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जूडा की हड़ताल:जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष बोले - मंत्री ने अब तक नहीं दिया मिलने का समय, 13 अप्रैल से तीन दिन इमरजेंसी सेवा करेंगे बंद

भोपाल9 महीने पहले
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जूनियर डॉक्टरों काे चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने नहीं दिया मिलने का समय - Dainik Bhaskar
जूनियर डॉक्टरों काे चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने नहीं दिया मिलने का समय

​​​​​हमीदिया अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों (जूडा) ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के मिलने का समय नहीं देने के बाद 13 अप्रैल सुबह 8 बजे से इमरजेंसी सेवा बंद करने का एलान कर दिया है। जूडा 8 अप्रैल से सांकेतिक हड़ताल कर समानांतर 10 विभागों की ओपीडी चला रहा है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के मध्य प्रदेश और भोपाल के अध्यक्ष डॉ. अरविंद मीणा ने कहा कि हम कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए मरीजों के हित में हड़ताल नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार मरीजों के साथ ही डॉक्टरों की सुविधाओं को लेकर उदासीन बनी हुई। उन्होंने कहा कि हम मरीजों की सेवा के लिए 8 अप्रैल से समानांतर ओपीडी चला रहे है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने 12 अप्रैल को मिलने का समय दिया था, लेकिन दोपहर तक हमें मिलने नहीं बुलाया। इसलिए हम 13 अप्रैल से अगले तीन दिन इमरजेंसी सेवा और इसके बाद कोविड मरीजों का इलाज बंद कर देंगे। इसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार होगी।

यह है जूनियर डॉक्टरों की मांग

  • हमीदिया अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए बेड बढ़ाए जा रहे है, जबकि अस्पताल में नॉन कोविड मरीजों के लिए स्पेशल इलाज की सुविधा है। ऐसे में अस्पताल आने वाले गरीब नॉन कोविड मरीजों के लिए भी इलाज की सुविधा के लिए जगह रखी जाए।
  • पिछले साल मुख्यमंत्री ने कोरोना वारियर को 10 हजार रुपए प्रतिमाह सम्मान निधि देने का वादा किया था, एक साल बाद भी कोरोना वारियर को राशि नहीं मिली।
  • सरकार ने 2018 में वादा किया था कि प्रति वर्ष जूनियर डॉक्टरों के मानदेय में 6 प्रतिशत की वृद्धि होगी, लेकिन कुछ नहीं किया गया। जबकि महंगाई बढ़ने के साथ ही पीजी स्टूडेंट् की फीस को 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख कर दिया गया।
  • स्पेशलिटी करने आए कोरोना वॉरियर अपनी पढ़ाई छोड़ कर मरीजों का इलाज करने में जुटे हुए है। एक वर्ष से ना तो कुछ सीख-पढ़ पा रहे ना ही रिसर्च कर पा रहे। उनकी सरकार पूरी फीस माफ करें।
  • कोरोना मरीजों के इलाज में सेवा देने वाले जूनियर डॉक्टरों की सेवा को सरकार बॉन्ड के तहत गांव में एक साल की सेवा देने के बराबर माने।
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