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धरोहर की दुर्दशा:मोतिया तालाब का पानी हुआ जहरीला...केमिकल ऑक्सीजन की मात्रा तय मानक से 800%ज्यादा

भोपाल8 दिन पहले
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भारत की सबसे बड़ी इबादतगाह ताजुल मसाजिद के पास स्थित ऐतिहासिक मोतिया तालाब का पानी अब लगभग जहरीला हो चुका है। - Dainik Bhaskar
भारत की सबसे बड़ी इबादतगाह ताजुल मसाजिद के पास स्थित ऐतिहासिक मोतिया तालाब का पानी अब लगभग जहरीला हो चुका है।
  • 120 साल पहले नमाजियों के वुजू के लिए बनाया गया था यह तालाब

भारत की सबसे बड़ी इबादतगाह ताजुल मसाजिद के पास स्थित ऐतिहासिक मोतिया तालाब का पानी अब लगभग जहरीला हो चुका है। करीब 120 साल पहले नमाजियों के लिए वुजू के लिए मोतिया तालाब का निर्माण कराया गया था।

इस तालाब में अनट्रीटेड सीवेज सीधे छोड़े जाने के कारण तालाब में औसत केमिकल ऑक्सीजन डिमांड स्वीकार्य मात्रा से 800 फीसदी ज्यादा पहुंच गई है। जबकि बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड लगभग 5 गुना अधिक है। तालाब में इतना अधिक सीवेज और सॉलिड वेस्ट डाला जा रहा है कि पानी में टोटल सस्पेंडेड सॉलिड (टीएसएस) 50 गुना अधिक है। एनजीटी ने मोतिया तालाब की बदहाली को लेकर शहरवासी उज्जवल शर्मा की ओर से दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए नगरीय प्रशासन विभाग और भोपाल नगर निगम से जवाब तलब किया है। 1901 के करीब नबाव शाहजहां बेगम ने इसका निर्माण कराया था।

तालाब की बदहाली को लेकर शहर के उज्जवल शर्मा ने लगाई थी एनजीटी में याचिका

तालाब में प्रदूषण की जांच के लिए एप्को की चीफ साइंटिस्ट विनीता विपट और एम्प्री के सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. जयप्रकाश शुक्ला की अगुआई में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी में दो सदस्य राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से होंगे। एनजीटी ने डेढ़ महीने में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता उज्जल शर्मा ने एनएबीएल से मान्यता प्राप्त एक प्राइवेट लैब सीईएस एनालिटिकल एंड रिसर्च सर्विस द्वारा तालाब के पानी की जांच कराई गई थी।