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20 साल की मालविका ने साइना को हराया:मां ने बेटी की ट्रेनिंग के लिए डॉक्टरी पेशा दांव पर लगाया, रोज 9 घंटे तक कोर्ट में साथ

भोपाल11 दिन पहलेलेखक: शेखर झा
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नेहवाल को हराने वाली दूसरी भारतीय शटलर बनीं मालविका, इससे पहले सिंधु ने हराया था। - Dainik Bhaskar
नेहवाल को हराने वाली दूसरी भारतीय शटलर बनीं मालविका, इससे पहले सिंधु ने हराया था।

नागपुर की 20 साल की मालविका बंसोड़ ने इंडिया ओपन के प्री-क्वार्टर फाइनल में भारतीय बैडमिंटन की सबसे बड़ी खिलाड़ी और ओलंपिक मेडलिस्ट साइना नेहवाल (31) को लगातार गेम में 34 मिनट में हराकर रिकॉर्ड बनाया है। जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि साइना के 2010 कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने के बाद मालविका दूसरी भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने उनकाे हराया है। इससे पहले 2017 में पीवी सिंधु ने साइना को मात दी थी। इस रिकॉर्ड के पीछे मालविका की मेहनत के साथ उनकी मां डॉ. तृप्ति बंसोड़ के त्याग और कोच संजय मिश्रा की ट्रेनिंग का सबसे बड़ा योगदान है।

डेंटिस्ट डॉ. तृप्ति ने बेटी की ट्रेनिंग के लिए न केवल घर छोड़ा बल्कि पेशे को भी दांव पर लगा दिया। मालविका रायपुर के पुलिस लाइन में भारतीय जूनियर बैडमिंटन टीम के चीफ कोच संजय मिश्रा के पास ट्रेनिंग करती हैं। बेटी की प्रैक्टिस के दौरान तृप्ति रोज 6 से 9 घंटे तक बैडमिंटन हॉल में बैठी रहती हैं।

तृप्ति ने डेंटिस्ट (बीडीएस) की पढ़ाई करने के बाद स्पोर्ट्स साइंस में मार्स्ट्स की, ताकि बेटी की खेल में मदद कर सकें। मालविका के पिता डॉ. प्रबोध बंसोड़ भी नागपुर में डेंटिस्ट हैं। तृप्ति बताती हैं कि जूनियर कैटेगरी में मालविका ने कई इंटरनेशनल टूर किए। इस दौरान संजय मिश्रा मालविका के कोच थे। 2018 में सीनियर होने के बाद मालविका उनसे कोचिंग नहीं ले पाती, क्योंकि संजय जूनियर टीम के चीफ कोच हैं।

बकौल तृप्ति, बेटी की ट्रेनिंग के लिए मैं 2016 में उसके साथ रायपुर शिफ्ट हो गई। मालविका ने 2011 से बैडमिंटन खेलना शुरू किया। रायपुर शिफ्ट होने के बाद मेरी डॉक्टरी की प्रैक्टिस सीमित हो गई। जब नागपुर जाती हूं तो पेशेंट आते हैं। अब मेरी प्रैक्टिस सेलेक्टिव हो गई है। अगर मेरे इस त्याग से मालविका देश को मेडल दिला पाती है तो मेरे लिए इससे बड़ा और कुछ नहीं होगा।

संजय सर भी बहुत शिद्दत से ट्रेनिंग देते हैं। जब तक उसका शॉट नहीं सुधर जाता, वह प्रैक्टिस करती है। अब वे मालविका के पावर और स्पीड पर काम कर रहे हैं। मैं रोज उसके साथ 6 से 9 घंटे बैडमिंटन हॉल में रहती हूं। क्वार्टर फाइनल में मुकाबला आकर्षी कश्यप से होगा।

मालविका स्टार प्लेयर के सामने होने का प्रेशर लेकर कोर्ट पर नहीं उतरीं

कोच संजय मिश्रा ने बताया, साइना के सामने होने से इस मैच के पहले मालविका भी प्रेशर में थीं। मैंने उससे सिर्फ इतना कहा था कि प्रेशर लेकर कोर्ट पर मत जाना। मालविका इसी स्ट्रेटजी पर चली और अच्छी रणनीति के साथ खेला। मालविका ने लंबी-लंबी रैली रखी, शटल कोर्ट पर रखा और निगेटिव पॉइंट से बचती रही। यही वजह है कि साइना को हरा सकी। यह बड़ी उपलब्धि है।

मैंने साइना नेहवाल को देखकर ही बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। वे मेरी आदर्श हैं। - मालविका बंसोड़

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