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कछुए की चाल चल रहा मेट्रो प्रोजेक्ट:नागपुर में 34 महीने में शुरू हो गया था मेट्रो का सफर, भोपाल में 27 महीने में बने आधे पिलर

भोपाल22 दिन पहलेलेखक: मनोज जोशी
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इस रफ्तार से काम चला तो 113 पिलर बनाने चाहिए 28 महीने। - Dainik Bhaskar
इस रफ्तार से काम चला तो 113 पिलर बनाने चाहिए 28 महीने।
  • नागपुर से तुलना, क्योंकि 2011 में दोनों शहरों में एक साथ मंजूर हुआ था प्रोजेक्ट
  • सीएम ने पिछले साल कहा था- नागपुर की तर्ज पर करेंगे काम
  • मेट्रो के काम के लिए बंद डीबी सिटी से नापतौल दफ्तर तक का ट्रैफिक कल से हो जाएगा शुरू

राजधानी में मेट्रो प्रोजेक्ट का काम कितना धीमा चल रहा है इसका अंदाजा नागपुर के उदाहरण से समझा जा सकता है। नागपुर में 34 महीने में 6 किमी के रूट पर मेट्रो का संचालन शुरू हो गया था, जबकि भोपाल में 27 महीने में इतने ही लंबे रूट पर केवल आधे पिलर बन पाए हैं।

नवम्बर 2011 में केंद्र सरकार ने जिन शहरों में मेट्रो के संचालन की अनुमति दी थी, उनमें नागपुर और भोपाल दोनों शामिल थे। पिछले साल अगस्त में मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नागपुर की तर्ज पर प्रोजेक्ट कंपलीट करने की बात कही थी।

भोपाल में यह हैं हालात
मेट्रो रूट के पिलर निर्माण के लिए गुरुदेव गुप्त तिराहे से नापतौल दफ्तर तक की सड़क पर 28 दिसंबर से बंद ट्रैफिक 8 फरवरी को सुबह शुरू हो जाएगा। 41 दिन की इस अवधि में यहां दो पिलर का काम कंपलीट हो पाया है। एम्स से सुभाष नगर तक के 6.22 किमी के मेट्रो रूट के सिविल वर्क का काम अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ था। इन 27 महीनों में इस रूट पर 112 पिलर बन पाए हैं, जबकि कुल 225 पिलर तैयार होना हैं।

28 महीने और लगेंगे
पिलर के निर्माण की गति देखें तो औसत एक महीने में 4 पिलर तैयार हुए हैं। इस हिसाब से शेष 113 पिलर पूरे करने के लिए 28 महीने का समय और चाहिए।

18 पिलर पर काम नहीं
मेट्रो के इस रूट पर 18 पिलर ऐसे हैं जिनका निर्माण अभी शुरू ही नहीं हुआ है। इनमें से 13 पिलर सुभाष नगर क्रॉसिंग के पास झुग्गीबस्ती की जमीन पर हैं। 3 पिलर एमपी नगर जोन-2 स्थित सज्जाद हुसैन पेट्रोल पंप और दो हबीबगंज क्रॉसिंग पर बनना है। इसकी डेढ़ साल से कवायद चल रही है।

यहां बिछा रहे गर्डर
सुभाष नगर और एम्स दोनों सिरों पर गर्डर बिछाने का काम जारी है। अब तक करीब 25 गर्डर बिछाए जा चुके हैं। जब तक पिलर पूरे नहीं बनेंगे तब तक गर्डर नहीं बिछेंगे तो आगे काम के बारे में विचार भी नहीं किया जा सकता।

बाकी कामों पर कोई चर्चा ही नहीं
इस सिविल वर्क के बाद यहां स्टेशन निर्माण करने, पटरी बिछाने जैसे तमाम काम बाकी हैं, लेकिन इन पर अब तक चर्चा ही नहीं हो रही है। अब कहा जा रहा है कि यह टेंडर अप्रैल में जारी होंगे। इधर, केंद्र सरकार ने मेट्रो रेल कंपनी के लिए राज्यों को पूर्णकालिक एमडी ही नियुक्त करने की शर्त रखी है, लेकिन मप्र में अब भी यूएडीडी के पीएस ही एमडी हैं।

24x7x365 दिन काम करना पड़ता है
मेट्रो प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए इच्छा शक्ति होना ज्यादा जरूरी है। पूरी टीम को ऑर्गनाइज्ड तरीके से 24x7x365 दिन काम करना पड़ता है। मुझे भोपाल के बारे में जानकारी नहीं है, पर नागपुर में हमने जून 2015 में करीब 6 किमी के रूट पर काम शुरू किया था और अप्रैल 2018 में इस पर मेट्रो संचालन शुरू हो गया था। -बृजेश दीक्षित, एमडी, महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन

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