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दिमाग पर संक्रमण का अटैक:कोरोना से बढ़े मनोरोगी; स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी बनेगी, कोरोना के कारण हताशा में खुदकुशी के मामले

भाेपालएक महीने पहलेलेखक: भगवान उपाध्याय
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कोरोना के कारण प्रदेश में मनोरोगियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई है। - Dainik Bhaskar
कोरोना के कारण प्रदेश में मनोरोगियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई है।
  • मप्र में 30 लोगों ने कर ली आत्महत्या और इतने ही लोगों ने जान देने की कोशिश की
  • कोई छत से कूदा, किसी ने फांसी लगाई

कोरोना के कारण प्रदेश में मनोरोगियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई है। इस महामारी के डर के कारण प्रदेश में 30 लोगों ने आत्महत्या कर ली और लगभग इतने ही लोगों ने जान देने का प्रयास किया। हालात यह है कि जिन अस्पतालों में मानसिक रोगियों की कभी आमद ही नहीं होती थी, वहां भी कोरोना से डिप्रेशन में आए हजारों लोग डॉक्टरों की सलाह लेने पहुंचे।

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में इस दौरान कोरोना के कारण चिंता और अवसाद में डूबे लगभग 1.29 लाख लोगों की काउंसिलिंग की गई। इन हालात को देखते हुए मनोरोगियों को बेहतर इलाज और उचित मार्गदर्शन देने के लिए राज्य सरकार जल्द ही स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी बनाने जा रही है। यह अथॉरिटी स्वतंत्र रूप से प्रदेश में मनोरोगियों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए कार्यक्रम बनाएगी।

मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे शहरों में तो कोरोना के पहले भी चिंता और अवसाद में डूबे मरीजों के केस आते थे, लेकिन कोरोना के दौरान जिले और छोटे कस्बों से भी ऐसे केस बहुत ज्यादा आने लगे हैं। कोरोना काल में संक्रमितों और उनके परिजनों को मानसिक अवसाद से बाहर निकालने के लिए मनोरोग विशेषज्ञों ने कोरोना वार्डों में पहुंचकर संक्रमितों की काउंसिलिंग की। मरीजों और उनके परिजनों को फोन पर निराशा दूर करने के टिप्स दिए। सभी जिला अस्पतालों में “मनकक्ष” स्थापित किए गए हैं, जहां ओपीडी में मनोरोगियों के परामर्श और इलाज की व्यवस्था की गई है।

150 मनोरोग डॉक्टरों की जरूरत

मध्यप्रदेश में फिलहाल सिर्फ 105 मनोचिकित्सक हैं। ग्वालियर के मानसिक आरोग्यशाला में 1 प्रोफेसर, 3 असिस्टेंट प्रोफेसर और 11 मेडिकल ऑफिसर के पद खाली हैं। इसी तरह इंदौर के मेंटल हास्पिटल में डॉक्टरों के 4 पद खाली हैं। फिलहाल इंदौर में 30, भोपाल में 26, जबलपुर में 17 और ग्वालियर में 10 मनोरोग चिकित्सक हैं। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में 150 और मनोरोग चिकित्सकों की जरूरत है। फिलहाल ग्वालियर के मानसिक आरोग्यशाला में 210 और इंदौर के मनोरोग अस्पताल में 155 मरीज भर्ती करने की व्यवस्था है। प्रदेश के सिर्फ 18 जिला अस्पतालों में ही मनोरोग चिकित्सक पदस्थ हैं। जबकि हर जिले में एक मनोरोग चिकित्सक का पद स्वीकृत है।

केस : पति सहित तीन लोगों की मौत के बाद बहू ने लगाई फांसी

इस साल अप्रैल और मई में दो दर्जन कोरोना संक्रमितों या उनके परिजनों ने डिप्रेशन में आकर मौत को गले लगाया। भोपाल में चिरायु अस्पताल, हमीदिया अस्पताल और एम्स में मरीजों ने खुदकुशी की। इंदौर के शेल्वी अस्पताल में एक महिला ने 9वीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दी। पति की कोरोना से मौत होने के बाद हताश महिला ने यह कदम उठाया। इंदौर के ट्रेजर टाउनशिप निवासी कोरोना से ठीक हो चुके एक युवक ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। देवास में अपनी ससुराल में पति सहित तीन लोगोंं की कोरोना से मौत होने के बाद अवसाद में आई परिवार की छोटी बहू ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बिजलपुर इंदौर निवासी एक युवक की कोरोना से मौत होने की सूचना मिलने के बाद उनकी पत्नी ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रायसेन जिले के मंडीदीप में रहने वाली एक युवती ने कोरोना से अपनी मां की मौत से अवसाद में आकर अपार्टमेंट की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। इसी तरह आगर मालवा जिले के कानड़ कस्बे में कोरोना संक्रमित एक युवक ने बिजली के टॉवर पर चढ़कर फांसी लगाई।

चिंता और उदासी के केस सबसे ज्यादा : मनोरोग विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना के दौरान 30 प्रतिशत लोगों में चिंता, 30 प्रतिशत लोगों में उदासी और 25 प्रतिशत लोगों में अवसाद की स्थिति देखी गई। शेष 15 प्रतिशत लोगों में सिर्फ डर था। अवसाद की स्थिति में पहुंचे लोगों का विश्लेषण करने पर पाया कि कोरोना के कारण या तो इनके परिवार में नजदीकी सदस्य की मृत्यु हो गई थी या उनका बड़ा आर्थिक नुकसान हो गया था।

एक्सपर्ट ओपिनियन- इलाज के लिए जिला स्तर पर इंतजाम हो

प्रदेश में मनोरोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार को एक व्यापक योजना बनानी चाहिए। हर जिले का मेंटल हेल्थ प्लान बनाना चाहिए। अस्पतालों में मनोरोगियों की काउंसिलिंग और इलाज के लिए सेल बनाना होगा। डिप्रेशन दूर करने के लिए सीनियर साइकियाट्रिस्ट की भर्ती करनी होगी।' -डॉ. रामगुलाम राजदान, मनोचिकित्सक एवं प्रो-चांसलर, मालवांचल विश्वविद्यालय, इंदौर