विस्टाडोम कोच इंटरसिटी में लगेगा:एक महीने के ट्रायल पर जनशताब्दी में लगा है; दो नए स्टाप भी मिल सकते हैं

भोपालएक महीने पहले

रानी कमलापति स्टेशन से जबलपुर के बीच जनशताब्दी एक्सप्रेस में विस्टाडोम कोच एक महीने के ट्रायल पर लगाया गया है। इसके बाद इससे इंटरसिटी में लगा दिया जाएगा। इसके साथ ही इसके लिए पर्यटन को देखते हुए दो नए स्टाप भी दिए जाने का सुझाव मध्यप्रदेश टूरिज्म विभाग ने रेलवे को दिया है। इसमें एक औबेदुल्लगांज और दूसरा सलकनपुर के पास है। हालांकि अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इससे पहले 16 अगस्त से मध्यप्रदेश का पहला विस्टाडोम कोच की सुविधा भोपाल से जबलपुर के बीच हो चुकी है।

विस्टाडोम कोच अभी गाड़ी संख्या 12061 रानी कमलापति-जबलपुर जनशताब्दी एक्सप्रेस में रानी कमलापति स्टेशन से और जबलपुर से गाड़ी संख्या 12062 जबलपुर-रानी कमलापति जनशताब्दी एक्सप्रेस में लगा है। पर्यटन विभाग इसे अन्य दूसरी ट्रेन में भी इसे प्रारंभ करने के प्रयास कर रहा है। इसके लिए ऐसी लोकेशन पर विचार चल रहा है, जहां पर प्राकृतिक नजारें देखे जा सकें। विस्टाडोम कोच का किराया रानी कमलापति स्टेशन से होशंगाबाद तक का किराया 690 रुपए है। इटारसी के लिए 705 रुपए, पिपरिया तक 870 रुपए, गाडरवारा तक 1020 रुपए , नसिंहपुर तक 1150 रुपए, श्रीधाम तक 1230 रुपए, मदनमहल तक 1365 रुपए और जबलपुर स्टेशन तक 1390 रुपए निर्धारित किया गया है।

इसलिए इंटरसिटी में लगाया जाएगा

अभी ट्रायल के तौर पर इसे जनशताब्दी में लगाया गया है। इंटरसिटी सुबह 5.30 बजे से चलती है। इससे दिन में पूरा सफर होने से लोगों के पास पूरी यात्रा के दौरान प्राकृतिक नजारें देखने का मौका मिलेगा। जनशताब्दी में होशंगाबाद तक तो रोशनी रहने से प्राकृतिक नजारे दिखाई देते हैं, लेकिन उसके बाद अंधेरा होने के कारण बाद में कुछ भी नजर नहीं आता है।

चेन्नई में बने इस कोच में पैसेंजर्स को फ्री वाई-फाई फैसिलिटी है। कोच 44 सीटर है। रेलवे काउंटर या IRCTC की वेबसाइट पर रिजर्वेशन करा सकते हैं। ऑप्शन में विस्टाडोम चुनना होगा।

इस कोच को और कौन सी खूबियां खास बनाती हैं, जानिए...

  • कोच में एक ऑब्जर्वेशन लाउंज बनाया गया है। इसमें तीनों तरफ से कांच की बड़ी-बड़ी विंडो हैं। यहां खड़े होकर यात्री नजारों को और बेहतर तरीके से देख सकेंगे।
  • सबसे खास इसका ग्लास रूफ टॉप (छत) है। यह नैनो टेक्नोलॉजी से बनाया गया है। लाइट शुरू होते ही यह रूफ टॉप शीशे की तरह पारदर्शी हो जाएगा।
  • कोच की सीट 180 डिग्री तक घूम सकती है। दो सीट एक साथ जुड़ी हैं। इन्हें घुमाकर आप पीछे की ओर वाली सीट की तरफ भी मुंह कर सकते हैं। हर सीट में चार्जिंग पॉइंट दिया गया है।
  • फ्री वाई-फाई तो होगा ही, फिल्म और सॉन्ग्स भी प्ले किए जाएंगे। रेलवे के स्पेशल पैकेज और टूरिस्ट स्पॉट की भी जानकारी दी जाएगी।
  • दोनों तरफ ऑटोमैटिक स्लाइडिंग गेट हैं। गेट के पास ही मल्टी-टियर स्टील के रैक बनाए गए हैं। इसी में पैसेंजर को लगेज रखना होगा।
  • माइक्रोवेव ओवन, कॉफी मेकर और रेफ्रिजरेटर के साथ एक मिनी पेंट्रीकार है।
  • सुरक्षा के लिए कोच 6 CCTV कैमरे से लैस है। छत और खिड़कियों का कांच लैमिनेटेड ग्लास से बना है। इससे ये टूटेंगे नहीं।
  • फायर अलार्म लगे हैं। दो इमरजेंसी विंडो हैं। विंडो के ऊपर एक हैंडल दिया गया है। इसको खींचते ही रबर निकल जाएगी। इससे विंडो का ग्लास अंदर की तरफ गिर जाएगा और पैसेंजर्स को बाहर निकलने के लिए रास्ता बन जाएगा।

यही रूट क्यों चुना गया?

रानी कमलापति से जबलपुर का रूट इसलिए चुना गया, क्योंकि इस रूट पर जंगल, पहाड़ और भरपूर हरियाली है। जंगली जानवर भी देखने को मिल जाते हैं। पचमढ़ी, समरधा के जंगल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व इसी रूट पर है। बुधनी के पास मिडघाट का जंगल है। यहां ट्रेन 360 डिग्री तक घूमती है। होशंगाबाद से पिपरिया के बीच झरने बहते हैं। पैसेंजर्स ट्रेन के गेट पर खड़े होकर नजारे देखते हैं। ऐसे में विस्टाडोम कोच में लोग सेफ रहकर खूबसूरत वादियों को निहार सकते हैं।