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पोस्ट कोविड इफेक्ट:साल में डायबिटीज के नए मरीज 1500 की जगह 4000 हुए, कोरोना से ठीक होने वाले 60% ऐसे जिनकी नींद उड़ी

भोपाल10 दिन पहले
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जनवरी, फरवरी और मार्च में मिलाकर ओपीडी संख्या - Dainik Bhaskar
जनवरी, फरवरी और मार्च में मिलाकर ओपीडी संख्या

कोरोना से ठीक हो चुके लोग अब दूसरी बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। डायबिटीज, टीबी, नींद न आना और टिनीटस यानी कान में सीटी की आवाज गूंजने जैसी परेशानियाें के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वो युवा, जिनके परिवार में कभी किसी को डायबिटीज नहीं थी, उनका शुगर लेवल भी लगातार बढ़ा हुआ आ रहा है। परेशानी की बात तो यह है कि शुगर के नए मरीजों का सालाना आंकड़ा डेढ़ हजार से बढ़कर 4 हजार के पार पहुंच गया है।

इधर, ओपीडी दोगुनी

अस्पतालों की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। एम्स, हमीदिया और 6 बड़े निजी अस्पतालों में 2019 में जनवरी, फरवरी व मार्च में रोज औसतन 262 मरीज ओपीडी में आते थे, लेकिन इस साल जनवरी से मार्च तक रोज औसतन 450 मरीज आ रहे हैं।

30% ऐसे जिनके परिवार में किसी को शुगर नहीं थी

कोरोना से पहले तक शहर में सालभर में बमुश्किल 1500 नए ऐसे लोग सामने आते थे, जिन्हें शुगर बढ़ने की परेशानी होती थी, लेकिन पिछले दो साल में यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा पर पहुंच चुकी है। शहर के डॉक्टरों का अनुमान है कि पिछले दो साल से 4000 हजार से भी ज्यादा शुगर के नए मरीज सामने आ रहे हैं। परेशानी की बात यह भी है कि इनमें 30 प्रतिशत मरीज यानी 1000 हजार से ज्यादा ऐसे हैं, जिनके परिवार में कभी किसी को शुगर था ही नहीं। इसकी वजह कोरोना के दौरान दिए गए दवाओं के भारी-भरकम डोज और कोरोना वैक्सीन हो सकती है।

डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव, मेडिकल विशेषज्ञ, जेपी अस्पताल

कानों में गूंजती रहती है सीटी बजने की आवाज

कान में लगातार सीटी बजने की आवाज गूंजते रहना इस बीमारी को टिनीटस कहते हैं। सामान्य तौर पर यह परेशानी तेज आवाज से, उम्र के बढ़ने पर, कान में संक्रमण, सिर पर चोट, कान में मैल जमा होने, कान की हड्‌डी कठोर होने और कान में ट्यूमर होने के कारण होती है। लेकिन, पिछले कुछ महीने से लगभग हररोज कई मरीज इस समस्या के साथ आ रहे हैं। ये वही मरीज हैं जो कोरोना की चपेट में ज्यादा समय तक रहे। आशंका है कि महीनों तक दवाई के भारी डोज लेने के कारण यह स्थिति बन रही है। क्योंकि ना तो इन मरीज की उम्र ज्यादा है और ना ही इनको कोई दूसरी परेशानी है।

डॉ. निशांत श्रीवास्तव, प्रोफेसर, रेस्पिरेट्री डिपार्टमेंट

नए टीबी मरीजों में 45% ऐसे जिन्हें कोरोना हुआ था

अभी टीबी के जो नए मरीज सामने आ रहे हैं, उनमें करीब 40 से 45 प्रतिशत वो हैं जिनको कोरोना हुआ था। इनमें वाे लोग ज्यादा हैं, जिनकी हालत गंभीर हुई और उनको बहुतायत में एस्टेरॉयड दिए गए। डॉक्टरों की मानें तो कोरोना के दौरान की इम्युनिटी कमजोर हुई और वे टीबी के शिकार हो गए। इन मरीज का वजन तेजी से घट रहा है, जबकि टीबी के सामान्य मरीज में खांसी और बलगम आना यह सामान्य लक्षण होते हैं। ऐसा कोई भी व्यक्ति जो लंबे समय तक कोरोना पीड़ित रहा है और अब वजन तेजी से घट रहा है तो टीबी की जांच जरूर करानी चाहिए।

डॉ. मनोज वर्मा, जिला क्षय रोग अधिकारी

चैन की नींद नहीं सो पा रहे 60 प्रतिशत मरीज

ऐसे मरीज जिनको कोरोना हुआ और उनकी गंभीर हालत के चलते उनको आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था, ऐसे मरीज भले कोरोना से जीत गए लेकिन उनकी रातों की नींद उड़ी हुई है। आलम यह है कि ऐसे करीब 60 प्रतिशत मरीजाें को या तो रात में नींद ही नहीं आती है या फिर किसी तरह सो भी जाएं तो एक बार नींद खुलने के बाद दोबारा सो नहीं पाते हैं। ओपीडी में हररोज 100 से ज्यादा ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। ये परेशानी उन मरीजों को ज्यादा हो रही है जो मोटापे के शिकार थे। ऐसे अधिकांश लोग सुकून की नींद ही नहीं ले पा रहे हैं।

डॉ. खुशबू सक्सेना एसआर, जीएमसी