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ऑक्सीजन ऑडिट:हमीदिया का प्लांट 67.3%, जेपी का 30% शुद्ध ऑक्सीजन बना पाया, कमला नेहरू का सेंसर बंद मिला

भोपाल2 महीने पहले
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कमला नेहरू में 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता का प्लांट लगा है। - Dainik Bhaskar
कमला नेहरू में 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता का प्लांट लगा है।
  • भोपाल के 9 सरकारी अस्पतालों में लगे 10 ऑक्सीजन प्लांट में से 3 ड्राय रन में फेल

कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल ऑक्सीजन जुटाना देशभर के लिए चुनौती बन गया था। भोपाल के हाल भी इससे इतर नहीं थे। हालात थोड़े सुधरे, ऑक्सीजन की जरूरत कम हुई और व्यवस्थाओं की समीक्षा हुई तो सरकार ने अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के आदेश दिए। प्लांट लगे, लेकिन बीते पांच महीने में इन्हें एक बार भी चलाया नहीं गया।

दो दिन पहले जब मुख्यमंत्री ने सभी जिला प्रशासन को इन प्लांट की जांच के निर्देश दिए, तब बुधवार को पहली बार इनके ड्रायरन हुए। भोपाल में 9 सरकारी अस्पतालों में लगे 10 ऑक्सीजन प्लांट चलाए तो इनमें से 3 प्लांट ड्रायरन में ही फेल हो गए।

किसी में मरीजों के बेड तक सप्लाई लायक प्रेशर ही नहीं बन रहा था, तो कोई सिर्फ 30% ही शुद्ध ऑक्सीजन बना पा रहा था। जो इस्तेमाल के लायक भी नहीं। वहीं किसी प्लांट के ऑक्सीजन प्रेशर जांचने वाले सेंसर ही खराब थे। बता दें कि हवा से बनने वाली ऑक्सीजन की शुद्धता कम से कम 93% होनी चाहिए। पढ़ें यह लाइव रिपोर्ट...

कमला नेहरू गैस राहत अस्पताल- ऑक्सीजन की शुद्धता जांचने वाला सेंसर ही बंद पड़ा था

कमला नेहरू में 500 लीटर प्रति मिनट क्षमता का प्लांट लगा है। इससे 45 से 50 मरीजों को ऑक्सीजन दी जा सकती है, लेकिन सुबह प्लांट शुरू करते ही ऑक्सीजन की शुद्धता पता नहीं चली तो इंजीनियर को बुलाया गया। जांच में पता चला कि जिस सेंसर से यह पता चलता है, वो खराब है। अस्पताल ने शाम तक इसे सुधारने का दावा भी किया।

जेपी अस्पताल- प्लांट शुरू होते ही सप्लाई ठप, शुद्धता मिली सिर्फ 30%

यहां एक-एक हजार ली. प्रति मिनट क्षमता के 2 प्लांट लगाए हैं। टीम ने दोनों का ट्रायल लिया तो प्लांट नं. 1 ऑक्सीजन सप्लाई ही नहीं कर सका। इसमें हवा से बनी ऑक्सीजन सिर्फ 30% शुद्ध थी, जो काम की नहीं थी। बाद में कंपनी से बायोमेडिकल इंजीनियर्स को बुलाकर रिपेयर कराया गया। दो घंटे बाद प्लांट में 93% शुद्ध ऑक्सीजन बनी। जबकि प्लांट नं. 2 अभी भी 97% शुद्ध सप्लाई दे रहा है, जिसे दूसरे वार्डों में सप्लाई किया गया।

हमीदिया- वार्ड तक पहुंचाने को 7 चाहिए पर प्लांट का प्रेशर सिर्फ 3 पॉइंट दिख रहा

यहां डी ब्लॉक के पास 500 एमएलपी का प्लांट लगा है, जिसमें ड्रायरन के दौरान सिर्फ 3 पॉइंटर का प्रेशर आ रहा था। जबकि बिल्डिंग के ऊपरी फ्लोर पर बने वार्ड तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए 7 पॉइंटर का प्रेशर चाहिए। ऑक्सीजन की प्योरिटी भी 67.3% ही है, जो मरीज के किसी काम की नहीं है। प्रबंधन के मुताबिक 3 महीने पहले टेस्टिंग की थी, तब प्लांटो को चालू करके देखा था, लेकिन अभी की स्थिति में ये उपयोग के लायक नहीं हैं।

कोलार सीएससी- प्लांट को शुरू करते ही दो जगह लीक होने लगा पाइप

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 150 लीटर प्रति मिनट क्षमता का प्लांट लगा है। मंगलवार रात मॉकड्रिल हुई तो उसकी सप्लाई लाइन में दो लीकेज मिले। जिसे रात में इंजीनियर को बुलाकर ठीक कराया गया। ड्रायरन में प्लांट से 95% शुद्ध ऑक्सीजन मिली।

बैरागढ़ सिविल अस्पताल- प्लांट चलाने टेक्नीशियन नहीं, फार्मासिस्ट को जिम्मा

यहां 150 ली. प्रति मिनट क्षमता का प्लांट अभी 94.2% शुद्ध ऑक्सीजन दे रहा है। यहीं से 20 बेड के वार्ड में सीधी सप्लाई होती है। लेकिन यहां प्लांट ऑपरेशन के लिए कोई भी टेक्नीशियन नहीं है। एक फार्मासिस्ट प्लांट ऑपरेट कर रहा है।

एम्स में सबसे शुद्ध ऑक्सीजन

यहां थ्री लेयर सिस्टम है। पहला- लिक्विड गैस प्लांट, जिसका 10 हजार एलपीएम क्षमता का टैंक है। इसी से सीधी सप्लाई जुड़ी है। एम्स में 800 बेड हैं, 300 आईसीयू के हैं, ये सभी इस टैंक से जुड़े हैं। इसका प्रेशर 10 बीएआर है और इसे कंट्रोल रूम से 4.5 बीएआर करके भेजा जाता है।

प्लांट से 15 से 16 दिन तक 24 घंटे सप्लाई हो सकती है। ऑक्सीजन की शुद्धता 100 फीसदी है। दूसरा- 350 सिलेंडर प्लांट में हैं। इनसे सात दिन तक 24 घंटे सप्लाई की जा सकती है। तीसरा- ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट, जो एक महीने पहले शुरू हुआ है। रोज 8 घंटे इसकी टेस्टिंग हो रही है।

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