शंकरशाह-रघुनाथ शाह बलिदान दिवस के कार्यक्रम में शामिल होंगे उपराष्ट्रपति:जबलपुर आएंगे जगदीप धनखड़, भोपाल में कमलनाथ देंगे श्रद्धांजलि

भोपाल2 महीने पहले

पिछले विधानसभा चुनाव में आदिवासी क्षेत्रों में मात खाने के कारण बीजेपी को सत्ता गंवानी पड़ी थी। हालांकि डेढ़ साल के भीतर हुए दल-बदल के बाद मप्र में भाजपा की फिर सरकार बन गई। कांग्रेस के लिए गेम चेंजर रहे ट्रायबल बेल्ट पर बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर है। आदिवासियों को भाजपा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम हो चुके हैं।

रविवार यानि 18 सितंबर को गोंडवाना राज्य के राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जबलपुर आएंगे। धनखड़ के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी सुबह 9.40 बजे जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की आगवानी करेंगे। उनके साथ आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे । मुख्यमंत्री दोपहर 3.35 बजे डुमना विमानतल पर उपराष्ट्रपति को विदाई देने के बाद दोपहर 3.50 बजे वायुयान से भोपाल रवाना होंगे।

कमलनाथ पीसीसी में देंगे राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह को श्रृद्धांजलि

​​​​​​प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ पीसीसी में राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह के शहीदी दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी, विधायक गण, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल,आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष ओमकार सिंह मरकाम भी मौजूद रहेंगे।

एक साल पहले अमित शाह आए थे जबलपुर

आदिवासी वोटर्स को प्रभावित करने की प्लानिंग पर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व जुटा हुआ है। एक साल पहले जबलपुर में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह गौंड राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह बलिदान दिवस के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय शंकर शाह के नाम पर करने की घोषणा की थी। इसके अलावा पेसा एक्ट पूरे प्रदेश में लागू करने का ऐलान किया था। पेसा एक्ट (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) कानून 1996 में आया था। इसे आदिवासी-बहुल क्षेत्र में स्व-शासन (ग्राम सभा) को मजबूती प्रदान करने के लिए लाया गया था।

मोदी ने किया था एमपी के वर्ल्ड क्लास रानी कमलापति रेल्वे स्टेशन का लोकार्पण

पिछले साल 15 नवंबर को बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने आए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मप्र के पहले वर्ल्ड क्लास रेल्वे स्टेशन बनाए गए रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का लोकार्पण किया था। इससे पहले इस स्टेशन को हबीबगंज रेल्वे स्टेशन के नाम से जाना जाता था। इस दौरान पीएम ने रतलाम जिले में बनने वाले एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का शिलान्यास किया। राशन आपके ग्राम योजना और हिमोग्लोबिनोपैथी मिशन का शुभारंभ भी पीएम ने किया था।

आदिवासियों को आकर्षित करने बीजेपी के कदम

  • मप्र में गुजरात के आदिवासी नेता मंगू भाई पटेल को राज्यपाल नियुक्त किया
  • भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति किया
  • छिंदवाड़ा यूनिवर्सिटी का नाम शंकर शाह करने का ऐलान
  • आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया मुक्ति कार्यक्रम की शुरुआत
  • इंदौर के भंवरकुआं चौराहे का नाम जननायक टंट्या भील रख दिया

उमा ने लगाई थी कांग्रेस के ट्रायबल बेल्ट में सेंध

  • साल 2003 में दिग्विजय सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार को बुरी तरह पराजित कर भाजपा की सरकार बनाने वाली उमा भारती ने कांग्रेस के परंपरागत आदिवासी वोटर्स में सेंध लगाई थी। 2003 में बीजेपी ने प्रदेश की 41 सीटों में से 37 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को केवल 2 सीटें मिल पाई थी। हालांकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने भी 2 सीटें जीती थीं।

परिसीमन के बाद 6 आदिवासी सीटें बढ़ीं, लेकिन बीजेपी के विधायक घटे

  • 2008 के चुनाव में परिसीमन के बाद आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 41 से बढ़कर 47 हो गई। इस चुनाव में बीजेपी ने 29 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस ने 17 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को इस चुनाव में 15 सीटों का फायदा हुआ।
  • 2013 के इलेक्शन में आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 47 सीटों में से बीजेपी ने 31 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस के खाते में 15 सीटें आई थी।

कांग्रेस के लिए गेम चेंजर साबित हुए आदिवासी विधायक

  • 2018 के इलेक्शन में करीब 20 साल बाद बड़ा उलटफेर हुआ। आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों में से बीजेपी केवल 16 सीटें जीत पाई। इस चुनाव में कांग्रेस को बड़ा फायदा हुआ। कांग्रेस ने 2013 के मुकाबले दोगुना ज्यादा यानि 30 सीटें जीत लीं। एक निर्दलीय के खाते में गई। इस चुनाव में बीजेपी बहुमत से मात्र 7 सीटें कम जीत पाई थी।