बुर्के में बुलेट दौड़ाने वाली खान सिस्टर्स का इंटरव्यू:हम हिजाब के समर्थन में; सियासत वाले न ही घुसें, ‘फ्लाइंग KISS’ किसे दिया था, यह भी बताया…

भोपाल6 महीने पहलेलेखक: संदीप राजवाड़े

कर्नाटक में चल रहे हिजाब विवाद को समर्थन देते हुए भोपाल की खान सिस्टर्स का बुर्के में बाइक चलाते हुए वीडियो खूब वायरल हुआ। इसे लोगों का समर्थन भी मिला तो कुछ ने विरोध भी किया। वीडियो में दिख रही चारों बहनों का कहना है कि यह मुस्लिम लड़कियों पर छोड़ दिया जाए कि उन्हें कब-क्या पहनना है। इसे कोई थोप नहीं सकता है। खान सिस्टर्स ने कहा कि यह लोकतांत्रिक देश है और सबको यह अधिकार हैं कि उन्हें क्या पहनना है। इसे लेकर कुछ सियासत वाले मुद्दा बनाकर हिंदु-मुस्लिम को बांटना चाहते हैं।

सोशल मीडिया पर खान सिस्टर्स के नाम से फेमस भोपाल की चार सगी बहनें लंबे समय से हिजाब-बुर्के में नजर आती रही हैं। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर खान सिस्टर्स के बुर्के-हिजाब में बाइक चलाते हुए, साथ में घूमते हुए, हाथ में हॉकी स्टिक लेकर फोटो-वीडियो हैं। खान सिस्टर्स ने पहली बार हिजाब के मुद्दे और उसके समर्थन में आने को लेकर बात की।

हिजाब-बुर्का इस्लामिक धर्म का पहनावा

खान सिस्टर्स में सबसे छोटी बहन (19 साल) की है। उसका कहना है कि हिजाब-बुर्का हमारे इस्लामिक धर्म का पहनावा है। इसे लोग अपने इस्लामिक नॉलेज और इच्छा से पहनते हैं। अब यह लड़कियों पर छोड़ देना चाहिए कि उन्हें यह पहनना है या नहीं। मैं भी स्कूल टाइम में बुर्का या हिजाब नहीं पहनती थी, ट्यूशन के दौरान पहनकर जाती थी, जब मुझे लगा कि अब पहनना चाहिए, मैंने निर्णय लिया और पहनने लगी।

कुछ पॉलिटिकल लोग इसे बेवजह मुद्दा बना रहे, देश में और भी अहम मुद्दे हैं

खान सिस्टर्स की तीसरे नंबर की बहन का कहना है कि यह सालों से चला आ रहा है कि अपनी मर्जी से लड़कियां बुर्का या हिजाब पहनती हैं। अब इसे लेकर कुछ पॉलिटिकल लोग मुद्दा बना रहे हैं। हिंदू महिलाएं अगर साड़ी पहन रही हैं तो वह उनके ऊपर है, उनकी च्वाइस है। देश में और कई मुद्दे हैं, उन पर बात की जाए। इसे तूल देना ठीक नहीं है।

परिवार-धर्म से कोई प्रेशर नहीं, लंबे समय से पहन रहे हिजाब

सबसे छोटी बहन का कहना है कि महीनेभर से कर्नाटक में हिजाब को लेकर विवाद चल रहा है। मुस्कान नाम की जो लड़की सामने आई, उसके समर्थन में हम खड़े हुए। किसी ड्रेस कोड की बात नहीं कर रहे हैं। हम चारों बहनें लंबे समय से हिजाब-बुर्का पहन रहे हैं, इसे लेकर न तो कभी हमारे परिवार वालों ने, ना ही धर्म से किसी तरह का प्रेशर दिया गया।

पिछले 6-7 सालों से मेरी बड़ी बहनें इस्लामिक नॉलेज की पढ़ाई कर रही हैं। इस दौरान उन्हें लगा और उन्होंने हिजाब-बुर्का पहनना शुरू कर दिया। मैं सबसे छोटी हूं, मुझे किसी ने इसके लिए दबाव नहीं डाला। जब मेरा मन किया तो मैंने भी हिजाब-बुर्का पहनना शुरू कर दिया।

हिजाब हमारी पहचान बन गया है

खान सिस्टर्स का कहना है कि अब हिजाब या बुर्के में रहना हम बहनों की पहचान बन गई है। हम इससे खुश हैं। हमारे इस्लाम में महिलाओं को प्रिशियस डायमंड (अनमोल कीमती हीरा) कहा गया है। इसे ऐसे ही खुले में नहीं रख सकते। हम इस मैसेज से प्रेरित हुए। हम भी अपने आप को प्रिशियस मानते हैं। कई मुस्लिम महिलाएं हिजाब-बुर्का नहीं पहनती हैं, अब यह उनके हक में छोड़ देना चाहिए।

वीडियो शूट कर रही बहन को किया था फ्लाइंग किस

खान सिस्टर्स ने कहा कि हिजाब-बुर्का पहनकर बाइक चलाते हुए जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसे कर्नाटक के मसले के बाद करीबन हफ्तेभर पहले ही बनाया था। हम चारों बहनों ने वीडियो शूट किया। हम संदेश देना चाहते थे कि मुस्लिम महिलाएं बुर्के में कंफर्टेबल हैं और हर काम कर सकती हैं। मुस्लिम महिलाएं बुर्के-हिजाब में बाइक-कार भी चला सकती हैं। हाल ही में फुटबॉल भी खेलते हुए दिखीं। हम तो खेत में ट्रैक्टर भी बुर्का पहनकर चलाते हैं।

खान सिस्टर्स ने कहा, बाइक पर बैठकर बहन का फ्लाइंग KISS दूसरी बाइक पर पीछे बैठकर वीडियो शूट कर रही बहन की तरफ दिया गया था। उसे भी तूल दिया जा रहा है। इस वीडियो को बनाने के दौरान ही हमने हेलमेट नहीं पहनना था, हमें भी ट्रैफिक रूल्स पता है और हम इसका पालन करते हैं।

पिता के राजनीतिक जुड़ाव के बारे में नो कमेंट, भगवा नंबर प्लेट प्लान्ड नहीं

खान सिस्टर्स ने बताया कि पिता एक राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं, इसे लेकर वे कुछ नहीं बोलना चाहती हैं। जहां तक वीडियो में बाइक नंबर प्लेट भगवा रंग का है, तो ऐसा कहां लिखा है कि हिंदू ही इस रंग का उपयोग करेंगे, मुस्लिम नहीं। बाइक रिश्तेदारों की थी, उसका नंबर प्लेट किस रंग का है, यह कोई प्लान नहीं किया गया था, वह पहले से उसी रंग में लिखा हुआ था।

आज के युवा समझदार हैं, उन्हें ऐसे मुद्दे भटका नहीं सकते

खान सिस्टर्स ने कहा, कुछ पॉलिटिकल लोग जो ऐसे मसले उछालते हैं, वे लोगों को आपस में भिड़ाना चाहते हैं। वे समझ लें कि आज के युवा पढ़े-लिखे हैं, अच्छा-बुरा समझते हैं और जो उन्हें सही लगता है, उसके साथ वे खड़े होते हैं। युवा ऐसे मुद्दों से भटक नहीं सकते। बुर्का-हिजाब पहनना इस्लामिक नॉलेज और अपनी समझ के ऊपर है, जिसको जब समझ में आए वह तय करे कि उसे पहनना है या नहीं।

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