क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक में बनी सहमति:अस्पताल में भर्ती मरीज का आधार लिंक करें, ताकि पता चले कि कौन सी दवा दी

भोपाल6 महीने पहले
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कलेक्टर और डीआईजी सड़क पर उतरे, पूछताछ की। - Dainik Bhaskar
कलेक्टर और डीआईजी सड़क पर उतरे, पूछताछ की।

अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों का आधार लिंक किया जाए ताकि उनके परिजनों को पता चल सके कि मरीज को कौन सी दवा दी गई और जिनकी फीस ली गई है वह सही है या नहीं। इससे अस्पतालों की मनमानी रुकेगी। इसी के साथ सात दिन बेहद सख्ती के साथ पहले जैसा लॉकडाउन लगाया जाए। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी सरकारी और निजी संस्थान बंद किए जाएं। बुधवार को हुई क्राइसिस मैनेजमेंट कमेटी की बैठक में सदस्यों ने इस संबंध में अपनी सहमति दी।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि निजी अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों को दवा और ऑक्सीजन के लिए परेशान होना पड़ता है। जब रजिस्ट्री मे आधार लिंक हो सकता है तो फिर भर्ती होने पर भी हो सकता है। इससे निजी अस्पतालों की मनमानी रुकेगी।

कलेक्टर और डीआईजी सड़क पर उतरे, पूछताछ की
कलेक्टर अविनाश लवानिया और डीआईजी इरशाद वली ने रोशनपुरा चौराहे पर बेवजह घूमने वालों से पूछताछ की और जेल वाहन में बैठा दिया। लवानिया ने बताया कि इस दौरान 50 से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई की गई।

सख्ती हो, 7 दिन के लिए बंद हों सरकारी और निजी संस्थान
विधायक विष्णु खत्री, कृष्णा गौर ने कहा कि जिस तरह की सख्ती पिछले साल लॉकडाउन में थी, वैसी ही अब भी होना चाहिए तभी स्थिति नियंत्रित हो पाएगी। इमरजेंसी सर्विस को छोड़कर सरकारी दफ्तर, निजी संस्थान 7 दिन के लिए पूरी तरह बंद किए जाएं। बैठक में सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी पर भी सदस्यों ने नाराजगी जताई। उनसे कहा गया कि मरीज के परिजनों को उसके स्वास्थ्य की जानकारी दें।

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