गंभीरता नहीं:भोपाल में सवा लाख लोग नशे की गिरफ्त में, इंजेक्शन से नशा करने वाले 27 की मौत, 331 का इलाज चल रहा; इनमें 20 बच्चे

भोपाल7 महीने पहले
चिंताजनक तो ये है कि इनमें से 27 मरीजों की मौत पिछले एक साल में हो चुकी है

शहर में इंजेक्शन लगाकर नशा (ड्रग्स) करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो अभी 331 जो इस नशे के आदी हो चुके हैं उनका इलाज ऑपियाड सब्सीट्यूशन थैरेपी (आएसटी) सेंटर पर किया जा रहा है। इनमें करीब 20 बच्चे हैं। चिंताजनक तो ये है कि इनमें से 27 मरीजों की मौत पिछले एक साल में हो चुकी है।

इस सेंटर के अलावा शहर 9 और नशा मुक्ति केंद्रों का संचालन सामाजिक न्याय विभाग और महिला बाल विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है। इन सेंटर्स में 600 से ज्यादा बच्चे और बड़ों को रखकर नशा से मुक्ति दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जबकि, शहर में एक अनुमान के मुताबिक सवा लाख से भी ज्यादा ऐसे लोग हैं जो तरह-तरह के नशों के आदी हो चुके हैं।

पहले बच्चे पास आने से डरते थे, आज साथ खेलते हैं

बैरागढ़ निवासी 30 वर्षीय निक्की वाधवानी को 12 साल की उम्र में शराब की लत लगी थी। भतीजे-भतीजी उनके पास जाने से भी डरते थे। छह साल पहले कोलार के शुद्धि नशा मुक्ति केंद्र से लाए गए थे। अब वे नशा छोड़ चुके हैं। सेंटर पर नौकरी करते हैं। यहां आने वाले मरीजाें को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। अब जब घर जाते हैं तो भतीजी-भतीजे उनके साथ खेलते हैं।

331 में से 279 ही पहुंच रहे दवा खाने

ओएसटी सेंटर में मरीजों को स्टाफ अपने सामने गोली खिलाता है। अभी यह आलम है कि सेंटर पर 331 में से सिर्फ 279 मरीज ही नियमित रूप से दवाई खाने पहुंच रहे हैं। जो 52 लोग नियमित नहीं आ रहे हैं उनमें से 27 की मौत हो चुकी है। 16 मरीज विभिन्न कारणों से शहर से बाहर जा चुके हैं। जबकि, 4 मरीज जेल जाने के कारण सेंटर नहीं पहुंच रहे हैं।

ओएसटी सेंटर में बढ़ते मरीज
ओएसटी सेंटर में बढ़ते मरीज

2019 में खुला सेंटर, तब केवल 7 मरीज थे, अब बढ़कर 331 हो गए

नशे के आदी लोगों के लिए केंद्र की ओर से 2019 में हमीदिया अस्पताल में ओएसटी सेंटर की बनाया गया है। पहले साल यहां महज 7 मरीज थे। इसके बाद कोरोना का संक्रमण फैलने लगा। इस बीच अगले साल 50 और फिर 110 मरीज हुए थे। वर्तमान में यहां 331 मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

10 प्रतिशत से भी कम महिलाएं शराब, गांजे का नशा करती हैं

ओएसटी सेंटर पर सिर्फ उन्हीं मरीजों का इलाज होता है जो इंजेक्शन से नशा करते हैं। यहां सभी मरीज पुरुष ही हैं। अनुमान है शहर में इंजेक्शन का नशा करने वालों में महिलाएं शामिल नहीं हैं। शराब और गांजा समेत दूसरे तरह के नशों का सेवन करने वालों में भी महिलाओं का प्रतिशत 10 से भी कम है।

नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ी
शहर में वर्तमान में सवा लाख से ज्यादा लोग नशे के आदी हैं। इनको इलाज की आवश्यकता है। लोगों में नशा का इलाज कराने के प्रति जागरुकता बढ़ी है। यही वजह है कि नशा मुक्ति केंद्रों पर आने वालों की संख्या में इजाफ हो रहा है।
राजीव तिवारी, संचालक, शुद्धि नशामुक्ति केंद्र