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राहत की खबर:मप्र के अग्रिम निर्णय प्राधिकरण का अहम फैसला; नाेटिस पीरियड की राशि पर लग रहा 18% टैक्स हटाया

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: गुरुदत्त तिवारी
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कर्मचारियों के लिए कैंटीन, मोबाइल और माता-पिता का बीमा करवाना होगा सस्ता। - Dainik Bhaskar
कर्मचारियों के लिए कैंटीन, मोबाइल और माता-पिता का बीमा करवाना होगा सस्ता।

निजी और सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए अब न सिर्फ कैंटीन सेवाएं सस्ती होंगी, बल्कि कामकाजी माता-पिता के लिए बीमा कवर और नाेटिस पीरियड की रियायत के लिए जमा की जाने वाली राशि भी कम लगेगी। दरअसल, बीना रिफायनरी के मामले में दिए गए एक अहम फैसले में मप्र जीएसटी विभाग के राज्य स्तरीय अग्रिम निर्णय प्राधिकरण ने नियोक्ता और कर्मचारियों पर लग रहे कई अनावश्यक टैक्स को हटा लिया है।

यह फैसला मप्र के वाणिज्यिक कर आयुक्त राघवेंद्र सिंह और केंद्रीय जीएसटी विभाग के मुख्य आयुक्त नवनीत गोयल की पैनल ने दिया। राघवेंद्र सिंह अब तकनीकी शिक्षा विभाग में बतौर प्रमुख सचिव सेवाएं दे रहे हैं। बीना रिफायनरी की ओर से यह मामला सीए एस. कृष्णन ने पहले ऑथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग के समक्ष दायर किया था।

अपील खारिज होने पर उन्होंने अपेलेंट प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया। आदेश पहले हो गया था, लेकिन विभाग ने इसकी कॉपी बुधवार को दी है। भारत ओमान रिफाइनरीज के मैनेजर (वित्त) वैभव जैन के मुताबिक यह निर्णय इसलिए अहम है क्योंकि कर्नाटक समेत कई राज्यों के प्राधिकरण इसके खिलाफ निर्णय दे चुके हैं।

कैंटीन का पैसा भी टैक्स मुक्त होगा

1. नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को 2 से 3 माह का नोटिस देना होता है। अगर काम न करना हो तो नोटिस अवधि का वेतन कराना पड़ता है। इस वेतन राशि पर 18% जीएसटी लग रहा था। अब इस पर कोई जीएसटी नहीं लगेगा।

ऐसे समझिए- एक कर्मचारी का वेतन 50 हजार हो तो उसे नोटिस अवधि के लिए 1.50 लाख रुपए जमा कराने होंगे। इस पर 27 हजार टैक्स लिया जा रहा था, जो उसके 16 दिन के वेतन के बराबर होता है। अब यह हटा लिया गया।

2. कई कंपनियां कैंटीन सेवा देती हैं। इसका पैसा कर्मचारियों के वेतन से कटता है। काटी गई इस राशि पर जीएसटी विभाग 5% टैक्स लगा रहा था। अब यह टैक्स नहीं लगेगा।
ऐसे समझिए- मान लीजिए कर्मचारी का कैंटीन कंट्रीब्यूशन 1000 रुपए है, तो उसे 50 रुपए जीएसटी के अतिरिक्त देने पड़ रहे थे।

3. कर्मचारियों के अभिभावक जो खुद कमाते हैं, को बीमा सुविधा देने के लिए कर्मचारियों के वेतन से जो राशि कंपनी काटती है, उस पर 18% जीएसटी लगता था। अब यह टैक्स हटा लिया गया है।
ऐसे समझिए- 5 लाख के मेडिक्लेम पर कंपनी 30 हजार सालाना प्रीमियम लेती है। इस पर 5,400 रु. जीएसटी देना होता था।