37 लाख के इंजेक्शन खरीदी का मामला:राजौरा समेत तीन अफसरों के खिलाफ लोकायुक्त जांच शुरू

भोपाल8 महीने पहले
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  • विशेष कोर्ट ने खात्मा रिपोर्ट की खारिज, 5 नए बिन्दुओं पर सौंपी जांच

प्रदेश में 14 साल पहले महिलाओं के इलाज के नाम पर जरूरत के बिना खरीदे गए 37 लाख रुपए के इंजेक्शन मामले में दोबारा लोकायुक्त जांच शुरू हो गई है। दवा खरीदी में 7 साल पहले लोकायुक्त पुलिस खात्मा लगा चुकी है, लेकिन स्पेशल कोर्ट के खात्मा रिपोर्ट खारिज करने के बाद 5 बिन्दुओं पर जांच चलेगी। इस मामले में गृह विभाग के एसीएस राजेश राजौरा समेत स्वास्थ्य विभाग के 3 अन्य अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरूपयोग की जांच होगी।

इस बीच स्वास्थ्य विभाग के अफसर रिटायर हो चुके हैं। कोर्ट ने प्रकरण में पाया कि अनुसंधानकर्ता अधिकारी ने कोई साक्ष्य नहीं जुटाए है। स्पेशल जज (पीसी एक्ट) राकेश कुमार शर्मा ने 6 मार्च को लोकायुक्त पुलिस की खात्मा रिपोर्ट को खारिज किया था। कोर्ट के निर्देश पर 7 साल के पहले खात्मा लग चुके मामले की वापस से जांच चलेगी।

क्या है पूरा मामला

लोकायुक्त ने दवा खरीदी पर वर्ष 2007 में स्वत: संज्ञान लेकर जांच शुरू की थी। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त डॉ. राजेश राजौरा, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी एमएम माथुर, संयुक्त संचालक डॉ. अशोक विरांग, संचालक डॉ. योगीराज शर्मा थे। इन अफसरों को मेसर्स कर्नाटक एंटी बायोटिक्स एंड फार्मासुटिकल्स (बैंगलोर) से बिना मांग के दवा खरीदने पर भ्रष्टाचार की जांच के दायरे में लिया गया था।

विभाग ने 8 दिसंबर 2006 को 37.46 लाख के स्टेप्टोमाइसिन इंजेक्शन (.75 मिलीग्राम) की खरीदी बिना जरूरत की थी। ये 20 अप्रैल 2007 को भी खरीदे गए। लोकायुक्त शिकायत में सामने आया था कि किसी जिले ने इंजेक्शन की मांग नहीं की थी।

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