168 खदानों का जिम्मा दो महिला अफसरों पर:हमारे घरों पर पहरा देते हैं माफिया के गुंडे, बाहर निकलते ही फोन कर देते हैं; कैसे करें कार्रवाई?

भोपाल2 महीने पहलेलेखक: अजय वर्मा
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तस्वीर कलखेड़ा के पास छपरी गांव की खदान की है, इसमें मशीनें नजर आ रही हैं। - Dainik Bhaskar
तस्वीर कलखेड़ा के पास छपरी गांव की खदान की है, इसमें मशीनें नजर आ रही हैं।

भोपाल जिले में अवैध खनन का खेल इसलिए जारी है क्योंकि खनिज विभाग की इनके खिलाफ कार्रवाई करने में दिलचस्पी नहीं है। आप जानकर हैरान होंगे कि जिले में 100 किमी के दायरे में 168 खदानें चल रही हैं, लेकिन इनकी निगरानी का जिम्मा सिर्फ दो महिला माइनिंग इंस्पेक्टरों प्रभा शर्मा और शुचि माथुर के पास है।

दैनिक भास्कर ने गुरुवार को जब इन दोनों से अवैध खनन को लेकर सवाल किया तो उन्होंने बताया कि यहां माइनिंग माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे हमारे हरेक मूवमेंट की जानकारी रखते हैं। हमारे घरों के बाहर 24 घंटे उनके गुंडे पहरा देते हैं। घर से बाहर निकलते ही वे अपने साथियों को फोन पर सूचना दे देते हैं। अब ऐसे में उन पर क्या कार्रवाई करें।

मामले में जब हमने खनिज मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह से बात की तो उन्होंने माइनिंग ऑफिसर एचपी सिंह को तत्काल अवैध उत्खनन की जांच के निर्देश दिए। इसके बाद प्रभा और शुचि को ही टीमों के साथ नीलबड़, रातीबड़, कलखेड़ा की खदानों पर भेजा गया, लेकिन मौके पर न तो ट्रक मिले, न गिट्‌टी निकालने वाली मशीनें। सन्नाटा पसरा था। एक डंपर जरूर दिखा, जो बिना रॉयल्टी के मुरम निकालकर ले जा रहा था। दोनों ने इस पर जुर्माना लगाकर जब्त कर लिया।

हम सिविल ड्रेस में गए थे, फिर भी भाग गए माफिया

दफ्तरों के पास भी इनके लोग रहते हैं

हमारे दफ्तरों के आसपास भी इनके ही लोग तैनात रहते हैं। जो हर पल अपने मालिकों को आने-जाने की जानकारी देते हैं। इसलिए कार्रवाई करने में कई बार परेशानी आती है। आबादी के बीच चली खदानों का अब ऑडिट करेंगे। - प्रभा शर्मा, माइनिंग ऑफिसर

डंपर पकड़ते ही मैसेज फैल गया था

गुरुवार को सुबह 10 बजे से डंपरों की जांच के लिए अभियान चलाया गया। लेकिन जैसे ही एक डंपर को पकड़ा। सारे संचालकों ने वॉट्सएप ग्रुप पर मैसेज शेयर कर दिए। हम सिविल ड्रेस में गए थे, फिर भी सब भाग खड़े हुए। - शुचि माथुर, माइनिंग ऑफिसर

आंखों देखी- खदान इतनी खोद दी कि मशीन नीचे उतारनी पड़ी

यह है कलखेड़ा के पास स्थित छापरी गांव की आरएस लाहोटी की खदान। लाहोटी ई-7 अरेरा कॉलोनी में रहते हैं। भास्कर टीम ने मौके पर जाकर देखा तो खदान 6 मीटर से ज्यादा खुदी मिली। ये इतनी गहरी हो गई है कि कन्वेयर बेल्ट सिस्टम गहराई में लगाना पड़ा है। आसपास पानी भरा हुआ है। फिर भी खनन जारी है।

नियमानुसार कन्वेयर बेल्ट सिस्टम की जगह माइनिंग एरिया से अलग होना चाहिए। इस खदान की अनुमति 3 अक्टूबर 2008 को मिली थी, जो 27 जुलाई 2017 में खत्म हो चुकी है। यहां अब काफी आबादी है, फिर भी सिया और खनिज विभाग ने इसे चलाने की अनुमति दे दी।

मंत्री बोले- खदानों का सीमांकन होगा

दैनिक भास्कर में अवैध खनन की खबर प्रकाशित होने के बाद खनिज मंत्री ने अफसरों से खदानों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा है कि खदान संचालकों को जितनी जमीन सरकार ने दी थी, यदि उन्होंने उससे ज्यादा पर खुदाई कर दी है तो उसे निरस्त करेंगे। उन्होंने तीन-चार दिन में रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही 800 से ज्यादा खाली पड़े माइनिंग इंस्पेक्टरों के पद भरे जाएंगे।

बड़ा सवाल- स्कूल के पास ही खदानें क्यों?

नीलबड़, रातीबड़ और कलखेड़ा, छापरी, बरखेड़ा नाथू के अलावा मालीखेड़ी में खदानों का संचालन हो रहा है। इन सबके आसपास आबादी है। फिर भी राज्य स्तरीय समाघात निर्धारण प्राधिरकण (सिया) आंख बंद कर पर्यावरण की अनुमति जारी कर रहा है। जिन 112 खदानों की लीज 2018 से 2020 के बीच खत्म हो गई थी, उन्हें लगातार रिन्यू किया जा रहा है।

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