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रॉयल किड्स की निमोनिया से मौत:किसान से मिले तेंदुए के दोनों शावकों को ले जाना था इंदौर, ठंड में धार से 262Km दूर भोपाल ले आए

भोपाल5 महीने पहले

दो दिन पहले वन विभाग को सौंपे गए मासूम रॉयल किड्स नहीं रहे। भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में तेंदुए के दोनों बच्चों ने दम तोड़ दिया। इनको धार से इंदौर चिड़ियाघर ले जाने की बजाय वन विभाग करीब 262Km दूर वन विहार ले आया था। ठंड और 4 घंटे के सफर से दोनों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें निमोनिया और इंफेक्शन हो गया। वन विहार के डॉक्टरों ने उनका इलाज किया, लेकिन बचा नहीं सके।

13 दिसंबर को मादा और 14 दिसंबर को नर शावक ने दम तोड़ा। तेंदुए के दोनों शावकों का पोस्टमॉर्टम वन्यप्राणी चिकित्सक रजत कुलकर्णी और डॉ. अतुल गुप्ता ने किया। शार्ट पीएम रिपोर्ट में निमोनिया और इंफेक्शन सामने आया। इसके बाद दोनों का दाह संस्कार वन विहार में ही कर दिया गया।

समझा बिल्ली-निकला तेंदुआ.. गुर्राने लगे तो उड़े थे होश- पूरी खबर पढ़ें

मध्यप्रदेश के धार जिले के बाजरीखेड़ा गांव का एक किसान खेत में खेल रहे तेंदुए के 2 शावकों को जंगली बिल्ली के बच्चे समझकर घर ले आया था। तीन दिन तक उनकी जमकर खातिरदारी की थी। दूध पिलाया, रोज नहलाता और ठंड से बचाने गर्म कपड़े भी ओढ़ाए। जब खुलासा हुआ तो उनके होश उड़ गए थे। जिन्हें वो खेत से घर लेकर आया था वे तेंदुए के शावक निकले। इसके बाद किसान खुद शावकों को निसरपुर चौकी लेकर पहुंचा था। जहां से वन विभाग को सूचना दी गई और फिर उनको भोपाल के वन विहार में लाया गया था।

किसान ने तेंदुए के शावकों को दूध पिलाया और नहलाया भी।
किसान ने तेंदुए के शावकों को दूध पिलाया और नहलाया भी।

गंभीर हालत में लाए गए थे वन विहार

वन विहार के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. एके जैन ने बताया 11 दिसंबर को जब इन बच्चों को वन विहार भोपाल लाया गया था, तब उनकी हालत ज्यादा गंभीर थी। डॉ. कुलकर्णी व टीम ने उनका इलाज किया। पार्क मैनेजमेंट ने भी पल-पल निगरानी की, लेकिन उनकी मौत हो गई।

खेत में मिले इन शावकों में एक नर और दूसरा मादा था।
खेत में मिले इन शावकों में एक नर और दूसरा मादा था।

शायद इसलिए नहीं बच पाए बच्चे

रॉयल किड्स की जान शायद बच जाती, यदि वन विभाग इन्हें लेकर गंभीर होता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब बच्चे मिले तो उन्हें बाजरीखेड़ा के जंगल में उसी स्थान पर खुले में रखा था, जहां से किसान को मिले थे, लेकिन उनकी मां मादा तेंदुआ नहीं आईं। इसके बाद वन विभाग इंदौर चिड़ियाघर ले जाने की बजाय भोपाल वन विहार ले आया। लंबे सफर और ठंड की वजह से उनकी हालत और भी बिगड़ चुकी थी।

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