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  • Like Every Year, This Time The Monsoon Came And Took Away All The Claims With It, There Was Some Relief And There Was A Disaster.

फोटो स्टोरी:हर साल की तरह इस बार भी मानसून आया और अपने साथ तमाम दावाें को बहा ले गया, कहीं राहत, तो कहीं आफत बनी बारिश

एक महीने पहले
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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रविवार की दोपहर हल्की गर्म रही। पारा 34 डिग्री पर पहुंच गया। लेकिन, इसके बाद साढ़े 3 बजे इतने काले और घने बादल छाए कि अंधेरा होने लगा। गाड़ियों की लाइटें जल गईं। रोशनी इतनी थी, जितनी सूर्यास्त के समय रहती है। इस सीजन में ऐसा पहली बार हुआ। फिर तेज हवा से बारिश शुरू हो गई। एक घंटे में 2 सेमी से ज्यादा बारिश के बाद ही रोशनी कुछ बढ़ी।

अभी बाकी है मानसून का निखार       

राजस्थान के बांसवाड़ा में शहर से महज 15 किमी दूर माहीडैम रोड पर जगमेरू पहाड़ी ने नए पिकनिक स्पाॅट के रूप में पहचान बनाई है। माही नदी के किनारे ऊंची-ऊंची पहाड़ियां मानसून के कारण हरी-भरी हो गई हैं। इन्हीं में करीब एक 1300 मीटर सबसे ऊंची है जगमेरू की पहाड़ी। जिसका नाम बांसवाड़ा के प्रथम राजा जगमाल सिंह के नाम पर पड़ा।

...क्योंकि यहां भोजन के लिए ज्यादा संघर्ष नहीं

ग्रेटर फ्लेमिंगाे की कलाबाजियों से इन दिनों जवाई बांध आबाद है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉक्टर दिलीप अरोड़ा ने बताया कि राजहंस परिवार की इस प्रजाति का मूल ठिकाना यूं तो यूरोपीय देश के साथ ही दक्षिण एशिया में है, लेकिन सर्दियों में यह भारत में कई स्थानों पर प्रवास करते है। वहीं जवाई बांध इनकाे रास आ गया है। इस कारण इस बार 70 से 80 ग्रेटर फ्लेमिंगाे का एक झुंड अभी तक यही पर है।

7305 राखियां बेच कर कमाएं 5 लाख रुपए

छत्तीसगढ़ के धमतरी में महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने व चाइनीज राखियों से मुकाबला करने  के लिए जिले में पहली बार देसी राखियां बन रही है। रंग-बिरंगी यह राखियां बांस, सब्जी के बीज और गाय की गोबर से बनाई जा रही है। इन्हें खूब पसंद किया जा रहा है। अब तक 7 हजार 305 राखियां बेची जा चुकी है। इन राखियों से अब तक 5 लाख 18 हजार 592 रुपए कमाई भी हो चुकी है।

ये ठिकाना सुरक्षित है....

राजस्थान के नागौर का सुजला क्षेत्र चिड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। इस क्षेत्र में 18 हजार से अधिक मिट्‌टी के घोंसले चिड़ियों के लिए लगे हैं। यह संभव हो पाया है जसवंतगढ़ के पक्षी प्रेमी डॉ. ललित सोमानी की पहल पर। सोमानी की पहल पर क्षेत्र के दर्जनभर भामाशाह व संस्थाएं आगे आई । इस मुहिम के तहत अब तक कसुम्बी, डाबड़ी, आसोटा, तंवरा, सुजानगढ़, डीडवाना, सालासर आदि जगहों पर 17500 घोंसले चिड़ियों के लिए लगाए जा चुके हैं। 

बांस बल्ले के पुल से गुजरती जिंदगी

बिहार के मधुबनी में लदनियां से लौकहा तक एनएच-104 पर मुख्य बाजार के समीप  पिपराही गांव के बीच कटैया नदी पर बना डायवर्सन रविवार को टूट जाने से यात्रियों की फजीहत बढ़ गई है। तीन पंचायत लक्ष्मीनियां, पिपराही और बेलाही के लोगों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट चुका है। जरूरतमंदों की मांग पर झलौन गांव के लोगों ने इस डायवर्सन पर आनन फानन में रविवार को बांस बल्ले के सहारे एक चचरी पुल का निर्माण किया। जिससे होकर लोगों का आना जाना हो रहा है। हालांकि बदले में पैदल सवार को 10 रुपए, साइकिल सवार को 30 और बाइक चालक को 100 रुपए उतराई के तौर पर देने पड़ते है।

ये राह नहीं आसा....

बिहार के शेखपुरा के चिंतामन चक गांव के ग्रामीण को आवागमन में सड़क की बदहाली के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। ग्रामीण क्षेत्रों को चकाचक किए जाने एवं विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के जनप्रतिनिधियों के बादों के बीच सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। फ़िलहाल यह सड़कें ग्रामीणों के आवागमन में बाधक बनी हैं। वर्षों से इन सड़कों की कोई सुध नहीं ली गयी है। हालात यह हैं कि इन सड़कों पर राहगीरों का वाहनों से तो दूर पैदल भी चलना दुश्वार है।

जरा सी बारिश में शहर बना ताल

रविवार को शहर में 45 मिनट तक बारिश हुई। इससे कई इलाकों में पानी भर गया। शिंदे की छावनी स्थित छप्पर वाला पुल और नदी गेट को जाने वाले दोनों रास्तों पर सड़कें पानी में डूब गई  और मार्ग अवरुद्ध हो गया। लगभग आधे घंटे के इंतजार के बाद पानी उतरा, तब जाकर लोग निकल पाए । 

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