कंप्यूटर शिक्षा में हम सबसे पीछे:मप्र के 11% स्कूलों में इंटरनेट, लेकिन सिर्फ 3% में ही कंप्यूटर, वो भी दफ्तर के काम के लिए

भोपाल22 दिन पहलेलेखक: हरेकृष्ण दुबोलिया
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दिल्ली में 86% और केरल के 82% स्कूलों में कंप्यूटर लैब; हमारे पास एक भी आईसीटी लैब नहीं। - Dainik Bhaskar
दिल्ली में 86% और केरल के 82% स्कूलों में कंप्यूटर लैब; हमारे पास एक भी आईसीटी लैब नहीं।

स्कूल स्तर पर बच्चों को कंप्यूटर एजुकेशन उपलब्ध कराने में मध्यप्रदेश देश में सबसे पीछे है। प्रदेश के सिर्फ 3 फीसदी स्कूल ही ऐसे हैं, जिनमें बच्चों के लिए कंप्यूटर डिवाइस हैं। जबकि इस मामले में 91 फीसदी के साथ लक्षद्वीप, 86 फीसदी के साथ दिल्ली और 82 फीसदी के साथ केरल सबसे आगे है। वैसे मध्यप्रदेश के 11 फीसदी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा तो है, लेकिन यह विद्यार्थियों के बजाए ऑफिशियल वर्क के लिए है।

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) की वर्ष 2021 की ‘स्टेट ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट फॉर इंडिया: नो-टीचर, नो-क्लास’ में यह तथ्य सामने आए हैं। यूनेस्को ने क्वाॅलिटी एजुकेशन के मामले में मध्यप्रदेश को परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) रैंक 3 दी है। जबकि 1++ रैंक के साथ अंडमान, चंडीगढ़, केरल, पंजाब और तमिलनाडु सबसे बेहतर हैं। 5वीं रैंक के साथ मेघालय और चौथी रैंक के साथ छत्तीसगढ़, अरुणाचल और नगालैंड सबसे बदतर स्थिति में हैं।

अच्छी बात - प्रदेश के 90 फीसदी स्कूलों में लाइब्रेरी, इस मामले में हम देश में चौथे

21 हजार से ज्यादा स्कूल में एक टीचर, 22% में टीचरों के 87000 पद खाली

प्रदेश में 1 लाख 54 हजार 64 स्कूल हैं। इनमें से 21077 ऐसे हैं जिनमें एक ही टीचर है। राज्य में 22% स्कूल ऐसे हैं जिनमें शिक्षकों के 54% पद खाली हैं। 87630 पद खाली पड़े हुए हैं। इस मामले में मप्र की स्थिति यूपी और बिहार के बाद नीचे से तीसरे पायदान पर है। हालांकि हमारे 90% स्कूलों में लाइब्रेरी है। इस मामले में हमसे लक्षद्वीप (98%), दमनदीव (97%) और दिल्ली (95%) आगे है।

पीने का पानी, टॉयलेट बेहतर, लेकिन बिजली नहीं
प्रदेश के स्कूलों में सिर्फ 68 फीसदी ही ऐसे हैं जहां अच्छी क्वालिटी के क्लासरूम हैं। 55 फीसदी स्कूल तो ऐसे हैं जहां बिजली कनेक्शन ही नहीं हैं। पेयजल, टॉयलेट के मामले में स्थिति कुछ बेहतर है, लेकिन अभी भी 100 फीसदी लक्ष्य से काफी दूर है।

प्राइवेट स्कूलों में अनक्वालिफाइड टीचर समस्या
अप्रशिक्षित और अकुशल शिक्षक भी बड़ी समस्या है। प्री-प्राइमरी स्तर पर 8.06%, प्राइमरी स्तर पर 2.89% और अपर प्राइमरी स्तर पर 7.55% शिक्षक अनक्वालिफाइड हैं। जबकि 36% सरकारी स्कूल इस समस्या का शिकार हैं।