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रेगुलर क्लासेस शुरू होने के बाद पहले दिन की रिपोर्ट:पहले दिन 10% विद्यार्थी पहुंचे; ऑनलाइन पढ़ाई की सच्चाई, कोर्स तो दूर कई को टीचर्स तक की जानकारी नहीं

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबे
प्रदेश में 1 जनवरी से प्रैक्टीकल क्लास लग रही हैं। नियमित क्लास शुरू होने के पहले दिन एमवीएम कॉलेज में छात्रों की उपस्थिति 10% तक रही।
  • छात्र नियमित क्लास के पक्ष में, लेकिन कोरोना का डर भी
  • सहमति पत्र लिए जा रहे, सिक रूम भी किया गया तैयार

यह हाल है मध्यप्रदेश के सबसे बड़े शासकीय कॉलेज मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय (एमवीएम) का। जहां छात्रों की संख्या करीब 4 हजार है, लेकिन नियमित क्लास शुरू होने के पहले ही दिन छात्रों की 10% उपस्थिति भी नजर नहीं आई। हां कुछ छात्र प्रैक्टीकल की क्लास अटैंड करते और कुछ जानकारी लेते दिखाई दिए। इसके अलावा पूरा परिसर खाली-खाली सा नजर आया।

प्रदेश भर के कॉलेजों में सोमवार से नियमित क्लास लगना शुरू हो गईं। सुबह 10.48 बजे तक एमवीएम कॉलेज में सन्नाटा पसरा था।
प्रदेश भर के कॉलेजों में सोमवार से नियमित क्लास लगना शुरू हो गईं। सुबह 10.48 बजे तक एमवीएम कॉलेज में सन्नाटा पसरा था।

पहले दिन एमवीएम कॉलेज की ग्राउंड रिपोर्ट में हकीकत यह सामने आई है कि अधिकांश छात्रों को तो ऑनलाइन क्लास लेने वाले प्रोफेसर तक का नाम नहीं पता। अब तक अधिकांश छात्रों ने तो क्लास तक अटैंड नहीं की। हालांकि अब छात्र नियमित क्लास लगाए जाने के पक्ष में हैं, लेकिन उन्हें अब भी कोरोना का डरा सता रहे हैं।

एमवीएम कॉलेज में प्रैक्टीकल के लिए काफी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंच रहे।
एमवीएम कॉलेज में प्रैक्टीकल के लिए काफी संख्या में छात्र-छात्राएं पहुंच रहे।

एक जनवरी से शुरू हो चुके हैं कॉलेज

मध्य प्रदेश में 1 जनवरी से सभी शासकीय और अशासकीय कॉलेज खुल चुके हैं, लेकिन 1 से लेकर 10 जनवरी तक केवल प्रैक्टिकल क्लास ही लगाई गईं। अब सोमवार यानी आज से यूजी फाइनल ईयर और पीजी थर्ड सेमेस्टर की क्लास शुरू होंगी। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार नई गाइडलाइन में कॉलेज खुलने के आदेश शासन जारी कर चुका है।

परिसर की स्थिति।
परिसर की स्थिति।

एक जनवरी से पहले 10 दिन सिर्फ प्रैक्टिकल और 10 जनवरी से नियमित क्लास शुरू की गईं। इसके बाद 20 जनवरी को सभी जिलों में आपदा प्रबंधन की बैठक होगी। उसके बाद कॉलेज को आगे नियमित और क्लास की संख्या बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा। इसमें कोरोना की स्थिति को मुख्य रूप से ध्यान रखा जाएगा।

कॉलेज में अधिकांश कमरे अभी बंद हैं।
कॉलेज में अधिकांश कमरे अभी बंद हैं।

एक तिहाई उपस्थिति से कक्षाएं लगाई जाएंगी

प्रदेशभर के इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फॉर्मेसी कालेज और पॉलीटेक्निक कॉलेज खोले जा सकेंगे। ये कॉलेज शासन और यूजीसी द्वारा जारी गाइडलाइन के तहत ही लगेंगे। संस्थानों और विद्यार्थियों की सहमति से ही कॉलेज खोले जाएंगे। प्रबंधन विद्यार्थियों को कॉलेज आने के लिए मजबूर नहीं करेंगे। छात्र अपनी मर्जी से ही कॉलेज आकर कक्षाओं में उपस्थित होंगे। इसलिए कॉलेज स्टूडेंट्स की एक तिहाई उपस्थिति से कक्षाएं लगाई जा सकेंगी। यह मंगलवार से खुल सकते हैं। हालांकि अब तक कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।

कॉलेज की प्रशासनिक बिल्डिंग में सिक रूम बनाया गया है।
कॉलेज की प्रशासनिक बिल्डिंग में सिक रूम बनाया गया है।

ऑनलाइन क्लास भी चलती रहेंगी

एमवीएम कॉलेज के प्राचार्य महेंद्र सिंह ने बताया कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की क्लास लग रही हैं। आज से नियमित क्लास शुरू हुई हैं। गाइडलाइन के अनुसार सैनिटाइजेशन से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग तक का ख्याल रखा गया है। छात्रों के लिए एक सिक रूम तैयार किया गया है। उसमें प्रारंभिक उपचार की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं। हालांकि पहले दिन छात्रों की उपस्थिति कम रही, लेकिन हमें उम्मीद है कि जल्द ही छात्रों की संख्या बढ़ेगी।

काउंटर पर एक छात्रा नोटिस को पढ़ती हुई।
काउंटर पर एक छात्रा नोटिस को पढ़ती हुई।

छात्र अपनी मर्जी से कॉलेज आ सकेंगे। अगर वे कॉलेज नहीं आना चाहते हैं, तो पहले की तरह ऑनलाइन क्लास चालू रहेंगी। किसी भी तरह की सार्वजनिक गतिविधियों जैसे खेल और अन्य तरह के कार्यक्रम प्रतिबंधित हैं। इसके अलावा हॉस्टल भी नहीं खुलेंगे। लाइब्रेरी भी केवल किताबों को लेने और जमा करने के लिए खुलेगी। छात्र को कॉलेज आने के लिए माता-पिता की लिखित अनुमति लाना होगा।

कॉलेज में छात्र-छात्राएं तो पहुंचे, लेकिन पहले दिन सिर्फ सहमति पत्र जमा कराए गए।
कॉलेज में छात्र-छात्राएं तो पहुंचे, लेकिन पहले दिन सिर्फ सहमति पत्र जमा कराए गए।

यह रही परेशानी

  • भोपाल के बाहर से आने वाले छात्रों के लिए ठहरने की व्यवस्था नहीं होने के कारण नियमित क्लास अटैंड करना एक चुनौती है।
  • छात्रों ने बताया कि माता-पिता नियमित क्लास में भेजने के लिए तैयार नहीं है।
  • कॉलेज स्तर पर ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लास के लिए टाइम टेबल बनाना बड़ा मुश्किल काम है।
  • सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती।
  • जल्द से जल्द कोर्स को पूरा करना और स्टूडेंट को उसे कवर करना एक परेशानी है।
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