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ब्लैक फंगस के इंजेक्शन की दर्दभरी गुहार:प्लीज डीन से मिलवा दो, इंजेक्शन न मिला तो पापा की दूसरी आंख भी चली जाएगी

भोपाल5 महीने पहले
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अस्पताल में सुनील। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में सुनील।

भैया, मैं आपके हाथ जोड़ता हूं। पैर पड़ता हूं, डीन सर से मिलने दो। दया करो। ब्लैक फंगस से मेरे पापा की बायीं आंख चली गई है। प्लीज मदद करें। इंजेक्शन नहीं मिला तो पापा की दूसरी आंख भी चली जाएगी। भैया, अंदर जाने दो। मैं सोमवार से लगातार आ रहा हूं। यह गुहार गुरुवार को ऋषभ शर्मा ने लगाई। आंखों में आंसू लिए वह जीएमसी डीन से मिलने की फरियाद उनके चैंबर के बाहर कर रहा था। उसकी आंखों में आंसू हैं।

दरअसल, प्यून को हुक्म है किसी को अंदर न भेजा जाए। वहीं, सरकारी हुक्मनामा है कि एम्फोटेरिसिन बी लाइफोसोमल इंजेक्शन जीएमसी की पर्ची के बाद मिलेगा। करीब 150 लोग इसी इंजेक्शन की खातिर यहां जमा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। दोपहर में चैम्बर के बाहर एक पर्चा चस्पा कर दिया जाता है। इसमें लिखा है- इंजेक्शन नहीं है। यहां खड़े लोगों के चेहरे पर मायूसी छा जाती है।

कुछ सिस्टम को कोसते है तो कुछ डीन ऑफिस के आसपास के लोगों से मदद मांगते है, लेकिन सबका एक ही जवाब वह कुछ नहीं कर सकते। यहां बुधवार को हंगामा भी हुआ था। इसके बाद भी गुरुवार को स्थिति नहीं सुधरी।

अवधपुरी निवासी ऋषभ के मुताबिक 47 वर्षीय पिता सुनील कुमार शर्मा को कोरोना हुआ था। वे प्राइवेट सर्विस करते हैं। 19 अप्रैल को पापा को रुद्राक्ष अस्पताल में दाखिल कराया था। तब उनकी आंख में तकलीफ हुई। इसके बाद उन्हें अरेरा कॉलोनी स्थित डे-केयर क्लीनिक में शिफ्ट किया। इसके बाद जेनम हॉस्पिटल लेकर गए। यहां डॉ. निचलानी ने पापा की जांच के बाद बताया कि उनकी बायीं आंख की रोशनी चली गई है। दांयीं आंख को बचाने के लिए लाइफोसोमल एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन लगाना होगा।

जब तक इस इंजेक्शन पर सरकारी नियंत्रण नहीं था, तब तक एक लाख रुपए खर्च करके दिल्ली और हैदराबाद से 10 इंजेक्शन बुलवा लिए थे। करीब एक हफ्ते तक रोज चार इंजेक्शन लगना है। ऐसी स्थिति में हमें और इंजेक्शन की ज़रूरत है मैं पिछले तीन दिन से जीएमसी आ रहा हूं। कोई सुनवाई नहीं हो रही। दवा मार्केट में महंगे दाम का ऑफर देने पर भी ये नहीं मिल रहे।ये अकेले ऋषभ की कहानी नहीं है। शहर में ब्लैक फंगस के करीब 245 मरीज भर्ती हैं। इनमें से ज्यादातर इंजेक्शन के संकट से जूझ रहे हैं।

इधर, गुरुवार को जीएमसी डीन डॉ. जितेन शुक्ला को मरीजों के परिजनों ने घेर लिया। उनसे इंजेक्शन के लिए पर्चे पर साइन करने की बात कही। इस पर डीन ने ये कहते हुए साइन करने से इंकार कर दिया। कि उनके यहां पर इंजेक्शन का स्टॉक नहीं है। इस पर वहां मौजूद लोग भड़क गए। इंजेक्शन के लिए पक्षपात का आरोप लगाया। गुरुवार को देर रात प्रदेश के लिए 900 एम्फोटेरिसिन बी इंजेक्शन आए हैं।

कलेक्टर ने ईएनटी सर्जन से कहा- नेजल एंडोस्कोपी से कोरोना पॉजिटिव और रिकवर्ड मरीजों की करो ब्लैक फंगस जांच
कोविड और पोस्ट कोविड मरीजों में ब्लैक फंगस के संक्रमण की जांच नेजल एंडोस्कोपी से निजी अस्पतालों में कार्यरत ईएनटी सर्जन भी करेंगे। ताकि इस संक्रमण को शुरुआती स्टेज में चिह्नित कर संक्रमितों का इलाज किया जा सके। यह निर्णय गुरुवार को एसोसिएशन ऑफ ईएनटी ऑफ इंडिया की भोपाल ब्रांच के डॉक्टरों और जिला प्रशासन के अफसरों की मीटिंग में हुआ। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने ईएनटी सर्जन्स को कहा - नेजल एंडोस्कोपी से ब्लैक फंगस के लक्षण वाले कोविड पॉजिटिव और कोविड रिकवर मरीजों की जांच करो।

केंद्र की चिट्‌ठी मिली: चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया कि ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने के संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की चिट्‌ठी मिली है। इसमें इसे महामारी घोषित करने की सिफारिश की गई है। राज्य सरकार ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने का फैसला शुक्रवार को होगा।

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