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अब मेडिसिन पर महंगाई की महामारी:जिन इंजेक्शन पर पहले 70 फीसदी तक डिस्काउंट था, अब मिल रहा सिर्फ 10%

भोपालएक महीने पहलेलेखक: भीम सिंह मीणा
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मेडिकल संचालक बोले- अब दवा कंपनियों ने मार्जिन कम कर दिया है। - Dainik Bhaskar
मेडिकल संचालक बोले- अब दवा कंपनियों ने मार्जिन कम कर दिया है।

कोरोना और ब्लैक फंगस के बढ़ते संक्रमण के बीच दवा और इंजेक्शन महंगे होते जा रहे हैं। खासतौर से इंजेक्शन की डिमांड तेजी से बड़ी है। पहले जो इंजेक्शन ग्राहकों को एमआरपी पर 60 से 70% डिस्काउंट पर मिलता था, अब वह सिर्फ 10 फीसदी तक सिमट गया है। मेडिकल संचालकों का कहना है कि दवा कंपनियों ने इंजेक्शन और दवाओं पर मार्जिन कम कर दिया है, ऐसे में ग्राहकों को दिए जाने वाले डिस्काउंट में कमी की गई है। भास्कर ने इन दिनों खासे डिमांड में रहने वाले प्रमुख इंजेक्शन की पड़ताल की तो यह हकीकत सामने आई है। इनकी एमआरपी तो पहले के बराबर ही है, लेकिन मार्जिन कम करने से बाजार में इनके भाव बढ़ गए हैं।

यानि अब इंजेक्शन पहले की अपेक्षा अधिक बिक रहे हैं। एक तरह से दवाओं के दाम नियंत्रित हैं, लेकिन आम आदमी की जेब पर भार बढ़ने लगा है। दवा कंपनी की तरफ से जो एमआरपी तय की जाती है, उसमें मेडिकल स्टोर संचालक को मिलने वाले मार्जिन में से वे छूट देते हैं। कोरोना और उसके बाद ब्लैक फंगस के चलते यह हाल हुए हैं। उदाहरण के लिए रेमडेसिविर की सबसे कम एमआरपी 900 रु. थी और अधिकतम 5400 रु.। 5400 रुपए वाला रेमडेसिविर शुरुआत में 1300 और फिर फुल रेट में भी बेचा गया।

हकीकत; 40 हजार रुपए का इंजेक्शन सरकार की निगरानी में
रेमडेसिविर के बाद जीवन रक्षक इंजेक्शन टोसिलीजूमेब भी डिमांड में है। यह शहर की चुनिंदा स्टाकिस्ट पर ही मिल रहा है। इसकी कीमत 40 हजार रुपए है। जिला प्रशासन ने इसे अपनी निगरानी में ले लिया है और पूरे दस्तावेज दिखाने के बाद ही मरीजों को दिया जाता है। इसका पूरा रिकाॅर्ड मेनटेन किया जा रहा है। इसकी उपलब्धता भी इस समय कम है।

और इधर; एमआरपी से अधिक बेचने पर कर सकते हैं शिकायत
राजधानी में मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं बेचे जाने को लेकर अभी तक कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है, क्याेंकि फिलहाल एमआरपी से अधिक में बेचने वाला मामला अब तक नहीं आया। नियमानुसार कोई भी दवा या इंजेक्शन जब एमआरपी से अधिक में बेची जाए तो इसकी शिकायत कलेक्टर या क्षेत्र के एसडीएम काे, या फिर ड्रग इंस्पेक्टर को की जा सकती है।

इंजेक्शन प्रशासन के नियंत्रण में

दवाओं के दाम पूरी तरह नियंत्रित हैं। एमआरपी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बस कुछ मार्जिन कम हो गया है। डिस्काउंट देना और न देना पूरी तरह से विक्रेता पर निर्भर करता है। महंगे इंजेक्शन सीधे प्रशासन के नियंत्रण में है। -ललित जैन, अध्यक्ष, मेडिकल स्टोर एसोसिएशन भोपाल

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