दो हफ्तों में डेंगू मलेरिया के मरीज बढ़ने का खतरा:पिछले साल ग्वालियर में ड़ेंगू और बालाघाट में मलेरिया ने मचाया था आतंक, एमपी में अलर्ट जारी

भोपाल4 महीने पहले

20 जून यानि अगले दो हफ्तों के भीतर मप्र में मानसून की एंट्री हो सकती है। बारिश शुरू होते ही डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां अपना आतंक मचाने लगतीं हैं। पिछले साल एमपी के 15 जिलों में डेंगू और 17 जिलों में मलेरिया के सबसे ज्यादा मरीज मिले थे। स्वास्थ्य विभाग ने इन जिलों में मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए अलर्ट जारी किया है। अफसरों ने मच्छर जनित बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए फीवर सर्वे के निर्देश दिए हैं।

मलेरिया और डेंगू के लक्षणों से समझें कि ये डेंगू है या मलेरिया का बुखार

० मलेरिया में अक्सर ठंड लगकर बुखार आता है और बुखार एक दो दिन में फिर आता है जबकि डेंगू में लगातार तेज़ बुखार आना प्रमुख लक्षण है।

● डेंगू बुखार में आंखो के पीछे दर्द एवं शरीर पर हल्के लाल रंग के चकत्ते दिखाई देते हैं जबकि मलेरिया बुखार में ऐसे लक्षण नहीं होते हैं।

● डेंगू बुखार में जोड़ो एवं मांसपेशियों में तेज़ दर्द की स्थिति भी पाई जाती है जबकि मलेरिया में अक्सर ऐसे लक्षण दिखाई नही देते ।

पिछले साल इन जिलों में मिले थे सबसे ज्यादा डेंगू के मरीज

जिलाडेंगू के मरीज
ग्वालियर2636
मंदसौर1293
इंदौर1201
उज्जैन1003
जबलपुर781
भोपाल775
भिंड़570
गुना539
नीमच508
रतलाम415
विदिशा410
सागर392
देवास354
खरगोन327
दमोह320

मलेरिया दो प्रकार के होते हैं, इनमें ज्यादा गंभीर कौन सा होता है ?

मप्र में प्रमुखतः दो प्रकार के मलेरिया मरीज मिलते हैं। प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम और प्लाज्मोडियम वायवैक्स

इनमें से ज्यादा गंभीर प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम होता है इसे मस्तिष्क मलेरिया भी कहते हैं इसका सही समय पर इलाज नही मिलने पर मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।

दोनो में क्या लक्षण अलग होते हैं जिससे पता चल सके कि कौन सा मलेरिया है

मलेरिया के सामान्य लक्षण - ठंड लगकर बुखार आना, पसीना देकर बुखार का उतर - जाना, सिरदर्द, उल्टी आना, बदनदर्द।

प्लाज्मोडियम वायवैक्स मलेरिया में अधिकाशंतः तीसरे दिन अर्थात् 48 घंटों के बाद लक्षण आधारित बुखार आता है जबकि प्लाज्मोडियम फैल्सीपेरम में हर दूसरे दिन या एक दिन के अंतराल में बुखार आता है। मलेरिया के प्रकार की पुष्टि जांच के आधार पर ही की जा सकती है।

इन जिलों में मिले थे मलेरिया के सबसे ज्यादा मरीज

जिलामलेरिया के मरीज
बालाघाट1081
छिंदवाड़ा183
श्योपुर165
रीवा158
धार105
सिंगरौली98
सीधी90
नरसिंहपुर89
मुरैना77
दतिया76
सतना63
मंड़ला61
शिवपुरी60
झाबुआ57
अनूपपुर56
उमरिया51

मलेरिया से बचाव के लिए इस बार स्वास्थ्य विभाग की रणनीति

मलेरिया से बचाव के लिए जिलों में फीवर सर्वे करके बुखार से ग्रस्त मरीजों की ब्लड स्लाइड या रैपिड डायग्नास्टिक किट से जांच कराई जा रही है। पॉजिटिव मिलने वाले मरीजों को तुरंत पूरा इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के मुताबिक मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए गतिविधि जैसे लार्वा विनष्टीकरण (मच्छर जन्य जलस्त्रोत से मच्छरो के लार्वा नष्ट करना), फांगिग कार्य, अंदरूनी दवा छिड़काव किया जाता है।

जिन क्षेत्रों में LLIN मच्छरदानी का वितरण किया गया है उन क्षेत्रों में मच्छरदानी का उपयोग करने के लिए लाेगों में स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के जरिए जनजागरूकता के काम किए जा रहे हैं।

मलेरिया निरोधक माह जून में प्रदेश के समस्त जिलों में मलेरिया से बचाव के लिए बडे़ पैमाने पर जनजागरूकता के अभियान चलाए जा रहे हैं।

मलेरिया की जांच और उपचार की सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों और मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पास दवाएं उपलब्ध कराई गई है।

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