एक ही सवाल.. यादव ने क्यों छोड़ा मैदान:कांग्रेस की इंटरनल पॉलिटिक्स में उलझे अरुण, BJP डालने लगी डोरे; पूर्व सांसद के अगले कदम का इंतजार

मध्य प्रदेश10 महीने पहले

24 घंटे पहले तक खंडवा लोकसभा सीट के प्रबल दावेदार माने जा रहे अरुण यादव ने दावेदारी छोड़कर सबको चौंका दिया है। वे पार्टी के लिए काम करते रहने की बात कह रहे हैं। कांग्रेस की अब उनके हर कदम पर नजर है। सभी देखना चाहते हैं कि अरुण यादव कौन सा फैसला लेने जा रहे हैं। दो-तीन दिन में ऐसा क्या हुआ कि दिग्विजय सिंह जिन्हें शुभकामनाएं दे रहे थे, उन्होंने दिल्ली दौरे के बाद अचानक मैदान छोड़ दिया। इधर, रतलाम में पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया ने कह दिया कि किसी दूसरे को टिकट मिलेगा।

हालांकि, अरुण के बयानों से ऐसी बात सामने नहीं आई है कि वे भाजपा से संपर्क में हैं या कांग्रेस हाईकमान से नाराज हैं, लेकिन BJP ने उन्हें रिझाना शुरू कर दिया है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने तो यहां तक कह दिया कि उनको लगता है कि देश सेवा कर सकते हैं तो ऐसे सभी लोगों का स्वागत है।

चुनावी नेटवर्क तैयार कर चुके हैं यादव
पिछले दो माह से क्षेत्र में काम करने और पूरा चुनावी नेटवर्क तैयार करने के बाद ऐसा क्या हुआ कि अरुण यादव ने प्रत्याशी बनाए जाने से पहले मैदान छोड़ दिया। उन्होंने इसकी जो वजह बताई कि वह किसी के गले नहीं उतर रही। उन्होंने दिल्ली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद रविवार देर शाम सोशल मीडिया पर इसका पारिवारिक कारण बताया था।

ट्वीट चर्चा में रहे
सोनिया को चिट्ठी लिखने से पहले अरुण यादव के ट्वीट की चर्चा हो रही है। ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि मेरे दुश्मन भी मेरे मुरीद हैं शायद, वक्त-बेवक्त मेरा नाम लिया करते हैं। मेरी गली से गुजरते हैं छुपा के खंजर, रुबरू होने पर सलाम किया करते हैं। इसके बाद से कयास लग रहे हैं कि यादव के फैसले में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति की भूमिका हो सकती है।

कमलनाथ से सियासी रिश्ते ठीक नहीं
राजनीतिक गलियारे में यह भी सब जानते हैं कि अरुण यादव के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से सियासी रिश्तें ठीक नहीं चल रहे थे। इसकी शुरुआत इसी साल फरवरी में गोडसे समर्थक बाबूलाल चौरसिया को कांग्रेस में शामिल हुए थे। तब यादव ने सार्वजनिक तौर पर कमलनाथ के खिलाफ बयानबाजी की थी। उस समय कमलनाथ ने प्रतिक्रिया नहीं दी थी, लेकिन जब खंडवा उपचुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने के भरोसे जब यादव प्रचार में लग गए थे, तब कमलनाथ ने कहा था- उन्होंने इस बारे में मुझसे बात नहीं की है। फिलहाल यह तय नहीं है कि कौन चुनाव लड़ेगा। उम्मीदवार के लिए सर्वे कराया जाएगा, जो सबसे ऊपर रहेगा, उसे टिकट मिलेगा।

एक भी बैठक में शामिल नहीं हुए अरुण
इसके बाद से यादव उपचुनाव काे लेकर बुलाई गई किसी भी बैठक में शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने कमलनाथ से दो बार मुलाकात की। दोनों नेताओं की 6 अगस्त को दिल्ली में मुलाकात हुई थी। इसी दिन वे दिग्विजय सिंह और विवेक तन्खा से मिले थे। इसके बाद 30 सितंबर को दिल्ली में ही यादव ने कमलनाथ से मुलाकात की थी। इस दौरान प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक भी मौजूद रहे।

सर्वे रिपोर्ट आने के बाद तल्खी बढ़ी
पार्टी सूत्रों का दावा है कि बैठक में यादव के सामने कमलनाथ ने सर्वे रिपोर्ट का खुलासा किया था। यादव ने कमलनाथ से तल्खी भरे लहजे में बात की थी। बैठक के बाद ही यादव का पहला बयान सोशल मीडिया पर आया था- मैंने कमलनाथ से आग्रह किया है कि पार्टी किसी समर्पित कार्यकर्ता को प्रत्याशी बनाना चाहे, तो मैं उसकी मदद करूंगा। मैं शीघ्र ही राहुल गांधी से मुलाकात कर उनके समक्ष राजनीतिक परिस्थितियों को रखूंगा।

अरुण यादव नहीं तो कौन?
प्रदेश की राजनीति को करीब से जानने वाले कहते हैं कि अरुण यादव भले ही राहुल गांधी के करीबी नेताओं में से एक माने जाते हैं, लेकिन कमलनाथ का कद पार्टी में बहुत बढ़ा है। उनके किसी भी फैसले को बदलना राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए आसान नहीं होता है। ऐसे में यादव का बैकफुट पर आना स्वभाविक है, लेकिन सवाल यह है कि खंडवा से यादव की जगह कौन? वजह यह है कि क्षेत्रीय नेताओं में उनके अलावा कोई बड़ा चेहरा नहीं है, जो बीजेपी से इस सीट को छीन सके।

देश की सेवा के लिए पार्टी में स्वागत है- BJP
दूसरी ओर अरुण यादव पर बीजेपी की ओर से डोरे डालने की भी चर्चा है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा- हमारे विचार, नीति सिद्धांत से कोई सहमत होकर बीजेपी में आते हैं। उनको लगता है कि देश सेवा कर सकते हैं, तो ऐसे सभी लोगों का स्वागत है। हालांकि तीन दिन पहले बीजेपी उपचुनाव प्रबंधन कमेटी के प्रभारी व नगरीय विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा था कि अरुण यादव की बीजेपी को जरूरत नहीं है। हालांकि, करीब दो महीने पहले भी अरुण यादव के बीजेपी में शामिल होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। तब उन्होंने खुद ही ट्वीट कर इससे इनकार किया था।

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