तबादला नीति-2021:किसी भी कर्मचारी का तबादला एक साल में दो बार नहीं कर सकेंगे जिलों के प्रभारी मंत्री

भोपाल8 महीने पहलेलेखक: अनिल गुप्ता
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दो बड़े बदलावों के साथ 1 अप्रैल से हटेगी ट्रांसफर से रोक। - Dainik Bhaskar
दो बड़े बदलावों के साथ 1 अप्रैल से हटेगी ट्रांसफर से रोक।

प्रदेश में सरकारी तबादलों पर लगा प्रतिबंध एक अप्रैल से एक महीने के लिए हटने जा रहा है। ये तबादले नई तबादला नीति 2021 के तहत होंगे, जो तैयार हो चुकी है और अगले कुछ दिन में कैबिनेट के समक्ष आएगी। नीति में दो अहम बदलाव किए गए हैं। पहला- जिन अधिकारियों, शिक्षकों अथवा कर्मचारियों के ट्रांसफर मार्च 2020 से मार्च 2021 के बीच हुए हैं, जिले के प्रभारी मंत्री दोबारा उनके तबादले सीधे नहीं कर पाएंगे।

ऐसा प्रकरण सामने आने पर ट्रांसफर की फाइल मंजूरी करने के लिए सीएम कार्डिनेशन (मुख्यमंत्री समन्वय) तक जाएगी। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही उनका तबादला होगा। दूसरा- किसी क्लास वन ऑफिसर का तबादला यदि जानबूझकर किया जाता है तो वह उसकी शिकायत मुख्य सचिव से लेकर मुख्यमंत्री तक कर सकेगा।

यहीं उसका निराकरण होगा। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी। सोमवार को मुख्यमंत्री नई नीति पर चर्चा कर सकते हैं। पिछली कांग्रेस सरकार में 5 जून 2019 से 5 जुलाई 2019 तक तबादलों पर से प्रतिबंध हटाया गया था।

2015-16 में हुआ बड़ा निर्णय
तबादला नीति में सबसे बड़ा बदलाव पांच साल पहले 2015-16 में हुआ था। तब तत्कालीन स्कूल शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव एसआर मोहंती के समय तय हुआ था कि शिक्षा विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी अलग से जारी होगी, क्योंकि शिक्षा का कैडर करीब पांच लाख लोगों का होता है।

उदाहरण, तबादली नीति का नहीं हुआ पालन

  • 1980-81 में मुख्यमंत्री ने आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के डायरेक्टर को नोटशीट लिखी, जिसमें कहा गया कि सहायक सांख्यिकी अधिकारी का ट्रांसफर निरस्त किया जाए। उसी नोटशीट पर डायरेक्टर ने लिख दिया कि डायरेक्ट्रेट मुझे चलाना है। ट्रांसफर प्रशासनिक दृष्टि से किया गया है जो निरस्त नहीं होगा। उस दरम्यान सहायक सांख्यिकी अधिकारी का ट्रांसफर रुकवाने के लिए सांसद और मंत्रियों ने नोटशीट लिखी थी।
  • जून 1980 में योजना विभाग में सहायक अफसर रहे एक व्यक्ति का ट्रांसफर भोपाल से छिंदवाड़ा कर दिया। ट्रांसफर रुकवाने के लिए उन्होंने काफी प्रयास किए, लेकिन उस दरम्यान सहायक संचालक ने किसी की भी बात नहीं मानी और संबंधित अधिकारी को जहां ट्रांसफर हुआ का वहां ज्वाइनिंग करना पड़ी।
  • सागर से एक व्याख्याता का भोपाल निशातपुर हायर सैकंडरी स्कूल में तबादला हुआ। तबादला नीति के तहत 2019 में पहले तो उन्होंने खुद आवेदन दिया, बाद में उसे रुकवा लिया।

क्लास वन अफसर ट्रांसफर से नाखुश है तो कर सकेंगे शिकायत

मंत्रियों को जिलों का प्रभार जल्द
सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों को जिलों का प्रभार आठ माह से अटका हुआ है। संगठन से चर्चा कर सीएम बजट सत्र के बाद प्रभार बांट सकते हैं।
कोराेना के मरीजों को मिलेगी छूट
नई नीति में कोरोना से गंभीर बीमार हुए सरकारी कर्मी को तबादले से छूट मिल सकेगी। अभी यह छूट कैंसर, किडनी खराब, ओपर हार्ट सर्जरी आदि के चलते नियमित जांच कराने वाले कर्मियों को मिलती है।

शिक्षा विभाग नीति से बाहर होगा
नई नीति से शिक्षा विभाग बाहर रहेगा। इसके कुछ प्रावधानों के साथ स्कूल शिक्षा व उच्च शिक्षा विभाग अपनी अलग नीति जारी कर सकते हैं।
डिप्टी एसपी का ट्रांसफर बोर्ड करेगा
नीति में पुलिस व वन महकमे होंगे, पर डिप्टी एसपी से नीचे के तबादले पुलिस स्थापना बोर्ड तय करेगा और मंत्री के अनुमोदन से जारी होंगे। डिप्टी एसपी या उससे सीनियर अफसरों की फाइल मंत्री की मंजूरी के बाद सीएम तक जाएगी।

40 साल से बन रही नीति

ट्रांसफर के लिए एक माह प्रतिबंध हटाने की परंपरा 40 साल से चली आ रही है। जानकारी के अनुसार, पहली तबादला नीति 1980 में आई थी। इसके बाद से हर एक-दो साल के भीतर नीति बनती रही और तबादले हुए।

मुख्यमंत्री समन्वय से तबादले हो ही रहे हैं तो फिर नीति की क्या जरूरत?

एक्सपर्ट व्यू
केएस शर्मा, पूर्व मुख्य सचिव

सरकार प्रशासकीय आधार पर ट्रांसफर करती है। लेकिन जब स्थानीय नेताओं के दबाव में ट्रांसफर की संख्या जरूरत से ज्यादा हो जाए तो सरकार पर आरोप लगते हैं। मौजूदा समय में ट्रांसफर की संख्या बढ़ती जा रही है। जब मुख्यमंत्री समन्वय से सालभर तबादले हो रहे हैं तो नीति की क्या जरूरत? यदि फिर भी नीति आ रही है तो कोशिश रखनी चाहिए कि कम से कम ट्रांसफर हों।

पुरानी नीति के 6 प्रावधान शामिल

1. जिले में तृतीय, चतुर्थ श्रेणी के तबादले मंत्री के अनुमोदन के बाद कलेक्टर के आदेश से होंगे। 2. राज्य स्तर पर तबादले सामान्य प्रक्रिया के तहत होंगे। प्रथम व द्वितीय श्रेणी के तबादले अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव या विभागीय अध्यक्ष के स्तर से विभागीय मंत्री करेंगे। 3. तृतीय श्रेणी के इंटर डिस्ट्रिक्ट तबादले विभागाध्यक्ष के प्रस्ताव पर विभागीय मंत्री करेंगे। 4. राज्य प्रशासनिक सेवा की पदस्थापना जीएडी करेगा। जिले में डिप्टी कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर के ट्रांसफर के प्रस्ताव प्रभारी मंत्री से चर्चा के बाद कलेक्टर करेंगे। यही व्यवस्था तहसीलदार व नायाब तहसीलदार के लिए भी होगी। 5. किसी भी विभाग में 200 के कैडर तक 20%, 201 से 2000 तक 10% और 2001 से अधिक का कैडर है तो 5% तबादले होंगे। 6. अनूसूचित क्षेत्रों के रिक्त पदों को पहले भरा जाएगा।

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