मास्टर प्लान:कृषि भूमि के अधिग्रहण की नहीं मिली मंजूरी; बीडीए की मिसरोद फेज-3 योजना को किया कैंसिल

भोपाल2 महीने पहले
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आखिरकार बीडीए की मिसरोद फेज -3 योजना को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) ने निरस्त कर दिया। सात महीने पहले बीडीए को स्कीम में इस तरह बदलाव करने को कहा गया था कि मास्टर प्लान में प्रस्तावित 60 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण हो सके। बीडीए ने इसके लिए मास्टर प्लान-2031 के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर 78.318 हेक्टेयर कृषि भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेज दिया। अभी यह मास्टर प्लान मंजूरी की प्रक्रिया में है, इसलिए यह प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ। बीडीए ने मिसरोद और सलैया की 187.836 हेक्टेयर (464.15 एकड़) जमीन पर मिसरोद चरण-3 योजना तैयार की थी।

उसमें से 161.61 हेक्टेयर (399.347 एकड़) जमीन पर टीएंडसीपी पहले ही डेवलपमेंट परमिशन जारी कर चुका था। यानी यहां बीडीए को डेवलपमेंट के लिए 26.226 हेक्टेयर (64.805 एकड़) जमीन ही मिल रही थी। इस आधार पर अप्रैल में शासन ने बीडीए को योजना में बदलाव करने को कहा था। होशंगाबाद रोड के समानांतर 60 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए बीडीए ने 78.318 हेक्टेयर कृषि भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा। टीएंडसीपी ने बीडीए को भेजे पत्र में प्रस्तावित बदलाव को नामंजूर करते हुए योजना निरस्त करने का पत्र भेज दिया है।

बीडीए चाहे तो योजना को मौजूदा मास्टर प्लान के प्रावधानों के अनुसार दोबारा बना सकता है, लेकिन यह आसान नहीं है, क्योंकि योजना तैयार करने के समय से ही मिसरोद के किसान और जमीन मालिक विरोध कर रहे थे। पीएमओ तक शिकायत की थी। बीडीए के सीईओ बुद्धेश वैद्य ने कहा कि 60 मीटर चौड़ी मास्टर प्लान रोड के निर्माण के लिए फिर स्कीम बनाने पर विचार होगा।

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