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सांसों पर संकट:पहले ऑक्सीजन नहीं थी अब लाने के लिए टैंकर कम; मध्यप्रदेश के पास अभी 86 टैंकर, जरूरत 96 टैंकर की

भोपाल14 दिन पहले
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643 टन में से 92 टन ऑक्सीजन स्थानीय स्तर पर मिल रही, बाकी करीब 550 टन में से 490 टन कंपनियाें से लाने की है व्यवस्था। (सिंबॉलिक फोटो) - Dainik Bhaskar
643 टन में से 92 टन ऑक्सीजन स्थानीय स्तर पर मिल रही, बाकी करीब 550 टन में से 490 टन कंपनियाें से लाने की है व्यवस्था। (सिंबॉलिक फोटो)
  • केंद्र से मिले आवंटन के बाद भी मप्र नहीं ला पा रहा 50 से 60 टन ऑक्सीजन
  • भोपाल और इंदौर में हर दिन 110 से 130 टन ऑक्सीजन की जरूरत

राज्यों में ऑक्सीजन की मारामारी के बीच केंद्र सरकार से मिले आवंटन के बाद भी मप्र अपने कोटे की करीब 50 से 60 टन ऑक्सीजन सप्लायर कंपनियों से नहीं ला पा रहा है। अभी भी टैंकरों की कमी बनी हुई है। मप्र के पास इस समय 86 टैंकर हैं, जबकि 10 टैंकरों की और जरूरत बनी हुई है। फिलहाल ऑक्सीजन के लिए बने टॉस्क फोर्स ने टैंकरों का रोटेशन ऐसा बनाया है, जिससे रिलायंस के जामनगर, लिंडे के भिलाई और राउरकेला, बोकारो, सेल भिलाई, मोदी नगर और हजारी प्लांट में निरंतर मप्र के टैंकर ऑक्सीजन भरने के लिए खड़े रहें। कुछ बीच रास्ते में हों और कुछ मप्र में ऑक्सीजन खाली करके तुरंत रवाना हो जाएं।

इसी कारण मप्र अभी 490 से 500 टन ऑक्सीजन दूसरे राज्यों से ला पा रहा है। बाकी जरूरत के ऑक्सीजन के लिए मप्र ने स्थानीय स्तर पर ही 92 टन ऑक्सीजन जुटाना शुरू कर दिया है। इसमें 60-70 टन ऑक्सीजन उद्योगों से और बाकी नए ऑक्सीजन प्लांट व कंसंट्रेटर से ली जा रही है। केंद्र ने हाल ही में नाइट्रोजन और दूसरे रसायन ले जाने वाले टैंकरों को मोडिफाई करके ऑक्सीजन लाने युक्त बनाने की स्वीकृति दी है। मप्र को उम्मीद है कि अब टैंकरों की कमी खत्म होगी। वर्तमान में रोजाना 27 से 30 टैंकर मप्र ऑक्सीजन लेकर पहुंच रहे हैं।

जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन में भी 150 टन की जरूरत
इधर, सूत्रों का कहना है कि भोपाल-इंदौर में 110 से 130 टन ऑक्सीजन की खपत प्रतिदिन की बनी हुई है। इसके अलावा जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में भी डेढ़ सौ टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है। साफ है कि खपत का आधा से ज्यादा ऑक्सीजन इन्हीं जगहों पर जा रहा है। छिंदवाड़ा का ऑक्सीजन प्लांट शनिवार को शुरू हो गया है, तो उससे भी सप्लाई बढ़ी है।

टैंकर एयर लिफ्ट कराए हैं , ट्रेन से 6 टैंकर आए
सही है कि केंद्र के आवंटन के अनुसार मप्र अपनी ऑक्सीजन नहीं ला पा रहा। टैंकर कुछ कम पड़ रहे हैं। राऊरकेला 1100 से 1200 किमी दूर है। भिलाई जाने में 24 घंटे, जामनगर में 24 से 26 घंटे लग रहे हैं। बोकारो में 30 घंटे लग रहे हैं। इसलिए हमने टैंकर एयर लिफ्ट कराए। ट्रेन से छह टैंकर आए। कोशिश कर रहे हैं कि कम से कम वक्त में ऑक्सीजन मप्र ला पाएं।
-अरविंद भदौरिया, मंत्री (ऑक्सीजन के मामले में दूसरे राज्यों से समन्वय का काम)

कालाबाजारी- सतना और रीवा में ऑक्सीजन के 753 सिलेंडर जब्त किए
सतना/ रीवा | मेडिकल ऑक्सीजन की जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतों पर रविवार को सतना-रीवा में की गई छापामारी में ऑक्सीजन के 753 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। सतना में विंध्या इंजीनियरिंग की गोदाम से 661 सिलेंडर बरामद किए। इनमें 571 जंबो और 90बी टाइप सिलेंडर हैं। विंध्या इंजीनियरिंग के संचालक राजीव जैन के खिलाफ कोलगवां थाने में अलग-अलग धाराओं के तहत 5 केस दर्ज किए गए। रीवा में बस स्टैंड स्थित विंध्या इंजीनियरिंग और त्रिवेणी ऑक्सीजन के गोदाम से 92 सिलेंडर जब्त किए। आरोप है कि किट के साथ ऑक्सीजन के सिलेंडर 32 हजार रुपए में अवैध रुप से बेचे जा रहे थे। इन ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग शासकीय कोविड केयर सेंटरों में भर्ती कोरोना संक्रमितों के उपचार में किया जाएगा।

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