प्रदेश में कोयले का संकट:सिर्फ चार दिन का कोयला बचा, नवरात्रि पर मप्र में गहरा सकता है बिजली संकट

भोपाल4 महीने पहलेलेखक: अनूप दुबोलिया
  • कॉपी लिंक
चारों थर्मल पावर प्लांट में सिर्फ 2.67 लाख मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध। - Dainik Bhaskar
चारों थर्मल पावर प्लांट में सिर्फ 2.67 लाख मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध।

प्रदेश में नवरात्रि और रबी सीजन से पहले बिजली संकट गहरा सकता है। वजह यह है कि प्रदेश के चारों थर्मल पावर प्लांट में सिर्फ 2.67 लाख मीट्रिक टन कोयला बचा है। यह चार दिन का है। हालत यह है कि सिंगाजी ताप बिजली घर में सिर्फ 2 दिन का कोयला बचा है। इस कारण बिजली उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।

पिछले साल इन दिनों इन चारों ताप बिजली घरों में 13 लाख टन कोयला था। बिजली मामलों के जानकार एवं रिटायर्ड चीफ इंजीनियर राजेंद्र अग्रवाल कहते हैं पिछले 50 साल में यह सबसे गंभीर स्थिति है। सारणी, बिरसिंहपुर, अमरकंटक चचाई और सिंगाजी पावर प्लांट से आधा ही यानी 2000 मेगावाट बिजली उत्पादन हो पा रहा है। रबी सीजन की फसलों की बुआई के दौरान ग्रामीण इलाकों में बिजली सप्लाई की दिक्कत पैदा हो सकती है। शहरी इलाकों को भी बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है।

किस प्लांट में कितना कोयला

  • अमरकंटक 26800
  • बिरसिंहपुर 130300
  • सारणी 76200
  • सिंगाजी 60800
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की ताजी रिपोर्ट के अनुसार

पूरे देश में कोयले का संकट है, पावर सप्लाई की दिक्कत नहीं होने देंगे

  • कोयले का संकट पूरे देश में है, सिर्फ मध्यप्रदेश में ही नहीं है। कोल इंडिया को बकाया राशि देने के लिए व्यवस्था की जा रही है। बिजली सप्लाई की दिक्कत नहीं होने देंगे। हमने पूरे इंतजाम कर लिए हैं। कोयले की कमी से थर्मल पावर प्लांट की कोई भी यूनिट बंद नहीं होने देंगे। - प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री मध्य प्रदेश
खबरें और भी हैं...