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कोरोना फाइटर्स:निशातपुरा स्थित रेलवे कॉलोनी में रहने वाले सिंह परिवार के सदस्य एक साथ संक्रमण से लड़े और जीते

भोपालएक महीने पहले
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आलोक (ब्लैक शर्ट में) ने अस्पताल में भी लीडरशिप संभाली और जीत ली जंग। - Dainik Bhaskar
आलोक (ब्लैक शर्ट में) ने अस्पताल में भी लीडरशिप संभाली और जीत ली जंग।
  • 4 माह के अश्विक समेत परिवार के 8 लोग संक्रमित, 8 दिन में हराया

ये हैं मेरा परिवार। मैं पुणे के एक प्राइवेट बैंक में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट हूं। उम्र 38 साल है। लॉकडाउन के चलते में भोपाल आया था। हम सभी लोग पूरी सावधानी से ही रह रहे थे। लेकिन अचानक एक दिन मुझे काेरोना के कुछ लक्षण महसूस हुए। हालांकि मैं खुद इन लक्षणों को समझ नहीं पाया।

जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। थोड़ा घबराया, लेकिन हिम्मत जुटाई और परिवार के अन्य लोगों से भी कोरोना की जांच कराने को कहा। रिपोर्ट आई तो परिवार के सात लोग और पॉजिटिव आ गए। चिंता इसलिए भी बढ़ गई कि संक्रमितों में पिता और मेरा चार माह का बेटा अश्विक भी शामिल थे। खास बात यह रही कि हम सभी 8 सदस्य एक साथ अस्पताल में भर्ती हुए और 8 दिन में ही कोरोना को हरा दिया। अस्पताल में जब भर्ती हुए तो अन्य किसी मरीज की मौत होने पर अवसाद में चला जाता था। डर और भी बढ़ जाता।

हिम्मत इसलिए भी जवाब दे दे रही थी कि क्योंकि मेरा और पिताजी का ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा था। ऐसा लगता कि अब सांसें थमने वाली हैं। पिता की चिंता मन में घर कर रही थी। हम दोनों को ही अस्पताल में रेमडेसिविर का डोज भी लगा। जब कभी वेंटिलेटर पर किसी मरीज को देखता तो रुह कांप जाती। फिर अनायास अस्पताल में भर्ती मेरे 70 वर्षीय पिताजी एचके सिंह, मेरी पत्नी ऐश्वर्या सिंह, बहन ज्योति सिंह, जीजाजी सीपी सिंह, भांजी मुस्कान भांजा आयुष सिंह और अश्विक का चेहरा हर पल दिखाई देता। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ भी हमारा हौंसला बढ़ाते। फिर में खुद से ही संवाद करता। ऐसे ही एक दिन याद आया कि बैंक में मैं टीम लीडर की तरह काम करता हूं।

मुझे यहां भी लीडरशिप दिखानी है। ये वक्त हिम्मत का है। अगर मैं साहस खो दूंगा तो सब गड़बड़ हो जाएगा। ईश्वर का नाम लेते हुए मैंने खुद को संबल दिया। इच्छाशक्ति जुटाई। मैंने सबसे पहला काम सोशल मीडिया से दूरी बनाई। बढ़ती नकारात्मकता को खुद से दूर करने के साथ ही अस्पताल में दाखिल परिवार के सभी सदस्यों से बतियाता। वार्ड में अन्य मरीजों से संवाद करना शुरू किया। परिवार के सदस्यों को चुटकुले सुनाता। सबको हंसाता और बीमारी की मनो अवस्था से खुद को दूर ले जाने की कोशिश करता।

इसका फायदा यह रहा कि मेरे सहित परिवार के आठों सदस्य ने आठ दिन में कोरोना को हरा दिया और अस्पताल से हम सभी की छुट्टी हो गई। ये आठ दिन हमेशा मेरी स्मृति में रहेंगे। पूरा परिवार बीते सोमवार शाम को निशातपुरा रेलवे कॉलोनी स्थित अपने घर लौटा है। हम सभी लोग आइसोलेशन में हैं। मैं तो यही कहूंगा कि संक्रमण होने पर धैर्य रखें। तनाव से बचें। जीत आपकी होगी।

कोरोना वॉरियर्स आलोक सिंह

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