• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Bhopal
  • It Took 20 Minutes To Cut A Receipt, The Corporation's Server Did Not Work; 4 Thousand People Returned Without Paying Tax

नेशनल लोक अदालत:एक रसीद काटने में लग रहे थे 20 मिनट, नहीं चला निगम का सर्वर; बिना टैक्स जमा किए लौटे 4 हजार लोग

भोपाल8 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
कुछ वार्डों में ऑफलाइन टैक्स जमा कराया और हर व्यक्ति का नाम नोट किया गया - Dainik Bhaskar
कुछ वार्डों में ऑफलाइन टैक्स जमा कराया और हर व्यक्ति का नाम नोट किया गया
  • सोमवार को भी मिलेगा टैक्स जमा करने का मौका
  • 4 साल की बेटी को मिलने नहीं दे रही थी पत्नी, जज का आदेश

लोक अदालत में शनिवार को नगर निगम का सर्वर बैठ गया। इससे करीब 4 हजार लोग बिना टैक्स जमा करे ही लौट गए। नए वित्त वर्ष से निगम ने ई-नगरपालिका से बाहर आकर खुद के सर्वर पर कामकाज शुरू किया। लगभग 3 हफ्ते बाद ई-नगरपालिका से निगम सर्वर में डेटा ट्रांसफर हुआ, लेकिन इसे अब तक सिंक्रोनाइज नहीं किया जा सका।

सर्वर ठप होने से एक रसीद काटने में 20 मिनट का समय लग रहा था। कुछ वार्डों में ऑफलाइन टैक्स जमा कराया और हर व्यक्ति का नाम नोट किया गया। दिनभर में 3500 लोगों ने 3.28 करोड़ टैक्स जमा किया। निगमायुक्त वीएस चौधरी कोलसानी ने बताया कि सोमवार को छूट के साथ टैक्स जमा करने का मौका दिया जाएगा।

4 साल की बेटी को मिलने नहीं दे रही थी पत्नी, जज का आदेश

पिता को बेटी को देखने-मिलने का अधिकार, रोज ऑनलाइन बात कराएं

नेशनल लोक अदालत में एक अनोखा समझौता भी हुआ है। पति से अलग रह रही पत्नी बेटी से पति को नहीं मिलने दे रही थी। मामले में जज ने आदेश दिया कि पिता को बेटी को देखने और मिलने का अधिकार है। यदि महिला कहीं बाहर है तो वह रोज बेटी की पिता से ऑनलाइन बात कराए और उसे दिखाए। मामले में लोक अदालत में एक पक्ष ही पहुंचा था। महिला बेटी के साथ हैदराबाद में है।

3 साल से अलग थे, बेटी ने मनाया तो मान गए

एक मामले में दंपती ने आपसी मतभेद के चलते तलाक लेने का निर्णय किया। जज ने खुद काउंसलिंग की। इसके बाद पति-पत्नी ने साथ रहने का निर्णय लिया। दूसरे मामले में 8 साल की बेटी ने जज के सामने माता-पिता को मनाते हुए साथ रहने कहा। काउंसलिंग की गई तो 3 साल से अलग रह रहे दंपती मान गए।

4364 केस निपटे, 34 करोड़ अवॉर्ड राशि मिली

लोक अदालत में शनिवार को 4364 प्रकरणों का निराकरण हुआ। इसमें पारिवारिक के साथ ही चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना सहित अन्य मामले शामिल हैं। करीब 34.4 करोड़ की अवॉर्ड राशि मिली। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह, फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एसके जोशी आदि शामिल रहे।

खबरें और भी हैं...