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MP में स्कूल खोलने का विरोध:भोपाल में बड़ी संख्या में पेरेंट्स स्कूल पहुंचे; पालक संघ आज कोर्ट में याचिका लगाएगा, मंत्री ने साधी चुप्पी

भोपाल2 महीने पहले
भोपाल के काॅर्मल काॅन्वेंट स्कूल भेल में पेरेंट्स ऑनलाइन क्लास को जारी रखने की मांग को लेकर पहुंचे।

मध्यप्रदेश में स्कूल खोले जाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है। भोपाल के काॅर्मल काॅन्वेंट स्कूल ने एक सप्ताह पहले ही ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन क्लास में बच्चों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी। इसके विरोध में बड़ी संख्या में गुरुवार सुबह पेरेंट्स स्कूल पहुंच गए। पेरेंट्स ने स्कूल प्रिंसिपल से भी मुलाकात की। स्कूल प्रबंधन ने पेरेंट्स से दो दिन का समय मांगा है।

इसके बाद सभी पेरेंट्स ने स्कूल प्रबंधन को उनके साइन किए एक-एक फॉर्म स्कूल को सौंपे हैं। इसी तरह से प्रदेश के अन्य शहरों से भी विरोध के सुर निकलने लगे हैं। इधर, जाग्रत पालक संघ मध्यप्रदेश भी आज इस मामले में हाई कोर्ट जबलपुर में एक याचिका लगाने जा रहा है। वहीं, इस मामले में अब स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने चुप्पी साध ली है।

कैमरे पर खुलकर नहीं बोले पेरेंट्स
भोपाल के भेल काॅर्मल काॅन्वेंट स्कूल में गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में केजी से लेकर 5वीं क्लास तक के बच्चों के पेरेंट्स पहुंचे। उन्होंने एक फॉर्म पहले से तैयार कर रखा था। स्कूल में आने वाले पेरेंट्स ने अलग-अलग फाॅर्म भरकर ऑनलाइन क्लास को अनिवार्य रूप से जारी रखने के अनुरोध किया। प्रिंसिपल ने पेरेंट्स से इस पर निर्णय लेने के लिए दो दिन का समय मांगा है। इसका मतलब अबइ स पर सोमवार तक कोई निर्णय आ सकता है।

जाग्रत पालक संघ आज याचिका लगाएगा
संघ के अध्यक्ष और एडवोकेट चंचल गुप्ता ने बताया कि संघ आज शासन के स्कूल खोलने के निर्देश स्पष्ट नहीं होने के कारण आज एक याचिका लगाएगा। उन्होंने बताया कि स्कूल फीस को लेकर पहले से ही मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। अब उस पर निर्णय शेष रह गया है। ऐसे में सरकार ने स्कूल फीस और स्कूल खोलने को लेकर अस्पष्ट निर्देश दिए हैं। हम उनके इन निर्देश के खिलाफ कोर्ट जा रहे हैं। एक तरफ से सरकार ने पेरेंट्स की अनुमति जरूरी रखी है, तो दूसरी तरफ स्कूल को फीस और खोलने को लेकर सभी अधिकार दे दिए हैं। इससे पेरेंट्स की अनुमति के कोई मायने नहीं रह जाते हैं।

इन पर पेरेंट्स विरोध कर रहे

  • शासन ने पेरेंट्स की अनुमति को जरूरी रखा है, लेकिन क्लास लगाने के सभी स्कूलों को दे दिए।
  • शासन ने ऑनलाइन क्लास को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं।
  • स्कूल नहीं आने वाले बच्चों को कोई विकल्प नहीं है।
  • स्कूलों द्वारा ऑफलाइन क्लास अनिवार्य कर दिया गया है।
  • बच्चों के संक्रमित होने पर किसी की जिम्मेदारी तय नहीं है। स्कूल ने पेरेंट्स को यह मैसेज भेजे। इसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लास अटेंट करना अनिवार्य किया है।
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