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  • He Was Called The Father Of The Medical World, Himself Took The Lead In The Bhopal Gas Tragedy; An Example Of Hardwork And Dedication

भोपाल के डॉ. एनपी मिश्रा को मरणोपरांत पद्मश्री:चिकित्सा जगत के पितामह कहे जाते थे, भोपाल गैस त्रासदी में खुद संभाला था मोर्चा; हार्डवर्क और डिडेकेशन की थे मिसाल

भोपाल4 महीने पहले
डॉ. एनपी मिश्रा। - Dainik Bhaskar
डॉ. एनपी मिश्रा।

मध्यप्रदेश में चिकित्सा जगत में पितामह से पहचाने जाने वाले डॉ. एनपी मिश्रा (मरणोपरांत) पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित होंगे। डॉ. मिश्रा का निधन 5 सितंबर-2021 को हुआ था। भोपाल गैस त्रासदी में डॉ. मिश्रा ने हमीदिया अस्पताल में मरीजों के लिए इलाज के लिए खुद मोर्चा संभाल लिया था। वे हार्डवर्क और डेडिकेशन की मिसाल थे। शहर के ख्यातनाम डॉक्टरों ने उनसे यह कला सीखी थी।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया गया। पद्मश्री अवार्ड की लिस्ट में डॉ. मिश्रा का नाम भी शामिल हैं। उन्हें चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए यह सम्मान दिया गया है। गैस कांड वाली रात खुद माइग्रेन के दर्द से जूझते रहे, लेकिन उफ्फ तक नहीं की

डॉ. मिश्रा से जुड़े करीबी लोगों ने बताया कि भोपाल गैस कांड की रात उन्होंने हॉस्टल के सभी लड़कों को अस्पताल में बुलवाकर ड्यूटी पर लगा दिया। उनके कमरे में जितनी दवाएं थी, सब बांट दीं। इस दौरान सेना के दो ट्रकों में करीब 50 सैनिकों को बेहोशी की हालत में लाया गया। वे उनके इलाज के लिए सक्रिय हो गए। हर मरीज को अस्पताल में भर्ती करने का फरमान सुना दिया। करीब 3 घंटे बाद तो लाशें मिलने की सूचना आने लगी। इस दौरान वे खुद माइग्रेन के दर्द से जूझ रहे थे, लेकिन उफ्फ तक नहीं की।

निधन से एक दिन पहले भी देखते रहे मरीजों को

डॉ. मिश्रा निधन से एक दिन पहले तक मरीजों का इलाज करते रहे थे।

खुद को अपडेट रखते थे

डॉ. मिश्रा का जब निधन हुआ, तब उनकी उम्र 90 साल थी। बढ़ती उम्र के साथ वे नए-नए अनुसंधान के चलते खुद को अपडेट रखते थे। डॉक्टरों की हर कॉन्फ्रेंस में उन्हें लेक्चर के लिए बुलाया जाता, तो वे मना नहीं करते। वे चलते-फिरते यूनिवर्सिटी थे। उम्र के आखिरी पड़ाव में भी सक्रिय थे।