मौत का चैंबर:सुरक्षा पर खर्च सिर्फ 8 लाख, 20% निगमकर्मियों के पास ही गम बूट, ग्लव्स

भोपालएक महीने पहले
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भारत सिंह की मौत इसी में गिरने से हुई थी। - Dainik Bhaskar
भारत सिंह की मौत इसी में गिरने से हुई थी।
  • अंकिता कंस्ट्रक्शन जिम्मेदार

लाऊखेड़ी में सीवरेज चैंबर में उतरने से इंजीनियर और मजदूर की मौत के मामले में अब नगर निगम की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में है। नगर निगम में सिर्फ 20 फीसदी कामगारों के पास ही गम बूट, ग्लव्स और मास्क जैसे सामान्य सुरक्षा उपकरण हैं। मैन्युअल के अनुसार खास तौर से सीवर लाइन में काम करने वाले कर्मचारियों को ऑक्सीजन सिलेंडर, गैस डिटेक्टर, सीढ़ी, गॉगल्स और टॉर्च वाली हेलमेट आदि दिया जाना चाहिए।

लेकिन यह भी किसी को नहीं दिया जा रहा है। राजधानी में 879 छोटे-बड़े नाले हैं। इन नालों की सफाई करते समय भी पूरी सुरक्षा रखी जाना जरूरी है। लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। नगर निगम ने पिछले साल सुरक्षा उपकरणों की खरीदी पर सिर्फ 8 लाख खर्च कर दिए। हाल ही में उपकरणों की खरीदी के लिए नए सिरे से टेंडर लगाया गया है। लेकिन इसमें भी आक्सीजन सिलेंडर, गैस डिटेक्टर आदि का उल्लेख नहीं है। यानी केवल मास्क, ग्लव्स और गम बूट ही खरीदे जा रहे हैं।

20 लोगों की टीम करती है सीवर लाइनों की सफाई

निगम में सीवर लाइन की सफाई के लिए 20 कर्मचारियों की एक स्पेशल टीम है। इस टीम को पिछले साल एक प्रशिक्षण भी दिया गया था। इन्हें कुछ हैंड टूल्स दिए गए हैं जिनसे ज्यादातर मामलों में बिना नीचे उतरे काम किया जा सके, लेकिन फिर भी दुर्घटना की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। जिस मेन होल (नंबर 35/27) में हादसा हुआ उसकी गहराई 5.9 मीटर है। यह इस क्षेत्र में सबसे गहरा है। इसके आगे 37 मीटर पाइपलाइन और बिछाई जाना है।

नगर निगम ने सुरक्षा उपकरणों को लेकर हाल ही में जो टेंडर निकाला उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, गैस डिटेक्टर का जिक्र तक नहीं

झाबुआ से किताबें लेने आया था भारत, लेकिन यहां मजदूरी करने लगा और हादसा हो गया

हादसे में जिस मजदूर भारत सिंह की मौत हुई है, वह 11 वीं का छात्र था। इसी महीने 2 दिसंबर को वो झाबुआ में अपने गांव पिपली से कुछ किताबें लेने भोपाल आया था। उसके पिता यहां मजदूरी करते हैं। किताबों का खर्चा पिता को ना उठाना पड़े यह सोचकर वह मजदूरी करने लगा।

दोपहर में हमीदिया मर्चूरी के बाहर खड़े उसके पिता शैतान सिंह का बुरा हाल था। भारत उनका बड़ा बेटा था। शैतान सिंह कहते हैं कि भारत कहता था मैं अफसर बनूंगा। उसे कुछ किताबें चाहिए थीं, जिसे लेने के लिए ही शैतान सिंह ने भारत को भोपाल बुला लिया था। दोपहर में खाना खाकर सुपरवाइजर उसे घर से लेकर गया। अभी इंजीनियर दीपक के शव का पोस्टमार्टम होना है।

कंपनी ने सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए

नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह को भेजी रिपोर्ट में निगम ने जिक्र किया है कि दोनों कर्मचारियों की मौत मेनहोल में जहरीली गैस से हुई है। दोनों कर्मचारियों को अंकिता कंस्ट्रक्शन कंपनी ने कोई सुरक्षा उपकरण नहीं पाए गए। रिपोर्ट तैयार करने से पहले निगम के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संतोष गुप्ता मंगलवार को सुबह लाऊखेड़ी पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की।

लेकिन उन्हें कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जिसने दीपक सिंह और भारत सिंह को चैंबर में तरते देखा हो। कंपनी के ही एक कर्मचारी ने रस्सी से बांधकर दोनों को बाहर निकाला। कंपनी के इस प्रोजेक्ट के डायरेक्टर का नाम अंकित पटेल है। उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन फोन लगातार व्यस्त मिला।

मंत्री के निर्देश

पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि कंपनी के जिम्मेदार अफसरों पर नामजद एफआईआर करें। नाबालिग श्रमिक रखे जाने के मामले में भी कार्रवाई हो। निगमायुक्त को निर्देश दिए हैं कि अंकिता कंस्ट्रक्शन पर पेनाल्टी लगाई जाए और मृतकों के परिजन को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा दें।

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