नियमों में बदलाव:चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम-2018; मध्यप्रदेश में जूनियर डॉक्टर्स ने अब हड़ताल की तो एडमिशन निरस्त होंगे

भोपाल2 महीने पहले
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इनसर्विस कैटेगरी के उम्मीदवारों को अब 5 साल की नौकरी सरकारी अस्पताल में करनी होगी, 50 लाख रु. का बॉन्ड भरना होगा। - Dainik Bhaskar
इनसर्विस कैटेगरी के उम्मीदवारों को अब 5 साल की नौकरी सरकारी अस्पताल में करनी होगी, 50 लाख रु. का बॉन्ड भरना होगा।

हड़ताल करने पर मेडिकल स्टूडेंट (इंटर्न और जूनियर डॉक्टर) का एडमिशन कॉलेज डीन की सिफारिश पर संचालक चिकित्सा शिक्षा निरस्त कर सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियमों में बदलाव किया है। यूजी और पीजी मेडिकल कोर्सेस के संशोधित प्रवेश नियम इसी साल से लागू हो रहे हैं।

यह बदलाव सरकारी मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टरों की बार-बार होने वाली हड़ताल को रोकने के लिए किया है। एडमिशन के समय यूजी मेडिकल स्टूडेंट और पीजी कोर्स में दाखिला लेने वाले जूनियर डॉक्टर को एक फार्म भरना होगा, जिसमें पढ़ाई के दौरान हड़ताल में शामिल नहीं होने की लिखित सहमति देना होगी।

मेडिकल कॉलेजों के डेमोंस्ट्रेटर और ट्यूटर को भी मिलेगा इनसर्विस कोटे की सीट पर एडमिशन

1. नए नियमों के मुताबिक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इनसर्विस कोटे के तहत स्टेट कोटे की सीटों में 30 प्रतिशत सीटें रिजर्व रहेंगी। इस कैटेगरी में अब स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में कार्यरत सभी प्रकार के नीट क्वालिफाई डॉक्टर्स के अलावा मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डेमोंस्ट्रेटर, ट्यूटर भी अब पीजी कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।

2. इनसर्विस कोटे की सीट पर दाखिला लेने वाले मेडिकल ऑफिसर, डिमोंस्ट्रेटर, ट्यूटर को रूरल बांड के तहत सरकारी अस्पताल में 5 साल नौकरी करना जरूरी होगा। साथ ही 50 लाख रु. का रुरल बांड भरना होगा। बांड के तहत डॉक्टर को गांव के अस्पताल में और ट्यूटर, डिमोंस्ट्रेटर को सरकारी मेडिकल कॉलेज में 5 साल की नौकरी अनिवार्य रूप से करना होगी।

3. पिछले साल तक कोटे की सीट पर दाखिला लेने वाले मेडिकल ऑफिसर को 5 साल की नौकरी ग्रामीण क्षेत्र के अस्पताल में करना होगी। इसे तोड़ने पर 30 लाख रुपए चुकाने का बांड भरना होता था। जबकि डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लेने पर उम्मीदवार को 3 साल की नौकरी करने और इसे ताेड़ने पर 20 लाख रूपए चुकानें का बांड भरना होता था।

बड़ा सवाल- हड़ताल को रोकने के लिए जो एस्मा कानून लाए, वो जूनियर डॉक्टरों पर लागू नहीं होता

चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अफसरों के मुताबिक जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को रोकने के लिए राज्य सरकार तीन-तीन महीने के अंतर से अत्यावश्यक सेवा कानून (एस्मा) लागू करती है। लेकिन, जूनियर डॉक्टरों पर एस्मा के तहत कार्रवाई नहीं हो पाती।

जूनियर डॉक्टर, खुद को मेडिकल स्टूडेंट बताते हुए एस्मा से बाहर मानते हैं। जबकि सरकार उन्हें दिए जाने वाले स्टायपेंड को मानदेय बताते हुए एस्मा के तहत कार्रवाई की केवल चेतावनी देती है। एस्मा लागू होने पर जूनियर डॉक्टरों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन पर आ जाती है।

इधर, डीएमई डॉ. एससी तिवारी ने बताया कि एस्मा जूनियर डॉक्टर और एमबीबीएस और यूजी मेडिकल कोर्स के इंटर्न पर भी लागू होता है, लेकिन उनपर कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा सरकारी निर्देशों के कारण होता है। सरकार को पता होता है कि जूनियर पर कार्रवाई की तो उनका कॅरियर खत्म हो जाएगा और जूनियर डॉक्टर मिलेंगे नहीं। इसलिए सरकार कार्रवाई नहीं करती।