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एम्प्री का प्रयोग सफल:अब स्मार्ट सिटी कंपनी बनाएगी ‘राख’ से सड़कें, कांक्रीट रोड की तुलना में ये ज्यादा टिकाऊ, लागत भी 5 गुना कम

भोपाल18 दिन पहलेलेखक: भीम सिंह मीणा
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एम्स में तीन साल पहले फ्लाई ऐश से बनी शहर की इकलौती सड़क। - Dainik Bhaskar
एम्स में तीन साल पहले फ्लाई ऐश से बनी शहर की इकलौती सड़क।

एम्स में बनी सड़क की हर कोई तारीफ करता है। यह सीमेंट से नहीं, बल्कि फ्लाई ऐश से बनाई गई है। यह फ्लाई ऐश है, कोल थर्मल पॉवर प्लांट से हर माह 200 मिलियन टन निकलती है। सरकार इसके प्रबंधन को लेकर परेशान हैं। इसका हल ढूंढते हुए एडवांस्ड मेटेरियल्स एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एम्प्री) ने फ्लाई ऐश को सीमेंट के विकल्प के रूप में तलाशा था।

करीब दस साल तक इस पर रिसर्च भी किया। इसके बाद पहली सड़क तीन साल पहले एम्स में बनाई। दरअसल फ्लाई ऐश किसी भी कंस्ट्रक्शन वर्क में इस्तेमाल हाेने वाली पानी की खपत काे भी कम करती है। एम्प्री के सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. मनीष मुद्गल ने बताया कि यह रिसर्च पानी बचाने, कार्बन डाई ऑक्साइड के पर्यावरण में रिलीज होने से रोकने में मददगार है। हम अपनी तरफ से पत्राचार कर रहे हैं कि शासन का कोई भी विभाग इस काम को हाथ में ले। हमारे वैज्ञानिक तकनीकी सलाह देंगे। स्मार्ट सिटी भोपाल ने भी एम्प्री से इस तरह की सड़क बनाने पर चर्चा की है।

यह सड़क 3 दिन में मजबूत हो जाती है, कांक्रीट की सड़क में लगते हैं 21 दिन

  • फ्लाई ऐश- एक किमी लंबी और 3.75 मीटर चौड़ी सड़क ... यदि फ्लाई ऐश से बनाते हैं तो 20 से 30 लाख रुपए खर्च आएगा। इसमें सीमेंट का केवल ट्रांसपोर्टेशन करना है और तराई में पानी का खर्च कम होगा।
  • डामर- इतनी बड़ी डामर रोड बनाने में 60 से 70 लाख खर्च आएगा।
  • सीमेंट- इतनी ही बड़ी सीसी रोड बनाने में 1.40 करोड़ खर्च आएगा।

ऐसे है फायदेमंद

फ्लाई ऐश में शामिल कम्पोनेंट सिलिकन डाई ऑक्साइड, एल्यूमिना और कैल्शियम डाई ऑक्साइड का परीक्षण कर ऐसे विकल्प तलाशे जिसमें यह कम्पोनेंट इस्तेमाल हो सकें। फ्लाई ऐश के केमिकल मोडिफिकेशन से ऐसा जियो-कम्पाउंड तैयार किया, जिसका इस्तेमाल सीमेंट के स्थान पर हो सके। 1500 से 1600 डिग्री तापमान में सीमेंट बनती है।

इससे पर्यावरण में वायु प्रदूषण बढ़ता है। जबकि फ्लाई ऐश से बना वैकल्पिक मटेरियल सिर्फ 35 से 40 डिग्री में तैयार हो जाता है। स्मार्ट सिटी के सीईओ अंकित अस्थाना ने बताया कि फ्लाई ऐश से सड़क बनाने का विचार अच्छा है। हम इस पर जल्द निर्णय लेंगे।

कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन न के बराबर

वैज्ञानिकों के अनुसार 1 टन सीमेंट तैयार करने में 1 टन कार्बन डाई ऑक्साइड रिलीज होती है। जबकि, फ्लाई ऐश की प्रिपरेशन में कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन न के बराबर होता है। इससे पानी की भारी बचत होती है। सीमेंट की सड़क तैयार करने पर मजबूती के लिए 21 दिनों तक पानी से तराई करना पड़ता है, जबकि फ्लाई ऐश से बनी सड़क में तराई की जरूरत नहीं पड़ती।

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