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जूडा और सरकार में नहीं बनी बात:चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग से मिले जूनियर डॉक्टर, मंत्री बोले- जूडा की बात पहले मान ली है, जूडा ने कहा- आदेश दिया नहीं, हड़ताल जारी रहेगी

भोपाल4 महीने पहले
चिकित्सा शिक्षा मंत्री से उनके बंगल पर बातचीत करते जूनियर डॉक्टर।
  • हड़ताल को एम्स समेत देशभर के जूनियर डॉक्टरों का समर्थन, निकाला कैंडल मार्च

मध्यप्रदेश में 5 से अधिक मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल में सुलह नहीं हो सकी। रविवार सुबह सुलह के संकेत मिल रहे थे। दोनों पक्ष नरम पड़े। लेकिन शाम साढ़े चार बजे के बाद जूनियर डॉक्टर और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग की मुलाकात के बाद भी हड़ताल खत्म नहीं हुई। जूडा ने तीन और मांगे जोड़ दी हैं।

मंत्री ने कहा, हमने जूडा की मांगें पहले ही मान ली हैं। जूडा हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान कर हड़ताल वापस ले और काम पर लौटे। वही, मंत्री से मिलने के बाद मध्यप्रदेश जूडा अध्यक्ष डॉक्टर अरविंद मीणा ने कहा, हम मंत्री जी से मिलने खुद आए थे। हम हड़ताल खत्म करना चाहते है, लेकिन मंत्री जी ने हमारी मांगों को लेकर न तो कोई आदेश दिया न कोई मीडिया के सामने कोई आश्वासन दिया। हमारी हड़ताल आगे भी जारी रहेगी।

रविवार सुबह जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) की तरफ से सरकार को बातचीत कर मामले का हल निकालने के लिए वीडियो जारी कर अनुरोध किया गया था। इस पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जूडा को हाईकोर्ट का सम्मान कर हड़ताल वापस लेना चाहिए। उन्होंने मांगों को लेकर भी अपनी बात कही है। शाम 4 बजे जूनियर डॉक्टर मंत्री विश्वास सारंग के बंगले पर मिलने पहुंचे, लेकिन मंत्री बंगले पर नहीं थे। इस पर जूडा ने उनका इंतजार किया। कुछ देर बाद मंत्री पहुंचे और जूनियर डॉक्टरों से बातचीत हुई।

बंगले पर जूनियर डॉक्टरों ने मंत्री का इंतजार किया था।
बंगले पर जूनियर डॉक्टरों ने मंत्री का इंतजार किया था।

वहीं, जबलपुर हाई कोर्ट में जूडा के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है। इसमें कहा कहा है कि कोर्ट ने हड़ताल अवैध घोषित कर दी थी, इसके बाद भी डॉक्टर वापस काम पर नहीं लौटे हैं। इस बीच गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में जूनियर डॉक्टरों ने सरकार को कोरोना वारियर्स का सम्मान वापस लौटना का प्रदर्शन किया। हाईकोर्ट द्वारा हड़ताल अवैध बताने के बाद सरकार ने जिस तरह से मेडिकल स्टूडेंट़्स को बर्खास्त किया है, इससे तल्खी बढ़ गई थी।

मंत्री सारंग ने कहा- 3 साल का स्टायपेंड एक साथ बढ़ा देंगे, कोर्ट के सम्मान में लौटिए

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जूडा से हमने लगातार बातचीत की है। हमारी सरकार संवाद स्थापित करने वाली है। जूनियर डॉक्टरों का स्टाॅयपेंड 3 साल से नहीं बढ़ा था। हमने एक साथ बढ़ाने का निर्णय लिया है। हर साल 6 प्रतिशत का इजाफा किया है। डॉक्टरों की मांग थी कि कोरोना के समय उनका निशुल्क इलाज हो। हमने परिवार को निशुल्क इलाज देने का बोला। सरकार ने दरियादिली दिखाते हुए मांगों को माना है। सुरक्षा के लिए हर जगह पुलिस चौकी की स्थापना करने के लिए कहा दिया। जूडा को हाई कोर्ट के निर्देश अनुसार हड़ताल वापस लेना चाहिए। मरीजों का हित हम सभी के लिए सर्वोपरि है। कांग्रेस के नेता जूडा के मामले में राजनीति कर रहे है।

हमें उम्मीद है कि हमारे युवा साथी बात मानेंगे। होई कोर्ट के निर्देशों केे अनुसार हड़ताल वापस लें। जूडा से कहना चाहता हूं कि वह हड़ताल वापस लें। उनकी बात सरकार ने मानी है। सरकार ने उनको सम्मान रखा है। अब सभी को हाईकोर्ट का सभी सम्मान रखना चाहिए।

