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इस रोशनी से जीवन में उजाला:सालभर में 45 लोगों की आंखें फिर रोशन, सबसे ज्यादा 40 काॅर्निया ट्रांसप्लांट बैरागढ़ के सेवा सदन में

भोपालएक वर्ष पहले
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अब फिर से पढ़ा पाएंगी बच्चों को शोभा शर्मा। - Dainik Bhaskar
अब फिर से पढ़ा पाएंगी बच्चों को शोभा शर्मा।
  • कोरोना के कारण पिछले साल बंद थे नेत्रदान, काॅर्निया ट्रांसप्लांट, लेकिन इस साल संक्रमण कम हुआ तो दोबारा शुरू हुई सुविधाएं

दीपावली से ठीक पहले शहर के अस्पतालों में किए गए कार्निया ट्रांसप्लांट से लोगों के अंधेरे जीवन में दोबारा से रोशनी आई है। हालांकि, हमीदिया अस्पताल और बैरागढ़ के सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय में सालभर ही कॉर्निया ट्रांसप्लांट चलते रहते हैं। इस साल जहां सेवा सदन में 40 से भी ज्यादा कॉर्निया ट्रांसप्लांट हुए हैं, वहीं हमीदिया अस्पताल में भी 3 मरीजों को दान में मिलने वाले कार्निया लगाए गए हैं। ऐसे में शहर में सालभर में 45 से ज्यादा लोगों के जीवन में रोशनी की गई है।

अब फिर से पढ़ा पाएंगी बच्चों को

देवनगर कॉलोनी सीहोर निवासी शोभा शर्मा (53) सरकारी स्कूल में टीचर हैं, लेकिन करीब दो साल पहले उनकी आंखों में परेशानी शुरू हुई थी। धीरे-धीरे दिखना भी कम हो गया था। तब उनको ना सिर्फ अपने काम करने में परेशानी होती थी, बल्कि स्कूल के बच्चों को पढ़ाना भी आसान नहीं था। तब पति राजेंद्र शर्मा उन्हें बैरागढ़ स्थित सेवा सदन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां डॉक्टरों ने जांच की तो कार्निया डेमेज होना बताया गया। तमाम तैयारियों के बाद 27 अक्टूबर को उनका कार्निया ट्रांसप्लांट किया गया। अब शोभा की रोशनी वापस आ गई है।

दिवाली से ठीक पहले मिली रोशनी

करोंद निवासी हयात बी (55) गृहिणी हैं। वे वर्षों से पूरे घर की जिम्मेदारी निभा रही थीं, लेकिन दो साल पहले उन्हें एक आंख से देखने में परेशानी महसूस हुई। कुछ समय बाद उन्हें आंख से दिखना ही बंद हो गया। ऐसे में वह बुरी तरह से परेशान हो गई थीं। पिछले दिनों बेटा आमिर खान उन्हें बैरागढ़ स्थित सेवा सदन लेकर पहुंचा था। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद कार्निया ट्रांसप्लांट की सलाह दी। हफ्तेभर पहले उनका कार्निया ट्रांसप्लांट हुआ तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

पिछले साल के मुकाबले बदले हालात

काॅर्निया ट्रांसप्लांट की ये रफ्तार बीते सालों के मुकाबले तो कम ही है। पिछले दो साल से कोराेना संक्रमण के कारण नेत्रदान की रफ्तार कम हुई है। यही वजह रही कि कार्निया ट्रांसप्लांट की रफ्तार भी बेहद कम हो गई है। लेकिन, राहत की बात यह भी है कि 2020 के मुकाबले इस साल फिर से हालात बदले हैं। कोरोना का संक्रमण कम होने के साथ ही अब ना सिर्फ नेत्रदान बढ़ा है, बल्कि कार्निया के ट्रांसप्लांट की संख्या में भी इजाफा हुआ है।

मरीजों को ट्रांसप्लांट किए गए कॉर्निया बाहर से लाए गए थे

कोरोना के संक्रमण के चलते नेत्रदान नहीं हुए हैं। हालांकि इस साल में अब तक 40 से ज्यादा मरीजों को कार्निया ट्रांसप्लांट किए गए हैं। ये कॉर्निया बाहर से लाए गए थे। -डॉ. प्रेरणा उपाध्याय, वरिष्ठ नेत्ररोग विशेषज्ञ, सेवा सदन

कॉर्निया ट्रांसप्लांट की इस साल दोबारा शुरुआत हुई है

कोरोना के चलते पिछले साल नेत्रदान और कार्निया ट्रांसप्लांट बंद ही रहा था। इस साल दोबारा शुरुआत हुई है। अब तक तीन लोगों को कार्निया ट्रांसप्लांट किए गए हैं। -डॉ. कविता कुमार, एचओडी, नेत्र रोग विभाग, हमीदिया अस्पताल

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