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कैंपस प्लेसमेंट:पैंडेमिक में काम ऑनलाइन शिफ्ट हुए तो आईटी सेक्टर में रिक्रूटमेंट 20 फीसदी बढ़े

भोपालएक महीने पहले
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कोरोना ने हमारे सिर्फ रहन-सहन को नहीं बदला, जबकि पूरे आने वाले फ्यूचर को चेंज कर दिया है। जिसका एहसास इन दिनों कॉलेजों में चल रहे प्लेसमेंट्स के पैटर्न को देखकर लगाया जा सकता है। कॉलेजों में पढ़ाई के ऑनलाइन हो जाने के बाद प्लेसमेंट का तरीका तो पहले ही ऑनलाइन हो गया था, लेकिन इस बार ज्यादा जॉब ऑफर्स देने वाली कंपनियों में भी बदलाव हुआ है। भारत समेत दुनियाभर में लोगों ने वर्क फ्रॉम होम किया, बैंकिंग, ग्रॉसरी, मेडिसिन, फिटनेस... सब कुछ डिजिटल डेटा में कन्वर्ट हो गया और यही वजह है कि इस बार दुनियाभर की आईटी कंपनियों के पास जॉब्स की बहार आ गई है। कंपनियों को ज्यादा टैलेंट की जरूरत है, जिससे वे आई कंपनियां जहां हर साल कुछ 100 या 200 रिक्रूटमेंट होते थे, वे हजारों की तादात में रिक्रूटमेंट ऑफर कॉलेजों को दे रही हैं।

मैकेनिकल, सिविल, ईसी से जुड़ी इंडस्ट्री में जॉब ओपनिंग्स 30 प्रतिशत तक घटीं

अनप्रेडिक्टेबल पैटर्न से कोर ब्रांच में जॉब लॉस
प्लेसमेंट एक्सपर्ट नमन अग्रवाल ने बताया, सीएस ब्रांच के लिए मौका अच्छा है। इंडिया की आईटी कंपनियां यूएस, यूके के प्रोजेक्ट्स करती हैं। डिजिटल डेटा बढ़ने के कारण यहां जॉब्स काफी बढ़ गई है। आईटी में जॉब ओपनिंग्स 20% तब बढ़ी हैं। जबकि, कोर ब्रांचेज जैसे मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स में प्लेसमेंट 30% तक जॉब्स कम हुई हैं। कारण है इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में इंडस्ट्री पैटर्न का अनप्रेडिक्टेबल होना। कारखाने कब चलेंगे और कब बंद रहेंगे, कुछ तय नहीं, ऐसे में ये कंपनियां प्लेसमेंट से बच रही हैं।

ज्यादा स्किल्स वालों को मिल रहा फायदा और बेहतर मौके
इंस्टिट्यूट ऑफ एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन (आईईएचई) में ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की हेड डॉ. कल्पना मलिक ने बताया, ट्रेडिशनल क्लास रूम में बच्चे प्रोजेक्ट और लेक्चरर्स में इतने व्यस्त रहते हैं कि स्किल्स पर काम नहीं कर पाते थे। अक्सर बच्चों के नॉलेज और कंपनी की डिमांड के बीच अंतर होने के कारण कंपनियों को काफी समय स्टूडेंट्स कीे ट्रेनिंग में देना पड़ता था, लेकिन इस बार स्टूडेंट के पास ट्रेनिंग के ज्यादा बेहतर मौके थे जिसके कारण कंपनियां उन स्टूडेंट्स को प्रेफरेंस दे रहे हैं जिन्होंने अपने लॉकडाउन डेज का ज्यादा बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया है। खुद की हार्ड के साथ सॉफ्ट स्किल्स में भी ट्रेंड किया है और कंपनी के लिए एक कम्प्लीट पैकेज बन गए हैं।

पढ़ाई पूरी होने के पहले से शुरू हुई ट्रेनिंग
आईईएस कॉलेज में ट्रेंनिंग एंड प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर खुशबू कृपलानी ने बताया अभी तक 60 से ज्यादा कंपनियां कॉलेज प्लेसमेंट के लिए आ चुकी हैं। ज्यादातर बड़ी कंपनियों ने डायरेक्ट प्लेसमेंट देने के बजाय स्टूडेंट्स को उनकी पढ़ाई के दौरान ही इंटर्नशिप ऑफर कर दी थी ताकि वे स्टूडेंट्स को अपनी जरूरत के हिसाब से समय पर ट्रेनिंग दे सके, और पढ़ाई पूरी होते ही जॉब ऑफर दे सके ऐसे कई स्टूडेंट को 12 से 18 लाख तक के पैकेज ऑफर किए गए हैं।

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