बिचौलिए भी जुड़ते गए। कारम के टेंडर में जिस बिचौलिए मनीष का नाम सामने आया, उसने ऑस्मो के कहने पर गुजरात की सोरठिया बेलजी से बात की थी। दोनों के बीच 1 प्रतिशत कमीशन पर डील हुई थी।

फिर ऑस्मो के ऑफिस से टेंडरों में टेम्परिंग हुई। सोरठिया के टेंडर के रेट बदले गए। उसे टेंडर मिल गया। जांच में पता चला कि ऑस्मो के जिस सिस्टम से टेम्परिंग हुई, वो डायरेक्टर वरुण का था। ऑस्मो के डायरेक्टर विनय चौधरी, वरुण चतुर्वेदी और सुमित गोलवलकर काे गिरफ्तार किया गया। कंपनी के मानसरोवर कॉम्प्लेक्स स्थित दफ्तर के कम्प्यूटरों से टेंडरों में छेड़खानी करने की जानकारी सामने आई। यह भी पता लगा कि जिस यूजर आईडी के द्वारा दो आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कर टेंडरों में छेड़छाड़ की गई, इस आईपी से कंपनी के डायरेक्टर विनय चौधरी का रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर *****92919 लिंक है। MPSEDC के मैनेजर नंदकिशोर ब्रम्हे भी गिरफ्तार कर लिए गए।

तस्वीरों में दखिए कारम डैम फूटने पर क्या हुआ...

कारम डैम रिसने लगा तो पानी निकालने के लिए पांच पोकलेन मशीनों से नहर खोदकर पानी निकालने की व्यवस्था की गई।
कारम डैम रिसने लगा तो पानी निकालने के लिए पांच पोकलेन मशीनों से नहर खोदकर पानी निकालने की व्यवस्था की गई।

रातोंरात सेना को तैनात करना पड़ा...

बांध से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए सेना ने मोर्चा संभाल लिया था। अनहोनी की आशंका के चलते लोगों को बचाने के लिए सेना का हेलीकॉप्टर भी तैनात किया गया था।
बांध से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए सेना ने मोर्चा संभाल लिया था। अनहोनी की आशंका के चलते लोगों को बचाने के लिए सेना का हेलीकॉप्टर भी तैनात किया गया था।

पुलिस अचानक पहुंची और मुनादी कर दी...

पुलिस अचानक गांव पहुंची और लोगों को घर खाली कर सुरक्षित स्थान पर जाने की मुनादी कर दी। इससे गांव के लोग घबरा गए और घर छोड़कर चल दिए।
पुलिस अचानक गांव पहुंची और लोगों को घर खाली कर सुरक्षित स्थान पर जाने की मुनादी कर दी। इससे गांव के लोग घबरा गए और घर छोड़कर चल दिए।

जो जिस हाल में था घर छोड़कर निकल पड़ा...

डैम फूटने से अनहोनी की आशंका से आसपास के गांव खाली करा दिए गए थे। घबराए हुए ग्रामीण जिस हालत में थे, उसी में राहत शिविरों के ओर चल पड़े।
डैम फूटने से अनहोनी की आशंका से आसपास के गांव खाली करा दिए गए थे। घबराए हुए ग्रामीण जिस हालत में थे, उसी में राहत शिविरों के ओर चल पड़े।

बाढ़ की आशंका से घिरे तो डर गए...

बाढ़ की आशंका के चलते खरगोन में नदी के किनारे बसे गांवों के लोग सुरक्षित स्थान पर चले गए थे। यहां पूरी बस्ती के पानी में घिरने की आशंका थी।
बाढ़ की आशंका के चलते खरगोन में नदी के किनारे बसे गांवों के लोग सुरक्षित स्थान पर चले गए थे। यहां पूरी बस्ती के पानी में घिरने की आशंका थी।

इन खबरों से जानिए पूरा हाल...

धार के कारम डैम को फूटने से बचाने के लिए अब सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। सेना के जवान रात करीब 2 बजे मौके पर पहुंचे। जवान बांध को फूटने से बचाने के काम में जुट गए हैं। इसके अलावा NDRF की सूरत, बड़ोदरा, दिल्ली और भोपाल से एक-एक टीम भी मौके के लिए रवाना कर दी गई है। हर टीम में करीब 30 से 35 ट्रेंड जवान शामिल हैं। MP में 304 करोड़ का डैम फूटने का खतरा:धार में रिस रहे बांध को बचाने सेना ने संभाला मोर्चा; रात 2 बजे पहुंचे जवान

धार में कारम नदी पर 304 करोड़ 44 लाख रुपए की लागत से बन रहा डैम पहली ही बारिश में लीक हो गया। धार और खरगोन जिले के 18 गांवों के हजारों लोगों की जान सांसत में आ गई है। डैम के रिसाव को रोकने के साथ ही उसके पानी को बहाने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। यहां तक कि सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। MP के डैम में लीकेज की 7 बड़ी वजह:पहाड़ के पानी का प्रेशर इग्नोर किया, मिट्‌टी की कमजोर वॉल बना दी; जानें - खामियां

कारम डैम से करीब 48 घंटे की मशक्कत के बाद अब बांध की दीवार तोड़कर पानी छोड़ा जा रहा है। ये पानी कारम नदी से बहकर प्रभावित गांवों से होता हुआ महेश्वर में जाकर नर्मदा नदी में मिलेगा। प्रशासन ने प्रभावित गांवों में अलर्ट जारी कर गांवों को खाली करा लिया है। लीकेज वाले डैम की वॉल तोड़कर छोड़ा जा रहा पानी:भारी बारिश के अलर्ट के बाद सरकार ने बदला प्लान, 18 गांव कराए खाली

हर घर में राखी बांधने को लेकर तैयारी चल रही है... अचानक, एक अनाउंसमेंट होती है और सभी के खिले चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं। अनाउंस होता है कि... बांध में दरार आ गई है, सभी लोग अपना कीमती सामान लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी शुरू कर दें। घरों में तले जा रहे कुछ पकवान गैस पर चढ़ी कढ़ाई में तो गूंथा हुआ आटा और बेसन परात में ही पड़ा रह गया। ये डैम फूटने का डर, दहशत में 18 गांव:धार में प्रशासन ने खाली कराया गांव; जिसके हाथ में जो आया वो लेकर चल दिया

धार के कारम डैम फूटने के 15 दिन बाद सरकार ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की है। इसमें लापरवाही बरतने वाले जल संसाधन विभाग के 8 इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। शुक्रवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी निर्माण एजेंसी और सरकार की जांच पर सवाल उठाया था। कारम डैम फूटने के 15 दिन बाद 8 अफसर सस्पेंड:जल संसाधन विभाग के इंजीनियर्स पर एक्शन; बांध निर्माण में धांधली को किया अनदेखा

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