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डेथ पॉइंट बना मिडघाट रेलवे ट्रैक:6 साल में 6 बाघ, 7 तेंदुए समेत 18 वन्यप्राणी आए ट्रेन की चपेट में

भोपालएक दिन पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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6 बाघ, 7 तेंदुए, 4 भालू और 1 मगरमच्छ इनकी हुई मौत। - Dainik Bhaskar
6 बाघ, 7 तेंदुए, 4 भालू और 1 मगरमच्छ इनकी हुई मौत।
  • पानी और शिकार की तलाश में जान गंवा रहे वन्यप्राणी, वजह... तीसरी रेलवे लाइन के काम में देरी

बुदनी के मिडघाट सेक्शन में बाघ शावक की ट्रेन से कटकर हुई मौत के मामले में वन विभाग बेबस नजर आ रहा है। इसकी वजह- रातापानी सेंचुरी में चल रहे तीसरी रेलवे लाइन का काम है। काम पूरा होने के बाद वन्यप्राणियों की सुरक्षा के इंतजाम हो सकेंगा। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बुदनी से मिडघाट तक का क्षेत्र वन्यप्राणियों के लिए डेंजर डेथ पॉइंट बन रहा है।

इस जगह पर 2015 से 2021 तक 18 वन्यप्राणियों की मौत हो चुकी है। इनमें बाघ, तेंदुआ, भालू और मगरमच्छ शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि तीसरी रेल लाइन और अप-डाउन ट्रैक पर वन्यप्राणियों के आने-जाने के लिए अंडर ब्रिज, दो ओवर ब्रिज और जालियां लगाने का काम पूरा होने में तकरीबन 3 साल लगेंगे। हालांकि मामले में वन विभाग में संबंधित क्षेत्र में 3 शिफ्ट में पेट्रोलिंग करने का निर्णय लिया है, ताकि वन्य प्राणियों के साथ होने वाले हादसों को रोका जा सके।

बरखेड़ा से बुदनी के बीच अप-डाउन के दो ट्रैक हैं। मिडघाट सेक्शन बुदनी रेंज में है। बुदनी रेंज से लगी रातापानी सेंचुरी है। रातापानी सेंचुरी में 56 बाघ और 300 तेंदुए हैं। रातापानी सेंचुरी के अधीक्षक पीके त्रिपाठी ने बताया कि बरखेड़ा- बुदनी के जंगल में शिकार और पानी की तलाश में बाघ मिडघाट सेक्शन में जाते हैं। सेक्शन के आगे झील है।

इसकी वजह से इस ट्रैक पर वन्यप्राणियों का आना-जाना रहता है और ये ट्रेन हादसे का शिकार होते हैं। उनका कहना है कि पूरे जंगल के रेलवे ट्रैक पर पेट्रोलिंग के लिए रेलवे के अधिकारियों से बातचीत चल रही है। प्रारंभिक बातचीत में यहां काम कर रही कंपनी के पास दिन की शिफ्ट में पेट्रोलिंग करने के लिए कर्मचारी है, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने रात को कर्मचारी देने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि उनके पास इतने कर्मचारी नहीं हैं।

दावा- यदि रेलवे शॉर्ट टर्म प्लान पूरा कर लेता तो बच सकती थी जान

अधिकारियों ने बताया कि वन विभाग ने रेलवे को वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म एक्शन प्लान बनाकर दिया था। इसमें शॉर्ट टर्म एक्शन प्लान में ट्रेनें धीरे चलाने, हाॅर्न बजाने, पेट्रोलिंग करने और जाली लगाना शामिल था। वहीं लॉन्ग टर्म में वन्यप्राणियों के लिए अंडरपास, ओवर ब्रिज बनाना शामिल है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रेलवे ने शॉर्ट टर्म एक्शन प्लान ही पूरा नहीं किया। यदि यह पूरा हो जाता तो वन्यप्राणियों की जान बच सकती थी।

अब इस क्षेत्र में तीन शिफ्टों में बढ़ाई जाएगी पेट्रोलिंग
^वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए रेलवे के अधिकारियों से शॉर्ट टर्म एक्शन प्लान को लागू करने के लिए बातचीत चल रही है। इस क्षेत्र में तीन शिफ्ट में पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी, ताकि वन्यप्राणियों पर नजर रखी जा सके। लॉन्ग टर्म एक्शन प्लान में जाली लगाने, 2 ओवर ब्रिज और अंडर पास बनाने काम चल रहा है।
विजय कुमार, डीएफओ औबेदुल्लागंज वन डिवीजन

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