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28 सीटों पर महाभारत:शिवराज बनाम कमलनाथ में ही अब सीधा मुकाबला; दोनों के इर्द-गिर्द सिमटा उपचुनाव, इसलिए हमले तेज

भोपाल8 महीने पहले
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कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान। दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले तेज किए। - Dainik Bhaskar
कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान। दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले तेज किए।
  • सिंधिया ग्वालियर-चंबल में तो दिग्विजय पर्दे के पीछे से मैदान में
  • कांग्रेस सिंधिया को भी आरोपों के घेरे में ले रही है, क्योंकि ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर ज्योतिरादित्य का प्रभाव
  • कैलाश- सिंधिया मोदी की ट्रेन में बैठे तो चुन्नू-मुन्नू की दुकान बंद हो गई

28 सीटों का उपचुनाव अब सीधे तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमनलाथ के बीच केंद्रित हो गया है। दोनों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले तेज कर दिए हैं। हालांकि कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी आरोपों के घेरे में ले रही है, क्योंकि ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर ज्योतिरादित्य का प्रभाव है। दूसरी ओर, वरिष्ठ कांग्रेसी दिग्विजय सिंह चुनावी सभाओं से दूर हैं और पर्दे के पीछे से संगठनात्मक रणनीति में लगे हैं, इसलिए भाजपा ने सामने मौजूद एकमात्र विपक्षी कमलनाथ को निशाने पर लिया है।

स्टार प्रचारक : लिस्ट में सिंधिया 10वें, वीडी पहले, शिवराज दूसरे नंबर पर

भाजपा ने बुधवार को अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी। इसमें सिंधिया को 10वें नंबर पर रखा है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा पहले और शिवराज दूसरे नंबर पर रखे गए हैं। हालांकि शिवराज ही चुनाव में मुख्य चेहरा होंगे। पांच दलितों व दो आदिवासियों को भी रखा गया है। कांग्रेस ने सिंधिया पर तंज कसते हुए कहा कि जब वे कांग्रेस में थे, तब चुनाव अभियान समिति के प्रमुख रहते थे। जवाब में भाजपा ने कहा कि सूची पद और वरिष्ठता के हिसाब से है।

रथ के पोस्टर में भी सिंधिया नहीं
एक दिन पहले भाजपा दफ्तर से वीडियो रथ भी रवाना किए थे, इसमें सिंधिया का पोस्टर नहीं था। पार्टी का तर्क है कि यह सब रीति-नीति के तहत है। बताया जा रहा है कि सिंधिया दो दिन दिल्ली में रहने के बाद 18 से फिर सक्रिय होंगे। वे 25 वर्चुअल और 50 सीधी सभाएं कर चुके हैं। शिवराज सभी 28 सीटों पर जा चुके हैं, सिंधिया 24 सीटों पर गए हैं।

ब्यावरा, बड़ा मलेहरा, नेपानगर और मांधाता के कार्यक्रम अब बनेंगे। रथ में भाजपा ने ‘शिवराज है तो विश्वास है’ नारा दिया और सोशल मीडिया पर ‘मैं भी शिवराज’ को ट्रेंड कराया। शिवराज के साथ भाजपा ने मुद्दों को एहतियात के साथ ही आगे बढ़ाया है। नई रणनीति में कर्जमाफी की तरफ न जाकर भाजपा कह रही है कि उन्होंने किसान के खाते में ही 10-10 हजार रुपए पहुंचा दिए। शिवराज इसी रणनीति में मजबूत बहुमत के लिए जरूरी सीटें हासिल कर करने की बात कर रहे हैं। संसदीय व प्रभाव क्षेत्र होने की वजह से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और गृह क्षेत्र होने की वजह से वीडी शर्मा भी सक्रिय हैं। संगठन स्तर से सुहास भगत और हितानंद शर्मा डैमेज कंट्रोल में लगे हैं। दिल्ली में चुनाव की रिपोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ले रहे हैं। चुनावी रथ भी केंद्र की ओर से ही भेजे गए।

इसलिए शिवराज को ही कमान
ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस ने सिंधिया को गद्दार के रूप में पेश किया है। संघ-भाजपा के पुराने नेता शिवराज के नेतृत्व पर सहमत हैं, लेकिन सिंधिया पर असहमत। भाजपा भी मान रही है कि जनता में शिवराज की स्वीकार्यता है। लिहाजा वह अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।

रणनीति : नाथ चुनाव प्रबंधन देख रहे, तो दिग्विजय का फोकस सिंधिया पर

कांग्रेस एकमात्र चेहरे कमलनाथ के साथ और नेतृत्व में चुनाव में आगे बढ़ गई है। नाथ ने इस बार नए नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। दिग्विजय को पर्दे के पीछे रखा गया है। पार्टी की अंदरूनी रणनीति है कि कमलनाथ चुनाव में शिवराज के साथ सिंधिया को निशाने पर लेंगे, लेकिन दिग्विजय का पूरा फोकस सिंधिया और उनकी टीम पर रहेगा। दिग्विजय ही पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बनाएंगे। नाराज नेताओं से बात करेंगे।

कमलनाथ प्रत्याशियों के समर्थन में जनसभाएं लेंगे। दिग्विजय समूह बैठक के साथ घर-घर जाएंगे। खास सीटों का प्रबंधन कमलनाथ के खास सिपहसालार ही देखेंगे। उन्होंनेे कोर टीम भी बनाई है, जो प्रतिदिन के कैंपेन और फीडबैक के साथ अन्य मुद्दों पर फोकस्ड काम कर रही है। यह इंदौर और ग्वालियर से काम कर रही है। चुनावी सभाओं में लोगों की संख्या को देखते हुए कांग्रेस में यह माना जा रहा है कि कार्यकर्ताओं ने बतौर नेता कमलनाथ को स्वीकार कर लिया है।

सज्जन, गोविंद, पटवारी को जिम्मेदारी
कांग्रेस में नए नेता के तौर पर सज्जन सिंह वर्मा, एनपी प्रजापति, गोविंद सिंह और जीतू पटवारी को कमलनाथ ने अहम जिम्मेदारी दी है। इनसे दिग्विजय की कमी भरने की कोशिश है। कमलनाथ को भी लग रहा है कि यदि सही दिशा में थोड़ी मेहनत हो गई तो कांग्रेस आश्चर्यजनक परिणाम तक पहुंच जाएगी। इन नेताओं का फोकस प्रमुख सीटों पर है। बाकी पूर्व मंत्रियों की भी टीम बनाकर उन्हें सक्रिय किया गया है।

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