क्यों पिछड़े हम:इंदौर ने 122 मोबाइल यूनिट से घर-घर पहुंचाई वैक्सीन, भोपाल में सिर्फ 8 वैन

भोपालएक महीने पहले
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शहर में करीब 2 लाख को अभी नहीं लगा पहला डोज - Dainik Bhaskar
शहर में करीब 2 लाख को अभी नहीं लगा पहला डोज
  • इंदौर और भोपाल में एक ही दिन शुरू हुआ था वैक्सीनेशन

प्रदेश में 16 जनवरी से शुरू हुए टीकाकरण में इंदौर ने बाजी मार ली, लेकिन भोपाल अभी भी पहला डोज पूरा नहीं कर पाया है। इंदौर ने 28 लाख 7 हजार से ज्यादा को वैक्सीन का पहला डोज लगाकर तय टारगेट पूरा कर लिया है। इसके पीछे इंदौर की प्लानिंग और पर्याप्त संख्या में वैक्सीन का समय पर उपलब्ध होना है।

भोपाल के पिछड़ने की वजह, पुराने शहर में लोगों का वैक्सीन लगवाने के लिए नहीं आना है। वैक्सीन के बाद आने वाले बुखार समेत यहां के लोगों के मन में कई प्रकार की भ्रांतियां बनी हुई हैं। इस वजह से आज भी निगम के कई वार्ड वैक्सीनेशन में पीछे हैं। हालांकि अब कलेक्टर अविनाश लवानिया ने अगले 9 दिन प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन कराने के सख्त निर्देश दिए हैं।

85 वार्डों में वैक्सीन के लिए स्थाई कैंप लग गए हैं। शहर में मोबाइल वैन की संख्या 2 से बढ़ाकर 8 कर दी है। रोज 20 हजार टीके का लक्ष्य भी रखा है। 15 सितंबर तक 19 लाख 50 हजार को पहला डोज लगाने का दावा है। अभी कुल 24 लाख 64 हजार 265 को टीका लग चुका है। इनमें 17 लाख 61 हजार 846 को पहला डोज, जबकि 7 लाख 2 हजार 419 को दूसरा डोज लगा दिया गया है।

भोपाल में 15 सितंबर तक टारगेट पूरा करने की कोशिश

इंदौर ने ये 5 प्रयास किए इसलिए पूरा किया लक्ष्य

  1. प्रशासन, निगम व स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल बैठाया गया। जनप्रतिनिधियों की बैठक कर टीकाकरण के लिए प्रेरित करवाया गया।
  2. ग्राम पंचायत से लेकर वार्ड स्तर के कर्मचारियों की ड्यूटी टीकाकरण में लगाई गई। डोर-टू-डोर सर्वे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा करवाया गया।
  3. 122 मोबाइल यूनिट बनवाकर घर-घर वैक्सीनेशन करवाया गया।
  4. जिन्हें पहले के बाद दूसरा डोज नहीं लगा था, उनके लिए मैसेज करवाया गया और टीके के लिए बुलाया गया।
  5. ड्राइव इन रन के जरिए बाइक और चार पहिया से आने वाले लोगों को वैक्सीन लगाई गई।

5 कारण, जिससे पूरा नहीं हो पाया हमारा टारगेट

  1. शुरुआत में सरकारी अमले में तालमेल की कमी थी, टीके को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां का फैलना।
  2. जागरूकता अभियान चलाया, लेकिन लोग डर के मारे टीका लगवाने नहीं आए। जब लोग की संख्या टीका लगवाने के लिए बढ़ी तो टीके कम पड़ गए।
  3. 90 फीसदी लोगों को कोविशील्ड लगाई जाना है। इसमें तेज बुखार आया तो डर के मारे दूसरे लोग टीका लगवाने के लिए नहीं पहुंचे।
  4. नए शहर में टीकाकरण तेजी से हुआ, लेकिन पुराने शहर में अभी भी लोग टीका लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
  5. टीकाकरण के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से देर से सर्वे करवाया।

राजधानी को ...इन प्रयासों से मिल सकती है सफलता

  • मोबाइल वैन की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि गली-मोहल्लों में पहुंचकर वैक्सीनेशन हो सके।
  • पुराने शहर के लोगों को जागरूकता के लिए धर्म गुरुओं की मदद ली जाए। ये बताया जाए कि टीका लगाने से कुछ बीमारी नहीं होगी।
  • वैक्सीन के पहले डोज के लिए कोवैक्सीन का इस्तेमाल किया जाए। इससे दूसरा डोज भी समय पर लग सकेगा।
  • सभी स्कूली बच्चों को ये शपथ दिलवाई जाए कि उनके परिजनों को टीका लगवाना क्यों जरूरी है।
  • वार्ड वार टीकाकरण की स्थाई व्यवस्था की जाए।
  • सरकारी योजनाओं के लिए सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जाए।
  • गर्भवती महिलाओं को टीके लिए प्रेरित किया जाए।
  • डोर-टू-डोर सर्वे के बाद लिस्टिंग के आधार पर उनको टीकाकरण के लिए बुलाया जाए।
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