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शिफा का दाढ़ी कांड:बढ़ रही कश्मकश, पद छोड़ने को राजी नहीं ओहदेदार, समाज से तेज हो रही कार्रवाई की मांग

भोपाल6 दिन पहले
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नाराज समाज के लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। - Dainik Bhaskar
नाराज समाज के लोग कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

भोपाल में शिफा अस्पताल के कर्मचारी हाफिज अतीक की दाढ़ी काट दिए जाने का मामला अब अस्पताल प्रबंधन के लिए कश्मकश का कारण बनता जा रहा है। प्रबंधन कमेटी में शामिल कुछ पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाना इस मामले के पटाक्षेप के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन पदाधिकारियों ने पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। इधर नाराज समाज की तरफ से लगातार कार्रवाई के लिए दबाव बन रहा है। सोमवार तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। शिफा अस्पताल में हुए मामले के बाद लगातार बैठकों का दौर जारी है। समाज से उठ रहीं विरोध की आवाजों को धीमा करने के लिए अस्पताल प्रबंधन कमेटी में शामिल कुछ लोगों को हटाने पर विचार करने के लिए शनिवार को एक गुप्त बैठक बुलाई गई थी। सूत्रों का कहना है कि बैठक में अस्पताल प्रबंधन से जुड़े लोगों के अलावा शहर के कुछ रसूखदार मौजूद थे। बताया जा रहा है कि प्रबंधन कमेटी में शामिल कुछ लोगों को पद से हटाने का प्रस्ताव रखा गया था। ये लोग दाढ़ी कांड के मुख्य आरोपी मोहसिन के समर्थक और करीबी हैं। सूत्रों का कहना है कि इन लोगों ने कमेटी की सदस्यता और पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है।

कमेटी में है फूट

जानकारी के मुताबिक शिफा अस्पताल (पूर्व में हयात हॉस्पिटल) की तत्कालीन प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष जैन उद्दीन और मोहसिन के बीच में अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने को लेकर समझौता हुआ था। जिसके बाद जैन उद्दीन की कमेटी में डॉ. आसिम, फैजान आदि को शामिल किया गया था। अनुबंध के मुताबिक मोहसिन को अस्पताल में करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से रेनोवेशन, मशीनें, लैब आदि उपलब्ध करवाना थीं। लेकिन मोहसिन ने इसके बदले महज करीब 80 लाख रुपए ही खर्च किए। अनुबंध की बाकी शर्तों पर भी मोहसिन कायम नहीं रहे, जिसके चलते दोनों पक्षों में 4 महीने में ही खींचतान शुरू हो गई।

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बिना अनुमति बन गया कोविड सेंटर

सूत्रों का कहना है कि शिफा अस्पताल में बिना शासकीय अनुमति के ही कोविड सेंटर शुरू कर दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि समाज के गरीब और कमजोर तबके को सस्ता इलाज मुहैया कराने के ऐलान के साथ शुरू किए गए इस सेंटर में जमकर लूटमार की गई है। जबकि यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों से लेकर प्रशिक्षित स्टॉफ की सुविधा अब तक मौजूद नहीं है।

वक्फ बोर्ड सकते में, क्या करें कार्रवाई
मप्र वक्फ बोर्ड की जायदाद पर खड़े शिफा अस्पताल से हो रही बोर्ड की बदनामी को लेकर बोर्ड चिंतित है। लगातार इस बात पर मंथन किया जा रहा है कि लोगों के बढ़ते रोष से कैसे बचा जाए। सूत्रों का कहना है कि इस बीच इस बात पर भी विचार किया जा रहा है कि मामले का कोई संतोषजनक और सर्वमान्य हल नहीं निकला तो बोर्ड शिफा अस्पताल से अपनी किरायादारी खत्म कर देगा।

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कोविड से मिली मोहसिन को राहत
सूत्रों का कहना है कि लगातार बन रहे दबाव के बाद भी पुलिस ने अब तक मोहसिन और उसके साथियों मुदस्सिर और शहरोज की गिरफ्तारी नहीं की है। बताया जाता है कि पुलिस ने इस मामले में बहुत ही मामूली धाराओं में मामला दर्ज किया है। जबकि हाफिज अतीक को घर से उठाने और धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले भी सभी आरोपियों पर कायम किए जाने थे। इसके विपरीत आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने को कोविड हालात से जोड़ा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक फिलहाल हत्या जैसे जघन्य अपराध के अलावा अन्य छोटे मामलों में गिरफ्तारी नहीं करने के आदेश अदालत ने ही दे रखे हैं।

खतरा सोमवार का

हाफिज की दाढ़ी काट दिए जाने को लेकर शहर की सामाजिक, सियासी और मजहबी संस्थाएं लगातार नाराजगी जाहिर कर रही हैं। उन्होंने सोमवार तक आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। इसके न होने पर अस्पताल और उसके प्रबंधन के खिलाफ उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।
रिपोर्ट खान आशु

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