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वो आखिरी शब्द:मां ने कहा था- बेटा अगले साल धूमधाम से मनाएंगे तुम्हारा जन्मदिन... अब बर्थडे तो हर साल आएगा, लेकिन मां नहीं होगी

भोपाल6 दिन पहलेलेखक: वंदना श्रोती
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जिंदगी भले ही रफ्तार पकड़ ले, लेकिन अपनों से की आखिरी बात ताउम्र याद रहेगी। - Dainik Bhaskar
जिंदगी भले ही रफ्तार पकड़ ले, लेकिन अपनों से की आखिरी बात ताउम्र याद रहेगी।

कोरोना ने अपनों को छीन लिया। अब उनकी याद रह रहकर आती है...और वो आखिरी शब्द जो मौत से ठीक पहले उन्होंने कहे थे, वो अब भी कानों में गूंज रहे हैं। जिंदगी भले ही रफ्तार पकड़ ले, लेकिन अपनों की कमी ताउम्र बनी रहेगी। हालांकि ये लोग जाते-जाते भी हौसले का नया आसमां अपनों को देकर गए हैं।

बधाई...देकर मां चली गईं

मेरी मां संध्या सक्सेना को 2 अप्रैल को वैक्सीन लगी थी। 5 अप्रैल से बुखार आना शुरू हुआ। पहले लगा कि वैक्सीन से बुखार आ रहा है। बाद में सांस लेने में तकलीफ हुई तो घर पर ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की। टेस्ट कराया तो वह निगेटिव आया। ऑक्सीजन लगी होने पर भी वे सांस नहीं ले पा रही थीं। डॉक्टर की सलाह पर 14 को हमीदिया में भर्ती कराया। वहां पता चला कि उन्हें कोरोना है। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा।

बाद में ऑक्सीजन लेवल ठीक हुआ तो वेंटिलेटर हटा दिया। उन्होंने वहां से अपना फोटो भेजा। कहा- बेहतर लग रहा है। 15 अप्रैल को मेरा जन्मदिन था। मैसेज भेज मुझे बधाई दी। फोन करके बोलीं- इस बार नहीं अगले साल जन्मदिन धूमधाम से मनाएंगे। थोड़ी देर में तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली। जब तक अस्पताल पहुंचे तो पता चला वे दुनिया से विदा हो गई। -जैसा कि बेटे ईशान ने बताया

मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ कर देना

मेरी पत्नी मधु इंस्टीट्यूट फॉर एक्सीलेंस इन हायर एजुकेशन में हिंदी विभाग की प्रोफेसर थीं। उन्हें 10 जून 2020 को हमीदिया अस्पताल में भर्ती किया गया। फोन पर बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यहां का माहौल अच्छा नहीं है। मुझे यहां से ले चलो। मैंने कहा, तुम जल्दी ठीक हो जाओगी, चिंता मत करो। उन्होंने सभी से माफी मांगते हुए कहा- मुझसे कोई भी गलती हुई हो तो मुझे माफ करना।

मुझे लगा कि वह बीमारी के तनाव के कारण ऐसा कह रही है। लेकिन शायद उन्हें अहसास हो गया था कि वो मुझसे आखिरी बार बातचीत कर रही हैं। रात को उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। 19 जून 2020 को उनकी मौत हो गई। मुझे तो ऐसा दर्द मिला है, जिसे कोई दवा ठीक नहीं कर सकती।
-जैसा कि मधु के पति जैनेंद्र जैन ने बताया।

मेरा शरीर छूट रहा है, मुझे जाने दो

पहले मेरे पिता कमल पंजाबी और दादी को कोरोना हो गया था। उसके बाद मां सुनीता पंजाबी को कोरोना हुआ। तीनों की मौत हो गई। मां की मौत 1 मई को हुई। मेरे पिता की ज्यादा तबीयत खराब हो गई थी। आईसीयू में भर्ती करने के बाद वे तो वे बात ही नहीं कर पाए। मेरी मां को 5 घंटे पहले मौत का अहसास हो गया था। उन्होंने अपनी गुरु मां को फोन कर आधा घंटे बात की। पापा के बेहोश होने से वे उनसे बात नहीं कर पाई। इसके बाद वे लगातार पांच घंटे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करके परिवार वालों से बात करती रहीं। आखिरी में उन्होंने कहा कि अब वे ओर नहीं जी सकेंगी। मैं जा रही हूं। इसके बाद मां शांत हो गई। बाद में पिता का भी देहांत हो गया।
-जैसा कि बेटी अशिता पंजाबी ने बताया।

मुस्कुराते बोले- बुलावा आ गया

मेरे पिता रामबाबू गुप्ता की मौत 4 मई 2020 को कोरोना के कारण हुई थी। उन्हें 23 अप्रैल को कोरोना हुआ था। उन्हें हमीदिया ले जा रहे थे तो उन्होंने जाते हुए घर को बहुत अच्छे से देखा। घर को प्रणाम भी किया। घर से निकलते वक्त उन्होंने मां से कहा- ईश्वर के यहां से बुलावा आ गया है। मां ने उन्हें कहा, बेवजह की बातें मत करो। मैंने भी पिता को कहा, आप जल्दी ठीक हो जाएंगे। वे हल्के से मुस्कुराए। अस्पताल में उनकी स्थिति 29 अप्रैल को बिगड़ना शुरू हुई। वे वेंटिलेटर पर गए तो लौट कर नहीं आए। उनको अहसास हो गया था कि आखिरी वक्त आ गया है।
-जैसा कि बेटे राहुल गुप्ता ने बताया।