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अफसर ही दे रहे धमकी:महिला स्व सहायता समूहों पर स्कूली बच्चों की ड्रेस के लिए महंगा कपड़ा खरीदने का दबाव

भोपाल3 महीने पहले
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प्रतिकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतिकात्मक फोटो
  • कहीं और से खरीदी की तो रिजेक्ट करेंगे ड्रेस, घर बिकवाकर करेंगे वसूली
  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री सिसोदिया ने दिए जांच के आदेश

प्रदेश में स्कूली बच्चों की ड्रेस के लिए महंगा कपड़ा खरीदने के लिए महिला स्व सहायता समूहों पर दबाव डाला जा रहा है। जिन फर्मों से कपड़े की खरीदी की जाना है, उनका गठजोड़ अफसरों से है। आजीविका मिशन से जुड़े जिला और ब्लाॅक प्रबंधक महिलाओं को धमकी देकर मनमाफिक ठेकेदारों से ड्रेस के लिए कपड़ा खरीदने को कह रहे हैं।

महंगा कपड़ा खरीदने के लिए महिलाएं मना करती हैं तो उन्हें धमकी दी जा रही है कि उनके बताए गए प्रतिष्ठान की जगह दूसरी जगह से खरीदी की तो ड्रेस रिजेक्ट कर उनका घर और जमीन बिकवाकर वसूली की जाएगी। महिलाओं में इस कदर भय व्याप्त है कि वे सामने आने के लिए तैयार नहीं है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

ताजा मामला तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आयकर छापे की जद में आए अश्विनी शर्मा की फर्म ए-1 जनरल ट्रेडर्स का है। शर्मा के यहां आयकर विभाग का अप्रैल 2019 में छापा पड़ा था जिसमें उनके मंत्रालय में नेताओं और अफसरों से संपर्क होने की बात सामने आई थी। इस फर्म का पता ए-1 जनरल ट्रेडर्स पांचवी मंजिल प्लेटिनम प्लाजा माता मंदिर, भोपाल है।

कमिश्नर कियावत को सौंपी मामले की जांच

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने रायसेन जिले के अंतर्गत विकासखंडों में नि:शुल्क गणवेश योजनाओं में अनियमितता की जांच कमिश्नर कवींद्र कियावत को सौंपी है। यह शिकायत मप्र-डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन रायसेन में पदस्थ जिला परियोजना प्रबंधक एम राजा की है। इसमें आठवीं कक्षा तक नि:शुल्क गणवेश योजना के अंतर्गत समन्वयक के माध्यम से महिलाओं पर दबाव बनाकर मनचाही फर्मों से ऊंची दरों पर गुणवत्ताविहीन कपड़े की खरीदी के आदेश दिलाए जा रहे हैं।

हम तो सिर्फ प्रक्रिया के बारे में बताते हैं : राजा

रायसेन में पदस्थ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक एम राजा का कहना है कि महिलाओं के स्वसहायता समूहों को हम सिर्फ खरीदी की प्रक्रिया के बारे में ही समझाते हैं कि उन्हें कैसे कपड़े की खरीदी करना है। कपड़ा कहां से खरीदना है। इस बारे में फैसला तो महिलाओं को लेना होता है।

जांच होगी, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा : भार्गव

रायसेन कलेक्टर उमाशंकर भार्गव का कहना है कि महिलाओं के स्व सहायता समूहों को कपड़े की खरीदी बाजार से करना है। किसी फर्म विशेष से कपड़े की खरीदी कराने का सवाल ही नहीं उठता। इस मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। शासन के आदेश हैं कि महिलाओं के स्व सहायता समूह बाजार से खरीदी करें। इस प्रक्रिया का पालन कराया जाएगा।

फर्म का जीएसटी नंबर

फर्म का जीएसटी नंबर N23ARZP53345N22V है। इस फर्म को बेगमगंज जनपद पंचायत में उपार्जन समिति गणवेश स्वसहायता समूह को पांचवी तक के स्कूली बच्चों को कपड़ा सप्लाई करने को अनुमति मिली है।

भंडार क्रय नियम

पावरलूम संस्था ही कर सकती है सप्लाई

भंडार क्रय नियम के हिसाब से कपड़ा आरक्षित श्रेणी में है। इसकी सप्लाई राज्य सरकार की अधिकृत संस्था पावरलूम द्वारा ही की जा सकती है। यह संस्था जिस कपड़े को 200 से 210 रुपए में देती है, वह अफसरों की चहेती फर्म से 230 से 260 रुपए पर खरीदा जा रहा है। रायसेन के बाड़ी, गैरतगंज, बेगमगंज उदयपुरा, सांची और ओबेदुल्लागंज में खरीदी का काम जारी है। जिले में 2 लाख स्कूली ड्रेस के लिए 7.50 करोड़ रुपए के कपड़े की खरीदी करना है।

मजदूरी तक नहीं मिल रही

महिलाओं के स्वसहायता समूहों को एक ड्रेस के लिए कपड़ा खरीदी से लेकर बनाकर छात्र को वितरण किए जाने तक के 300 रुपए मिलते हैं। इस राशि में से 260 से 280 रुपए में कपड़े की खरीदी होती है। सैंपल की जांच कराने के लिए उन्हें बुरहानपुर जाना होता है। इस प्रक्रिया में उन्हें मजदूरी तक नहीं मिल पा रही है।

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