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गोबर के गमले:पौध लगाने के बाद खाद डालने की जरूरत नहीं, हर साल सवा लाख पॉलिथीन का इस्तेमाल बचेगा

भोपाल2 महीने पहले
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सिर्फ लेबर चार्ज में बन रहे गमले - Dainik Bhaskar
सिर्फ लेबर चार्ज में बन रहे गमले
  • निगम की नर्सरी में रोपण के लिए तैयार होने वाली पौध अब गोबर के गमले में हो रही तैयार

नगर निगम की नर्सरी में रोपण के लिए तैयार की जाने वाली पौध अब गोबर के गमले में तैयार हो रही है। गोबर के यह गमले पौधे के लिए खाद के रूप में उपयोग में आ रहे हैं, यानी पौधा रोपते समय आपको इस गमले को फेंकने की जरूरत नहीं होगी। गमले के साथ ही पौधे को रोपा जा सकेगा।

नगर निगम ने पिछले साल प्रयोग के तौर पर गोबर के गमले बनाए थे। इस साल इस प्रयोग को कुछ और बढ़ाया गया है। गौ शालाओं में गोबर के गमले बनाने की मशीनें लगाईं गईं हैं। तीन मशीनों से अभी एक दिन में 600 गमले बन रहे हैं। महीने भर में यह संख्या 18 हजार हो जाएगी।

अभी पौधे रोपते हैं और पॉलिथीन छोड़ जाते हैं

नगर निगम अभी पौधों के लिए काली पॉलिथीन का उपयोग करता है। जिस भी क्षेत्र में पौधरोपण होता है वहां काली पॉलिथीन का ढेर लग जाता है। एक पॉलिथीन की कीमत 15 से 20 पैसे होती है, जबकि गमला 5 रुपए से 15 रुपए का होगा। लेकिन, इस गमले का उपयोग खाद के लिए हो सकेगा और पौधरोपण के बाद अलग से खाद नहीं डालना होगी, इसलिए इसे लागत बढ़ना नहीं माना जा सकता।

गोबर में पानी मिलाने के बाद दिया जाता है लड्‌डू का आकार

भोपाल के वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र कुमार सक्सेना ने केरवा डैम रोड स्थित शारदा विहार की गौशाला और एक अन्य गौशाला में गोबर के गमले बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि गोबर में इतना पानी मिलाया जाता है कि उसे लड्‌डू का आकार दिया जा सके। फिर उसे मशीन में डालकर हाथ से घुमाया जाता है। मशीन में सांचा लगा हुआ है। पूरा घूमने पर गमला बनकर निकल आता है।

सिर्फ लेबर चार्ज में बन रहे गमले- यदि केवल पौध के लिए गमला बनाना है तो उसे जूट और एडेसिव की जरूरत नहीं है। साधारण रूप से गौशाला में ही उपलब्ध गोबर से गमला बनाया जा सकता है। एक लैबर को प्रशिक्षण देकर गमले बनाए जा सकते हैं।

पौधों के लिए निगम को हर साल लगती है सवा लाख पॉलिथीन

निगम हर साल नर्सरी में पौधे तैयार करने में सवा लाख पॉलिथीन का उपयोग करता है। हर साल बारिश में निगम 15 से 20 हजार पौधे रोपता है। इनके लिए गोबर के गमले के उपयोग की इस साल शुरुआत हो रही है।

चरणबद्ध तरीके से बंद कर देंगे पॉलिथीन का उपयोग

गोबर के गमले का प्रयोग सफल हो गया है। गौशालाओं में गमलों का निर्माण शुरू करा दिया है। कुछ और विकल्पों पर विचार चल रहा है, ताकि ऑर्नामेंटल पौधों के लिए भी पॉलिथीन का उपयोग नहीं करना पड़े। हम चरणबद्ध तरीके से पौध तैयार करने के लिए पॉलिथीन का उपयोग बंद कर देंगे।

-एमपी सिंह, अपर आयुक्त, नगर निगम

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