• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Bhopal
  • In 22 Months, 1.41 Lakhs Called 108, Out Of Which 54 Thousand Such People Called An Ambulance For Stomachache, Fever, Vomiting And Diarrhea.

एंबुलेंस इमरजेंसी के लिए है:22 महीने में 1.41 लाख ने 108 पर किया कॉल, इनमें 54 हजार ऐसे जिन्होंने पेटदर्द, बुखार, उल्टी-दस्त के लिए बुला ली एंबुलेंस

भोपालएक महीने पहलेलेखक: भीम सिंह मीणा
  • कॉपी लिंक
एंबुलेंस इमरजेंसी के लिए है लेकिन कई लोग छोटी-मोटी बीमारी होने पर 108 पर कर देते हैं कॉल, ऐसे में कई बार गंभीर मरीजों को नहीं मिल पाती सुविधा। - Dainik Bhaskar
एंबुलेंस इमरजेंसी के लिए है लेकिन कई लोग छोटी-मोटी बीमारी होने पर 108 पर कर देते हैं कॉल, ऐसे में कई बार गंभीर मरीजों को नहीं मिल पाती सुविधा।

पेटदर्द, उल्टी-दस्त और ऐसी ही अन्य छोटी-मोटी तकलीफ होने पर भी लोग एंबुलेंस के लिए कॉल कर देते हैं। जबकि इसका उपयोग इमरजेंसी में होता है। कुछ लोगों की इसी हरकत के चलते कई बार गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती है। कोरोनाकाल में भी ऐसे कई लोग थे जिन्होंने छोटे-मोटे बहाने बनाकर एंबुलेंस बुलवाई। भोपाल में 22 महीने में करीब 1.41 लाख लोगों ने एंबुलेंस का इस्तेमाल किया है।

इसमें सबसे बड़ी संख्या 55 हजार उनकी है, जिन्हें कोरोना के लक्षण महसूस हुए या कोरोना हुआ। लेकिन 86 हजार से ज्यादा कॉल अन्य बीमारियों से जुड़े हैं। इनमें भी करीब 54 हजार से ज्यादा कॉल उन लोगों के जिन्होंने हल्का पेट दर्द, उल्टी -दस्त, सिर दर्द और बुखार के लिए भी एंबुलेंस को कॉल कर दिया। यह रिपोर्ट एंबुलेंस चलाने वाले ईएमटी एसोसिएशन ने बनाई है।

31 हजार से अधिक फोन हल्के बुखार के लिए

एसोसिएशन के राम परमार ने बताया कि भोपाल में 22 महीने में प्रसूताओं को अस्पताल ले जाने के लिए करीब 32 हजार कॉल किए। हल्के बुखार के पेशेंट को ले जाने 31 हजार कॉल आए। ऐसे ही कार्डियक अरेस्ट के 106, सुसाइड अटेम्ट के 155 और इनके अलावा बेहोशी, डिहाइड्रेशन, फ्रेक्चर, बर्न असाल्ट, बैक पेन, सिर दर्द सहित अन्य बीमारियों के 12000 मामले शामिल हैं। पूरे महीने में 700 से 1000 लोग शराब पीकर कॉल कर देते हैं।

30% ही कॉल सही होते हैं

पूरे माह में हमारे पास जो कॉल आते हैं, उनमें से 25 से 30 फीसदी ही सही होते हैं। परेशानी यह है कि इमरजेंसी मेडिकल सर्विस में सभी छोटी बीमारियां शामिल हैं। ऐसे में हम किसी को मना नहीं कर सकते। लेकिन इसका नुकसान कई बार दूसरे मरीज को उठाना पड़ता है।-डॉ. महेंद्र जैन, सलाहकार, आईआरटीएस

हर दिन 1000 कॉल आते हैं, इनमें से आधे फेक

एंबुलेंस-108 के लिए बनाए गए कॉल सेंटर में रोज पूरे प्रदेश से 35 हजार कॉल आते हैं। इनमें से आधे फेक होते हैं। इन फेक कॉल के चक्कर में पूरे महीने के भीतर एक एंबुलेंस 40 से 50 किमी अनावश्यक चल जाती है। जो सही कॉल होते हैं, उनमें भी 40 फीसदी ऐसे कि जिन्हें छोटी-मोटी परेशानी होती है। मौके पर पहुंचने के बाद ईएमटी चेक करता है और मरीज के कहने पर उन्हें अस्पताल छोड़ देता है। ऐसे में कई बार इमरजेंसी में लोगों को देरी से सुविधा मिल पाती है।