भोपाल की मेडिकल सुविधाओं की पड़ताल:शहर में 11,500 मरीजों को भर्ती करने की ही सुविधा, जरूरत 23 हजार बेड की

भोपाल6 महीने पहले
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हमीदिया अस्पताल - Dainik Bhaskar
हमीदिया अस्पताल
  • केंद्रीय एजेंसी यूआरडीपीएफआई की गाइडलाइन के हिसाब से पर्याप्त नहीं है शहर में मेडिकल फेसिलिटीज
  • शहर के डेवलपमेंट की गाइडलाइन कागज पर

शहर में निजी और सरकारी मिलाकर लगभग 250 से अधिक अस्पतालों में 11,500 मरीजों को भर्ती करने की सुविधा उपलब्ध है, जबकि केंद्र की अर्बन एंड रीजनल डेवलपमेंट प्लान फार्मुलेशन एंड इंप्लिमेंटेशन (यूआरडीपीएफआई) गाइडलाइन के हिसाब से 25 लाख से अधिक आबादी पर 23 हजार मरीजों को भर्ती करने की सुविधा होना चाहिए। इसके लिए हर एक लाख की आबादी पर 6 अलग-अलग तरह के अस्पताल, ढाई लाख की आबादी पर जनरल अस्पताल होना चाहिए।

यह सब आंकड़े भी सामान्य दिनों के हिसाब से हैं। यही वजह है कि महामारी में एक साथ हजारों लोगों के बीमार पड़ने पर अस्पताल में बिस्तर के लिए शुरू होने वाला संघर्ष ऑक्सीजन और आईसीयू तक पहुंच गया। कोरोना महामारी को एक उदाहरण मानकर शहर की मेडिकल सुविधाओं की पड़ताल करें तो साफ है कि गाइडलाइन के मुताबिक अस्पतालों में मापदंड नहीं होने से ही हालात इतने बिगड़ गए हैं।

केंद्र सरकार की यूआरडीपीएफआई वह दस्तावेज है जिसके आधार पर शहर का मास्टर प्लान तैयार होता है। इसके मापदंडों के अनुसार ही शहर में भविष्य की अनुमानित आबादी के हिसाब से जरूरतों का आकलन करके अलग-अलग सुविधाओं के लिए लैंडयूज तय किए जाते हैं।

भोपाल की स्थिति

  • 2621 बिस्तर हैं हमीदिया, सुल्तानिया, जेपी और गैस राहत के अस्पताल व बीएमएचआरसी को जोड़कर। एम्स को जोड़ने पर संख्या 3521 होती है।
  • शहर के निजी मेडिकल कॉलेजों को जोड़ने पर इसमें 2000 बिस्तर और जुड़कर आंकड़ा 5521 हो जाता है। शेष 250 से अधिक अस्पतालों के बिस्तर जोड़ने पर 11,500 होता है।

हर कैटेगरी के अस्पताल के लिए आबादी और एरिया तय
शहरों के विकास के लिए यूआरडीपीएफआई गाइडलाइन में हर कैटेगरी के अस्पताल के लिए आबादी और एरिया तय है। इसमें भोपाल अस्पतालों की संख्या तो पूरी करता है, लेकिन अस्पताल पूरे शहर में समान अनुपात में नहीं बंटे हैं।

बहुत पीछे है भूमि विकास नियम
भूमि विकास नियम में 80 हजार की आबादी पर सिर्फ 200 बेड के एक अस्पताल की बात कही है। अन्य स्पेशलिटीज अस्पतालों का जिक्र नहीं है।

भूमि विकास नियम 2012
अस्पताल बेड आबादी एरिया
स्वास्थ्य केंद्र 00 16000 1 हैक्टे.
सामान्य अस्पताल 200 80000 4 हैक्टे.

इतिहास... यदि भोपाल में अस्पतालों के इतिहास की बात करें तो 1891 में लेडी हॉस्पिटल और 1925 में प्रिंस ऑफ वेल्स हॉस्पिटल बना। प्रिंस ऑफ वेल्स हॉस्पिटल ही वर्तमान हमीदिया है और यह दोनों गांधी मेडिकल कॉलेज हैं।

केवल गैस राहत के अस्पताल बने
भोपाल में यदि सरकारी अस्पतालों की बात करें तो 1960 के दशक में बने जेपी अस्पताल के बाद 1984 में गैस त्रासदी होने से गैस पीड़ितों के लिए छोटे-बड़े 24 अस्पताल बने। इसके बाद एम्स भी शामिल हुआ।

करोंद में अस्पतालों की संख्या बढ़ी
पिछले दो-तीन सालों में करोंद क्षेत्र में अस्पतालों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। यहां छोटे-छोटे कई अस्पताल खुल गए हैं। एम्स के आसपास भी नए अस्पताल आना शुरू हो गए हैं।

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