जूडा ने पहले यह कहा था
मध्य प्रदेश जूडा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरविंद मीणा ने एक वीडियो जारी कर कहा कि प्रदेश में पिछले 6 दिनों से जूडा का आंदोलन चल रहा है। जिसमें हमारा अनुरोध है कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री जूडा से किए वादे पूरे करें। प्रदेश का पूरा जूडा एसोसिएशन मामले का हल बातचीत से निकालने के लिए भोपाल में उपस्थित है, लेकिन अब तक हमें कहीं से भी कोई आधिकारिक बुलावा नहीं आया है। जूडा परेशान होने के साथ ही मरीजों के लिए चिंतित भी है। हमारा मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री से अनुरोध है कि जूडा से मिले और जल्द से जल्द गतिरोध खत्म करें। ताकि जूडा मरीजों के हित में आंदोलन को खत्म कर जल्द से जल्द काम पर लौटे।

हड़ताल को एम्स समेत देशभर के जूडा का समर्थन

दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में जूनियर डॉक्टर ने प्रदर्शन किया।
दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में जूनियर डॉक्टर ने प्रदर्शन किया।

मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को देशभर से समर्थन मिल रहा है। रविवार शाम एम्स दिल्ली, सफदरजंग अस्पताल, कलावती सरन बाल अस्पताल के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना समेत अन्य राज्यों के जूनियर डॉक्टरों ने कैंडल जलाकर समर्थन दिया और मार्च निकाला। साथ ही, फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने सोमवार को देशभर में सांकेतिक प्रदर्शन का भी ऐलान किया।

फोर्डा ने प्रदेश सरकार को 72 घंटे में मामले का समाधान करने की बात कही है। ऐसा नहीं होने पर प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होने की चेतावनी दी है। फोर्डा ने मध्य प्रदेश सरकार से जूनियर डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई को वापस लेने, जूडा से बातचीत के लिए सरकार की तरफ से निष्पक्ष कमेटी बनाने और सभी मांगों को मानने की मांग की है। जीएमसी के एडमिन ब्लॉक के सामने एमपी जूडा ने भी प्रदर्शन किया।

जूडा की और ये 3 मांगें

1- 31 मई के बाद इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए। 2- 2018 के जूडा डॉक्टर, जिनका 3 साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है उनको एसआर (सीनियर रेजीडेंट) माना जाए। 3- सरकार ने 17% स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति दी है, जूडा 24% बढ़ाने की मांग की थी। अब जूडा ने 17 % के साथ बढ़ाने के साथ प्रतिमाह 3 या 4 चार हजार रुपये बढ़ाने की मांग की है।

कब क्या हुआ

  • 31 मई से जूडा एसोसिएशन अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर चला गया था।
  • गुरुवार को हाईकोर्ट ने जूनियर डॉक्टरों की मांगों को अवैध करार देकर 24 घंटे में वापस लेने को कहा था। ऐसा नहीं करने पर सरकार को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
  • इस आदेश के तुरंत बाद सरकार के निर्देश पर जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी ने प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेज के 468 पीजी फाइनल ईयर के छात्रों के नामांकन रद्द कर दिए। इसके बाद अब यह छात्र परीक्षा देने के लिए योग्य नहीं रहे।
  • इस बात से नाराज प्रदेश भर के करीब 2500 जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देना शुरू कर दिया।
  • शुक्रवार को सरकार ने कोर्ट का 24 घंटे का समय पूरा होने पर कोर्ट के निर्देश के अनुसार कार्रवाई करने को कहा।
  • शुक्रवार को जीएमसी डीन ने हड़ताल पर जाने वाले 28 डॉक्टरों को हॉस्टल खाली करने और सीट छोड़ने पर बांड की शर्तों के अनुसार पैसा जमा करने के लिए लिखा।
  • शनिवार को जूनियर डॉक्टर ने हॉस्टल खाली कर एडमिन ब्लॉक के बाहर सामान रख कर प्रदर्शन किया। एप्रन में खून लगाकर टांगा। रक्त दान किया और दूसरी जगह कोरोना वॉरियर्स के सर्टिफिकेट भी लौटाए।
  • चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि जूडा को हड़ताल समाप्त करना चाहिए। हमारे द्वार बातचीत के लिए हमेशा खुले हैं।
  • शनिवार को ग्वालियर में भी हड़ताल का समर्थन करने वाले 46 सीनियर डॉक्टरों के इस्तीफे मंजूर कर लिए गए।
  • मेडिकल कॉलेज के डीन ने इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों को नोटिस जारी किए। इसमें सीट छोड़ने के एवज में बांड भरने के साथ ही हॉस्टल खाली करने के नोटिस भेजा।
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