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भास्कर इंटरव्यू:मैं कॉमेडी में नहीं, बल्कि ड्रामा में माहिर हूं, गलत शिक्षा देने वाली फिल्में रोकनी चाहिए

भोपाल6 दिन पहलेलेखक: राजेश गाबा
अपनी फिल्म 'फौजी कॉलिंग' के प्रमोशन के लिए एक्टर शरमन जोशी भोपाल आए थे।
  • एक्टर शरमन जोशी अपकमिंग फिल्म के प्रमोशन के लिए आए भोपाल
  • बोले- कॉमेडी में टाइमिंग बहुत मायने रखता है, एक सेकंड चूके, तो सब बेकार

फिल्म एक्टर शरमन जोशी अपनी अपकमिंग फिल्म 'फौजी कॉलिंग' के प्रमोशन के लिए भोपाल पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी 'फौजी कॉलिंग' फिल्म का प्रमोशन किया। इस दौरान शरमन जोशी ने दैनिक भास्कर से अपनी फिल्म, करियर और निजी जिंदगी पर खुलकर बातचीत की। शरमन जोशी ने कहा, एक फौजी के जीवन को इतना करीब से देखकर उनके जज्बात, परिवार से उनका रिश्ता और प्रियजनों का इंतजार सब महसूस हुआ है। उनके जीवन और उनका कठिनाइयों भरा सफर को सलाम करती है, हमारी ये फिल्म।

एक्टर शरमन जोशी ने बताया, हर फौजी अपने देश की रक्षा करना जॉब नहीं समझता, बल्कि मजहब समझता है। ऐसी खूबसूरत भावना को ही पिरोते हुए फिल्म बनाई गई है। देश में गरमाए ओटीटी पर सेंसरशिप के मुद्दे पर शरमन कहते हैं कि मुझे नहीं लगता कि ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप की कैंची चलाने की जरूरत है। ये जरूरी है कि सभी डायरेक्टर्स समझें कि एक्सपोजर और सेन्शूएलिटी के नाम पर न्यूडिटी दिखाना गलत है। जो बच्चों को गलत तरह की शिक्षा दे, वो फिल्में रोकनी चाहिए, जिसके लिए खुद डायरेक्टर्स को इस सोच को सम्मान देना चाहिए।

अपने फिल्मी करियर में 'एक्सक्यूज मी', 'रंग दे बसंती', 'गोलमाल सीरीज' और '3 इडियट्स' जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम कर शरमन ने शानदार कॉमिक टाइमिंग से लोगों को खूब हंसाया है।शरमन का कहना है, एक कलाकार के तौर पर वह कॉमेडी में नहीं, बल्कि ड्रामा में माहिर हैं। यह हैरान कर देने वाला है। शरमन ने कहा, 'मुझे लगता है कि ड्रामा मुझमें स्वाभाविक रूप से है। मैं इसे अधिक सहजता के साथ कर लेता हूं। कॉलेज के नाटकों से जब मैंने एक्टिंग की शुरुआत की थी, तो मैं इसमें काफी सहज था। मुझे इसे अधिक समझना या सीखना नहीं पड़ा। कॉमेडी की जगह यह मुझे अधिक सही ढंग से करने आया।'

शरमन ने कहा कि मैं कॉमेडी में भी अच्छा था, लेकिन मुझे इसकी बारीकियां सीखनी पड़ीं। थिएटर के अपने अनुभव के साथ मुझे इन बारीकियों पर काम करने का मौका भी मिला। जब मैं कॉमेडी में बारीकियों की बात करता हूं, तो मैं इसकी टाइमिंग पर बात कर रहा होता हूं। आमतौर पर, अगर आप एक सेकंड से चूक जाते हैं, तो कॉमेडी एक जैसी नहीं रहती। मैं इस बात को सीख सका, इसके लिए थिएटर का शुक्रिया।

सकारात्मक सोचें
शरमन ने कहा कि कोरोनाकाल में ज़िंदगी थम सी गई थी। डर में जिंदगी गुजरी। मैंने मेरी पत्नी और मेरे तीन बच्चों ने भी इसे भी एंजॉय किया। इसे भी ईश्वर की मर्जी माना। मेरा मानना है कि हमें हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिए। शुरुआत में मेरी कॉमिक टाइमिंग खराब थी। लोगों ने मेरी बड़ी आलोचना की, लेकिन हमारे निर्देशक शफी ईनामदार ने हौसला दिया। प्ले के करीब 50 शो होने के बाद जाकर मेरे अभिनय में सुधार आया।

फरारी की सवारी' के लिए 40 ऑडिशन देने पड़े थे
शरमन ने बताया कि 'फरारी की सवारी' के निर्माता विधु विनोद चोपड़ा थे, जिनके साथ मैंने 'थ्री इडियट्स' की थी, लेकिन फिर भी 'फरारी की सवारी' के लिए मुझे कई पापड़ बेलने पड़े थे। फिल्म में लीड रोल को हासिल करने के लिए मैंने 40 ऑडिशन दिए थे।

शरमन ने कहा था 'भई देखिए मैं तो लम्बी रेस का घोड़ा हूं। मुझे जल्दी नहीं है। मैं आपको इस बात के लिए पूरी तरह से आश्वस्त कर सकता हूं कि मैं जो भी फिल्म करूंगा, वो बढ़िया फिल्म होगी। आपके समय और आपके पैसे के लायक होगी। जब आप सिर्फ अच्छा काम करना चाहते हैं, तो उसमें आपको वक्त लगता है। मैं वक्त देने को तैयार हूं।

अगर अपनी जिंदगी में मैंने कम से कम 10 अच्छी फिल्में भी कर ली, तो मुझे अपने आप पर बड़ा गर्व होगा। वैसे, दस तो कम से कम है, मैं तो कई अच्छी फिल्में करना चाहता हूं। मेरा तो मानना है कि मैं अगले 30 सालों के लिए इंडस्ट्री में रहने वाला हूं। यकीन मानिए, मेरी कोशिश होगी कुछ बेहतरीन सिनेमा और मनोरंजक फिल्में करने की।

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